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भारत की आवाज

हमारा ब्लॉग आयुर्वेद से संबंधित है और हम हर प्रकार की बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक सलाह देते हैं| यदि आपको बीमारियों से संबंधित आयुर्वेदिक उपचार की आवश्यकता है तो आप हमारा ब्लॉक फॉलो कर सकते हैं|

योग करने का सही समय कब होता है?

1. सुबह का समय सबसे उपयुक्त होता है 2. खाना खाने के कुछ घंटे बाद ही योग अभ्यास करें 3. योग शुरू करने के पहले खुद को तनावमुक्त और मन को शांत कर लें 4. चुने हुए समय पर ही नियम से योग करें 5. शरीर में आए बदलाव को अनुभव करने के लिए नियमित रूप से योग करें 6. योग का अभ्यास ज़्यादा न करें

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नवजात को सर्दी खांसी सिम्पल टीप्स


*अजवाइन*
अजवाइन को हल्का गुलाबी भून ले कपडे मे लपेट कर बच्चे की छाती पर हल्की सिकाई दे
ऐसी ही दूसरी पोटली बना कर बच्चे के सीरहाने रखै बच्चे को सांस लेने मे आराम रहता है जमा बलगम आसानी से नीकल जाता है

*सरसों का तेल*

5-10 चम्मच सरसों के तेल में पिसे हुए लहसुन और अजवाइन के बीज का तड़का दें । इसके ठंडा होने पर इसे छान कर एक बोतल में भर लें। जब भी आपको लगे की बच्चों को सर्दी–खांसी की शुरुआत हो तो इसकी हल्के हाथ से बच्चे के माथे, गले और छाती पर मालिश करें। तकलीफ से तुरंत आराम आना शुरू हो जाएगा।

*तुलसी पत्ते*

तुलसी के पत्तों में बहुत औषधीय गुण होते हैं। छोटे बच्चों को सर्दी–खांसी ठीक करने के उपाय के रूप में इन्हें पानी या दूध किसी भी प्रकार से मिलकर पिया जा सकता है। तुलसी के कुछ पत्तों को पानी में भिगो कर एक घंटे के लिए रख दें और 2 वर्ष से ऊपर के बच्चों को यह पीने के लिए दिया जा सकता है ।छोटे बच्चे यदि ऊपर का दूध लेते है तो इसमे  पका कर या दे

*विक्स वेपोरब*

छोटे बच्चों की खांसी ठीक करने के लिए विक्स एक बहुत अच्छा उपाय है । बच्चे के पाँव में इसकी मालिश करके उसे मोज़े पहना दें। अगर चाहें तो इसकी मालिश छाती और गले पर भी कर दें।

*नमी*

जब छोटे और नवजात बच्चों को सर्दी खांसी का असर होता है तो बच्चे हवा की शुष्कि से परेशान हो जाते हैं । ऐसे में कमरे में नमी देने का पूरा इंतजाम करके उन्हें आराम देने का प्रयास करें।

*भाप दें*

बहुत बच्चों को कभी भी भाप उस तरह नहीं दी जाती है जैसे हम वयस्क व्यक्ति को देते हैं। इसके लिए आप कमरे में के बाल्टी या बाथरूम में बाथटब गरम पानी से भर लें। ऐसे में छोटे बच्चे को अपनी बाँहों में लेकर भाप के वातावरण में खड़े हो जाएँ । इससे छाती में जमा बलगम आसानी से ढीला पड़ सकता है । नन्हें बच्चों की सर्दी–खांसी में इससे बहुत जल्दी आराम आने की संभावना होती है।

*ज़ीरे* को पाचन तंत्र के स्वस्थ्य के लिए लाभदायी माना जाता है। लेकिन क्या आप जानतीं हैं की इसका उपयोग छोटे बच्चों में सूखी खांसी के उपचार में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। थोड़े से पानी में एक चम्मच ज़ीरा डालकर उबाल लें। अच्छी तरह उबाल आने के बाद इसे छान लें और ठंडा होने पर इसे बच्चे को देंगी तो उसे निश्चित ही सूखी खांसी में आराम आएगा।

*घी*

छोटे बच्चों को सूखी खांसी होने की स्थिति में 2 बड़े चम्मच घी को गरम करके उसमें 2-3 काली मिर्च के दाने पीस कर मिला दें और बच्चे को सारा दिन थोड़ा–थोड़ा देते रहें । यह एक वर्ष से ऊपर के बच्चों को आराम से दिया जा सकता है।

*बच्चों की खांसी का घरेलू नुस्खा है मां का दूध*

जितना संभव हो आपको अपने बच्चे को स्तनपान कराना चाहिए, क्योंकि मां के दूध में ऐसे एंटीबॉडीज होते हैं, जो वायरस, रोगाणुओं और बैक्टीरिया से लड़ने के लिए बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।


*बच्चों की खांसी का उपाय है नारियल तेल से मालिश* –

इसके लिए आप आधा कप नारियल तेल में एक प्याज, दो से तीन तुलसी की पत्तियों और पान की बेल का तना मिलाकर गर्म करें। गैस को बंद करने के बाद इसमें एक चुटकी कपूर को भी मिला लें। इस तेल से बच्चे की छाती, गर्दन और अंडर आर्म (under arms/ बगल) में मालिश करने से बच्चे की बंद नाक खुल जाती है और उसको सांस लेने में आसानी होती है।

 *बच्चों की खांसी को कम करती है हल्दी*

इस उपाय के लिए आपको हल्दी को पानी में घोल कर पेस्ट तैयार करना होगा। इसके बाद इस पेस्ट को किसी बड़े चम्मच में रखकर गर्म कर लीजिए, जब यह हल्का गर्म हो तब इसे अपने बच्चे की छाती, पैरों और माथे पर लगाएं। हल्दी की गर्माहट बलगम को अवशोषित करती है और बच्चे को राहत प्रदान करती है।

 *शिशु की खांसी में लहसुन और अजवाइन के तेल से* मालिश करें - इस तेल को बनाने के लिए आप लहसुन को सरसों के लगभग एक-चौथाई कप तेेल में डालकर गर्म कर लें। हल्का गर्म रहने पर तेल से बच्चे के पैरों और छाती के तलवों पर मालिश करें। अजवाइन के बीजों को भी इस तेल में मिलाया जा सकता है। सरसों के तेल का गर्म प्रभाव बच्चे की खांसी को कम करने में मदद करता है।


*यदि आपके बच्चे को इनमें से कोई भी तकलीफ है तो आप फौरन डॉक्टर को दिखाएँ*

नाक से हल्का हरा या पीला और गाढ़ा पानी आ रहा है

तेज खांसी के साथ पिला या हरा बलगम है

बहुत तेज बुखार है

टॉन्सिल्स की सूजन के कारण निगलने में परेशानी

सांस लेने में कठिनाई

तेज सांस चल रही हो

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तुलसी की पत्तियों से इस तरह करें फुंसी का इलाज


शरीर में फोड़े फुंसी निकलना बहुत ही आम बात है। फोड़े फुंसी निकलने के लिए जरूरी नहीं है कि आप बीमार हैं। कई बार यह पूरी तरह स्वस्थ इंसान के शरीर में भी निकल जाते हैं। फोड़े फुंसी निकलने का कारण कभी-कभी रक्त की अशुद्धि और कभी-कभी शरीर पर धूल मिट्टी का चिपक जाना होता है। लेकिन फिर भी यह किसी बीमारी की श्रेणी में नहीं आता है। बड़े जख्म की शुरुआत एक छोटी सी फुंसी से होता है। धीरे-धीरे यह बड़ा होता है और इसके साथ ही इस में दर्द और जलन भी शुरू हो जाती है। एक समय ऐसा आता है जब इसके अंदर बहुत सारा मवाद भर जाता है और यह एक बहुत बड़ा जख्म बन जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस तरह तुलसी के पत्तों के प्रयोग से आप इन फोड़े फुंसियों से छुटकारा पा सकते हैं।

यदि आप या आपके परिजन इन फोड़े फुंसियों से परेशान हैं तो हमारे द्वारा बताए गए उपाय को अपनाएं। मात्र दो ही दिनों में फोड़े फुंसियों का इलाज पूरी तरह से हो जाएगा। अब बात करते हैं फोड़े फुंसियों के लिए तुलसी के पत्ते का प्रयोग किस तरह से करना है। सबसे पहले आपको तुलसी के थोड़े पत्ते पानी में उबालना है। उबले हुए पानी को ठंडा कर उससे फोड़े और फुंसियों को अच्छी तरह धो दें। धोने के बाद तुलसी के थोड़े पत्ते लेकर उसे पीस लें और उस पिसे हुए चटनी को फोड़े और फुंसियों पर लगा लें। इस उपाय से मात्र दो ही दिनों में फोड़े और फुंसी का अंत हो जाएगा।

वैसे तो लोग Tulsi के पत्तों का प्रयोग औषधि के रूप में बहुत पहले से करते हैं। खांसी के लिए भी लोग इसे घी में पकाकर इसका सेवन करते हैं। औषधि के रूप में तुलसी के पत्तों की तारीफ जितनी की जाए उतनी कम है। फोड़े फुंसियों के लिए आप हमारे द्वारा बताए गए इस उपाय को जरूर अपनाएं। यदि आप किसी अन्य आयुर्वेदिक सलाह की जरूरत महसूस करते हैं तो हमें कमेंट बॉक्स में लिखें आपकी पूरी सहायता की जाएगी।

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