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भारत की आवाज

हमारा ब्लॉग आयुर्वेद से संबंधित है और हम हर प्रकार की बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक सलाह देते हैं| यदि आपको बीमारियों से संबंधित आयुर्वेदिक उपचार की आवश्यकता है तो आप हमारा ब्लॉक फॉलो कर सकते हैं|

योग करने का सही समय कब होता है?

1. सुबह का समय सबसे उपयुक्त होता है 2. खाना खाने के कुछ घंटे बाद ही योग अभ्यास करें 3. योग शुरू करने के पहले खुद को तनावमुक्त और मन को शांत कर लें 4. चुने हुए समय पर ही नियम से योग करें 5. शरीर में आए बदलाव को अनुभव करने के लिए नियमित रूप से योग करें 6. योग का अभ्यास ज़्यादा न करें

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गठिया रोग का रामबाण इलाज - Arthritis Treatment of Arthritis


गठिया
गठिया के उपचार के लिए आजमायें आयुर्वेदिक चिकित्‍सा।आयुर्वेद के अनुसार यह समस्‍या आम-वात से जानी जाती है।आयुर्वेद में इसका उपचार योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है।उपचार में एरंड के तेल के साथ दूध का सेवन है फायदेमंद है।

सामान्‍यतया गठिया रोग 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को होता है, लेकिन वर्तमान में इसकी चपेट में युवा ही नहीं बच्‍चे भी आ रहे हैं। गठिया का रोग यानी आर्थराइटिस से शरीर के जोड़ो में दर्द और सूजन आ जाती है। गठिया रोग अचानक नहीं होता बल्कि धीरे-धीरे फैलता है इसलिए गठिया का सही उपचार जरूरी है।

जरूरी नहीं है कि आप गठिया के उपचार के लिए एलोपैथ की शरण में ही जायें, इसके लिए आप आयुर्वेद का सहारा ले सकते हैं। आयर्वेद के जरिये गठिया के सभी प्रकारों जैसे - रूमेटायड आर्थराइटिस, ऑस्टियो आर्थराइटिस, गाउट, जुवेनाइल आर्थराइटिस और ऐंकलूजिंग स्पोंडीलोसिस आदि का उपचार आसानी से कर सकते हैं। इस लेख में विस्‍तार से जानिये आयुर्वेद के जरिये गठिया का कैसे कर सकते हैं उपचार।

                    *आयुर्वेद और गठिया*

आमतौर पर गठिया होने का प्रमुख कारण आनुवांशिक होता है, लेकिन कई बार किसी भयंकर बीमारी या संक्रमित रोग के कारण भी गठिया रोग हो जाता है। आर्थराइटिस को आयुर्वेद में आम-वात के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार गठिया होने के कारकों में खराब पाचन, खानपान की गलत आदतें और निष्क्रिय जीवनशैली के साथ ही वात दोष को माना गया है।

                          *दिनचर्या*

गठिया में सिर्फ आयुर्वेदिक औषधियां ही नहीं बल्कि अच्छी खुराक लेने की सलाह भी देनी चाहिए। दरअसल, आयुर्वेद के इलाज के दौरान, गठिया के मूल कारणों को खोजने और फिर उसका सही रूप में उपचार करने पर अधिक ध्यान दिया जाता है। यदि किसी व्यक्ति में गठिया रोग वात बिगड़ने और दोषपूर्ण पाचन की वजह से हुआ है तो आयुर्वेद में उसके इलाज स्वरूप रोगी की असंतुलित शारीरिक ऊर्जाओं को शांत करने और पाचन क्षमता बेहतर करने पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है।

                  *आयुर्वेदिक उपचार*

आयुर्वेद के अनुसार गठिया के उपचार में जितनी जरूरी इसकी चिकित्सा है, उससे कहीं अधिक जरूरी परहेज भी है। रोगी के लिए विशेष प्रकार के व्यायाम कराए जाते हैं और सप्ताह में एक से दो बार सोने के पहले 25 मिलीलीटर एरंड के तेल का दूध के साथ सेवन कराते हैं। इसके अलावा लक्षणों व रोग की गंभीरता के आधार पर उपचार किया जाता है। उपचार के दौरान रोगी को दर्द कम करने के लिए एंटी-रुमे‍टिक और एंटी-इंफ्लेमेट्री दवाएं दी जाती हैं साथ ही भरपूर आराम करने की सलाह दी जाती है।

                         *खानपान*
आयुर्वेद के अनुसार मरीजों के लिए खानपान पर विशेष ध्‍यान देना चाहिए। अधिक तेल व मिर्च वाले भोजन से परहेज रखें और डाइट में प्रोटीन की अधिकता वाली चीजें न लें। भोजन में बथुआ, मेथी, सरसों का साग, पालक, हरी सब्जियां, मूंग, मसूर, परवल, तोरई, लौकी, अंगूर, अनार, पपीता, आदि का सेवन करें। इसके अलावा नियमित रूप से लहसुन व अदरक आदि का सेवन भी इसके उपचार में फायदेमंद है।

अर्थराइटिस के इलाज के लिए इम्यून सिस्टम का मजबूत होना बेहद आवश्यक है, साथ ही पाचन तंत्र का भी बेहतर होना जरूरी है। इसलिए नियमित व्‍यायाम के साथ खानपान का विशेष ध्‍यान रखें।

धातुएं भी करती है सेहत बनाने में मदद- Metals also help in making health



कुछ चीज़ें एक साथ खाने से शरीर को पहुंचता हैं नुकसान। आहार का चुनाव हम अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रख कर करते हैं, ताकि खाना शरीर में जाने के बाद हमे ऊर्जा प्रदान करे, शरीर स्वस्थ रहे और शरीर का संतुलन बना रहे। जिस तरह खाने के अंदर पोषक तत्व रहते हैं, वैसे ही हम खाने के लिए जो पात्र उपयोग में लाते है, उसके भी हमे फायदे और नुक्सान को ध्यान में रखना चाहिए |
इसलिए सही भोजन के साथ सही धातु के बर्तन का चुनाव भी जरूरी होता है, ताकि खाने के गुणों में वृद्धि हो और हमारा शरीर रोगों से दूर रहे।

आप भोजन पकाने और परोसने के लिए कई तरह के पात्र का प्रयोग करते होंगे लेकिन आपको उन धातु के बर्तन में खाना खाने से क्या फायदा और क्या नुक्सान होता है ये पता होना चाहिए
तो आइये जानते है कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है |

1. सोना
सोना एक महँगी धातु है. सोना लाल, सफ़ेद, और पीले रंग में उपलब्ध होता है. लेकिन भारत में सबसे ज्यादा पीला सोना प्रयोग में लाया जाता है. सोने के बर्तन में पहले के राजा महाराजा भोजन करते थे. सोना एक गर्म धातु है. सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है. और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है – आँखों को तेज करता है|

2. चाँदी
सोने के बाद चाँदी की धातु मूल्य में दुसरे नंबर पर होती है. चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है. शरीर को शांत रखती है. इसके पात्र में भोजन बनाने और करने के कई फायदे होते हैं, जैसे दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष , कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है|

3.कांसा
चाँदी के बाद काँसे के बर्तन का मूल्य आता है. यह चाँदी से थोड़ी सस्ती होती है और इसके बर्तन का प्रयोग माध्यम वर्गीय परिवार में अधिक होता है. खास कर गाँव में मेहमान नवाजी के लिए इन्हीं से बने पात्र में भोजन परोसा जाता है. इसके बने पात्र में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है. लेकिन कांस्य खट्टी चीजे नहीं परोसना चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है |

4. तांबा
कांस के बर्तन के बाद तांबे के बने बर्तन का प्रयोग होता है. तांबा के बने बर्तन का हर घर में पूजा पाठ में भी प्रयोग लाया जाता है. इस पात्र का पानी रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध करता है, स्मरण-शक्ति अच्छी रखता है, लीवर संबंधी समस्या दूर करता है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है |

5. पीतल
अनेक घरों में पीतल के बर्तन का भी उपयोग होता है. यह सामान्य कीमत की धातु है. इसमें भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बिमारी नहीं होती |

6. लोहा
लगभग हर घर में लोहे के बर्तन का प्रयोग भी होता है. इसमें बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, इसमें लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है. लोहा कई रोग को खत्म करता है , पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है. इसके पात्र में दूध पीना अच्छा होता है |

7. स्टील
वर्तमान समय में स्टील के बर्तन का उपयोग कुछ ज्यादा होता है. यह बहुत सुरक्षित और किफायती होता है. स्टील के बर्तन नुक्शान्देह नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता |

8. एलुमिनियम
एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है. इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है. यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए. इससे हड्डियां कमजोर होती है , मानसिक बीमारियाँ होती है, लिवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है. उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है. इन बीमारियों का जड़ से इलाज नहीं हो पाता. इसलिए अंग्रेज जेल के कैदी को इसमें खाना परोसा करते थे |

इन सब बर्तनों में खाना पकाने और खाने से कुछ फायदे और कुछ नुकशान होते हैं, जिससे हमारे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है|

इसलिए इन सारी बातों को ध्यान में रखकर खाना पकाने और खाने के लिए सही बर्तनों को चुनिए |
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सोते समय नाभि में बस 2 बूंद तेल डालें और सेहत के 17 फायदे पाएं - While sleeping, just add 2 drops of oil to the navel and get 17 benefits of health



नाभि शरीर का केंद्र बिंदु होता है। ह र रात सोने से पहले अगर आप मात्र दो बूंद तेल भी नाभि में डालते हैं तो सेहत के कई आश्चर्यजनक फायदे मिल सकते हैं। यह त्वचा, प्रजनन, आंखों और मस्तिष्क के लिए अत्यंत उपयोगी है। आइए जानते हैं नाभि में तेल डालने से क्या और कौन से फायदे मिलते हैं...


-नाभि में रोजाना तेल लगाने से फटे हुए होंठ नर्म और गुलाबी हो जाते हैं।

-इससे आंखों की जलन, खुजली और सूखापन भी ठीक हो जाता है।

-नाभि में तेल लगाने से शरीर के किसी भी भाग में सूजन की समस्या खत्म हो जाती है।

-सरसों का तेल नाभि पर लगाने से घुटने के दर्द में राहत मिलती है।

-नाभि पर सरसो तेल लगाने से हमारे चेहरे की रंगत बढ़ जाती है, इसलिए आपको रोजाना नाभि पर सरसो तेल लगाना चाहिए।

-नाभि पर सरसो तेल लगाने से पिंपल्स और दाग-धब्बे ठीक होते है।

-नाभि पर सरसो तेल लगाने से हमारा पाचन तंत्र भी मजबूत होता है।

- बादाम का तेल लगाने से त्वचा की रंगत निखर जाती है।

- नाभि में तेल लगाने से पेट का दर्द कम होता है।

-इससे अपच, फ़ूड पॉइजनिंग, दस्त, मतली जैसी बीमारियों से भी राहत मिलती है।

-इस तरह की समस्याओं के लिए पिपरमिंट आइल और जिंजर आइल को किसी अन्य तेल के साथ पतला करके नाभि में लगाना चाहिए।

- अगर आप मुहांसों की समस्या से परेशान हैं तो आपको नीम के तेल को नाभि में लगाना चाहिए। इससे आपके कील-मुहांसे दूर होने लगेंगे।

-अगर आपके चेहरे पर कई तरह के दाग की समस्या है तो नीम का तेल नाभि में डालने से ये दाग दूर होंगे। नाभि में लेमन आयल लगाने से भी दाग धब्बे भी दूर होते हैं।

-नाभि प्रजनन तंत्र से जुड़ी हुई होती है। इसलिए नाभि में तेल लगाने से प्रजनन क्षमता विकसित होती है।

- कोकोनट या ऑलिव आइल को नाभि में लगाने से महिलाओं के हार्मोन संतुलित होते हैं और गर्भधारण की संभावना बढ़ती है।

- नाभि में तेल लगाने से पुरुषों के शरीर में शुक्राणुओं की वृद्धि और सुरक्षा होती है।

- माहवारी से संबंधित समस्याओं से आजकल हर दूसरी-तीसरी महिला ग्रस्त मिलती है। अगर पीरियड्स के दौरान ज्यादा दर्द हो तो रूई के फाहे में थोड़ी सी ब्रांडी लगाकर नाभि में लगाने से ये दर्द तुरंत दूर हो जाता है।

नाभि की नियमित रूप से सफाई बहुत जरूरी है इसके लिए कुसुम, जोजोबा, ग्रेप्स सीड, या इसी तरह के अन्य हल्के तेलों को रूई में लगाकर नाभि में लगायें और धीरे-धीरे मैल साफ़ करें।

नाभि में मौजूद मैल के कारण बैक्टीरिया और फंगस के पनपने की संभावना होती है। इसलिए कोई भी संक्रमण बढ़ सकता है। ऐसे में यह जरूरी है कि आप संक्रमण को दूर करने वाले असरदार तेलों का प्रयोग करके नाभि को नम बनाकर रखें। इन तेलों में मस्टर्ड आइल सबसे असरदार हैं.

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पूरे शरीरका डीटोक्सीफिकेशन करने वाली चमत्कारी आैषधी - Miraculous gentleman who performs whole body detoxification



हमारा शरीर सबसे अनमोल है आैर उसका खयाल रखनां हमारी जिम्मेदारी है लेकीन नां खानेवाली चिजे लोग खाकर शरीरको कचराका डीब्बा बनां रहे है आैर बहोत से रोगो की चपेटमे आ जाते है | आैर कइ भयंकर रोगो का तो कोइ इलाज ही नही है | इससे पहले हम आपको बता दे की एलोपैथी मे केवल 20% रोगो का ही इलाज है आैर 80% बिमारीयो मे पेइन किलर, विटामिन्स, स्टीरॉइड, प्रोटीन पाउडर या मल्टीविटामिन्स, वगेरह ही दियां जातां है जबकी उनके पास पूराने हो चूके रोगो का कोइ भी सटिक इलाज नही है |.
हमारे पांच हजार पूर्व लिखे गये आयुर्वेदमे सिर्फ रोगो का इलाज ही नही बल्की हमारे शरीरको रोगमुक्त रखने वाले आहार विहार आैषधियां बताइ गइ है जिनके सेवन करने से हमारे शरीरमे रोग ही नही होतां | आज हम बात करते है डीटोक्सीफिकेशन की |

क्यां होतां है डीटोक्सीफिकेशन आैर क्यां है इनके लाभ
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हमारा शरीर सात धातु से बनां है रस,रक्त,मांस,मेद,मज्जा, अस्थि आैर शुक्र यह सात धातु को मिलाकर हमारा शरीर बनतां है आैर यह चिजे हमारे शरीरमे स्वस्थ होनां बेहद जरुरी है | लेकीन आजकल विरुध्द आहार आैर खानपान के कारन हमारे सुक्ष्म सेल्स मतलब कोशिका मे जहर मिलतां जातां है आैर हमारी कोशिकाए खराब होती है | आैर यह खराब कोशिकासे हम रोगो की चपेटमे आते है आैर कोइ भी अंग या हमारा रक्त खराब होतां है जबकी डिटोक्सीफिकेशन से हम इन कचराको निकालकर हम रोगो को होने से ही रोक सकते है |

पूरे शरीरको डीटोक्सीफाइ करने वाला रामबाण नुस्खा
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 शहद 1 चम्मच
 नींबू का रस 1 चम्मच
 हल्दी 1 चम्मच
 अदरक का रस 1 चम्मच

उपर दी गइ चिजो को मिला दिजिए आैर मिक्स करके सुबह शाम २-२ चम्मच लिजिए इन चिजो के सेवन के बाद थोडासा ही पानी का सेवन करे वह भी गुनगुनां पानी ही सेवन करे आैर यह चिजो को केवल 15 दिन करने से हमारा पूरां शरीर रोग मुक्त होतां है आैर अगर आप कीसीभी रोग के शिकार है तो यह चिजो का सेवन केवल २ महिने तक करने से आप शर्दी-जुकाम से लेकर केन्सर तक के रोगो मे बहेतरीन रीजल्ट पा सकत है |

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सभी प्रकार के यौन रोग का रामबाण इलाज


आजकल करीबन 70% लोग यौनरोग से पिडीत है | जिसमे कइ प्रकार की अलग अलग बिमारी देखने को मिलती है | मरीज हजारो रुपये बर्बाद करके भी इन रोगो से मुक्त नही हो सकतां जबकी हमारी यह रामबाण आैषधि आपको कुछ ही महिनो मे  यौनरोग से मुक्ति दिला देगी |

कीस रोग मे कारगर है यह हमारी जडीबुट्टी
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यह आैषधि शरीरकी सातो धातुआे को पोषण देकर उनमे वृद्धी करती है |

यह आैषधि के ३ महिने सेवन से विर्य शहद जैसा गाढ़ा हो जातां है |

वीर्य के सभी प्रकार के दोष दूर होते है |

जीनको नंपुसक्ता आइ है उनको ३-४ महिनो मे समस्या समाप्त होती है |

सेक्स के दोरान जिनका विर्य जल्दी निकल जातां है उनका सेक्स टाइमिंग ज्यादा होगा |

जिन लोगो को नसो की कमजोरी के कारन सेक्स करने मे मुसीबत का सामना करना पडता है वह दूर होतां है |

जो लोग पुरे उत्तेजित नही हो पाते तो वह लोग इनके रेग्युलर सेवन से स्वस्थ हौ जायेगें |

जिन लोगो मे शुक्राणु की कमी है आैर संतान प्राप्ति नही हे रही तो इनके सेवन से विर्यमे वृद्धी होकर संतान की प्राप्ति होगी |

जिन लोगो को "स्वप्नदोष" की समस्या है वह समस्या इनके सेवन से दूर होती है |

जो लोग दिनभर थकान महसुस करते है अगर वह लोग इनका सेवन करते है तो पूरे दिन काम करने पर भी थकान महसुस नही होगी |

आइये जानते है कैसे बनती है सभी योन रोग दूर करने वाली औषधि
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*अश्वगंधा             50 ग्राम*
*विदारीकंद          30 ग्राम*
*सफेदमूसली        20 ग्राम*
*इलायची             30 ग्राम*
*कौचबीज            30 ग्राम*
*शतावर जड़        30 ग्राम*
*शु.शिलाजीत      20 ग्राम*
*बंगभस्म             10 ग्राम*
*पीप्पली              20 ग्राम*
*जाविंञी             10 ग्राम*
*प्रवालपिष्टी         10 ग्राम*
*कालीमिर्च          10 ग्राम*   
*गोखरु                30 ग्राम*
*सौंठ                   20 ग्राम*
*लोंग                   10 ग्राम*

उपर दी गइ सभी चिजे पंसारी से लाकर साफ करके कुटकर चूरन बनाकर मिक्स करदे | आैर सुबह शाम १-१ चम्मच खाने के १ धंटे बाद दूध के साथ सेवन करे | अगर पित्त की तासीर हे तो १ चम्मच मिश्री पाउडर मिलाए |

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हरड़ के स्वास्थ्य लाभ


हरड़ के नाम से तो हम सब बचपन से ही परिचित हैं। इसके पेड़ पूरे भारत में पाये जाते हैं। इसका रंग काला व पीला होता है तथा इसका स्वाद खट्टा,मीठा और कसैला होता है। आयुर्वेदिक मतानुसार हरड़ में पाँचों रस -मधुर ,तीखा ,कड़ुवा,कसैला और अम्ल पाये जाते हैं। वैज्ञानिक मतानुसार हरड़ की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसके फल में चेब्यूलिनिक एसिड ३०%,टैनिन एसिड ३०-४५%,गैलिक एसिड,ग्लाइकोसाइड्स,राल और रंजक पदार्थ पाये जाते हैं। ग्लाइकोसाइड्स कब्ज़ दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये तत्व शरीर के सभी अंगों से अनावश्यक पदार्थों को निकालकर प्राकृतिक दशा में नियमित करते हैं, यह अति उपयोगी है।

हरड़ के लाभ

१- हरड़ के टुकड़ों को चबाकर खाने से भूख बढ़ती है।
२- छोटी हरड़ को पानी में घिसकर छालों पर प्रतिदिन ३ बार लगाने से मुहं के छाले नष्ट हो जाते हैं, इसको आप रात को भोजन के बाद भी चूंस सकते हैं।
३- छोटी हरड़ को पानी में भिगो दें, रात को खाना खाने के बाद चबा चबा कर खाने से पेट साफ़ हो जाता है और गैस कम हो जाती है।
४- कच्चे हरड़ के फलों को पीसकर चटनी बना लें। एक -एक चम्मच की मात्रा में तीन बार इस चटनी के सेवन से पतले दस्त बंद हो जाते हैं।
५- हरड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दो किशमिश के साथ लेने से अम्लपित्त (एसिडिटी ) ठीक हो जाती है।
६- हरीतकी चूर्ण सुबह शाम काले नमक के साथ खाने से कफ ख़त्म हो जाता है।
७- हरड़ को पीसकर उसमे शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आनी बंद हो जाती है.

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डायालीसीस से मुक्ति पाए, किडनी को बचाने वाली आैषधी


यह दवाइ किडनी रोग जेसे किडनी फेल्योर, ब्लड युरीयां बढ़नां, क्रिएटीनीन बढ़नां, किडनी सिकुडनां वगेरह पर 100% प्रभावी वं हमारे द्वारा कइ मरीजो पर अनुभूत है । इसको सभी ग्रृप वं रिश्तेदारो के साथ अचूक शेयर करे ताकी कीसी की जीन्दगी बचाइ जा सके ।

गोखरु          100 GMS
पुनर्नवां         100  Gms
एरण्डमूल     100 Gms
वरुणछाल     100 Gms
गिलोइबैल     100 Gms
पाषाणभेद    100 Gms
नीमके पत्ते    50 Gms
इन्द्र जौ        100 Gms
जौ-क्षार        30 Gms

उपर दी गइ सभी चिजो को पीसकर कपड़छान चूरन करके मिक्स करले । आैर डिब्बे मे पेक करके रख लिजिए । खालिपेट 2 चम्मच चूरन + २ ग्लास पानी मे मिक्स करके धीमी आंच पर पकाए फीर जब आधा ग्लास पानी बचे तब छानकर पीए । यह प्रयोग दिनमे २ बार करनां है आैर यह प्रयोग एलोपैथी दवाइ वं डायालीलीस के साथ भी कियां जा सकतां है ।

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सरदर्द के लिए अचूक "प्राकृतिक चिकित्सा "मात्र पांच मिनट में सरदर्द "गायब"


नाक के दो हिस्से हैं दायाँ स्वर और बायां स्वर जिससे हम सांस लेते और छोड़ते हैं ,पर यह बिलकुल अलग - अलग असर डालते हैं और आप फर्क महसूस कर सकते हैं |

दाहिना नासिका छिद्र "सूर्य" और बायां नासिका छिद्र "चन्द्र" के लक्षण को दर्शाता है या प्रतिनिधित्व करता है |

सरदर्द के दौरान, दाहिने नासिका छिद्र को बंद करें और बाएं से सांस लें |

और बस ! पांच मिनट में आपका सरदर्द "गायब" है ना आसान ?? और यकीन मानिए यह उतना ही प्रभावकारी भी है..
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अगर आप थकान महसूस कर रहे हैं तो बस इसका उल्टा करें...
यानि बायीं नासिका छिद्र को बंद करें और दायें से सांस लें ,और बस ! थोड़ी ही देर में "तरोताजा" महसूस करें |
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दाहिना नासिका छिद्र "गर्म प्रकृति" रखता है और बायां "ठंडी प्रकृति"

अधिकांश महिलाएं बाएं और पुरुष दाहिने नासिका छिद्र से सांस लेते हैं और तदनरूप क्रमशः ठन्डे और गर्म प्रकृति के होते हैं सूर्य और चन्द्रमा की तरह |
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प्रातः काल में उठते समय अगर आप बायीं नासिका छिद्र से सांस लेने में बेहतर महसूस कर रहे हैं तो आपको थकान जैसा महसूस होगा ,तो बस बायीं नासिका छिद्र को बंद करें, दायीं से सांस लेने का प्रयास करें और तरोताजा हो जाएँ |
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अगर आप प्रायः सरदर्द से परेशान रहते हैं तो इसे आजमायें ,दाहिने को बंद कर बायीं नासिका छिद्र से सांस लें बस इसे नियमित रूप से एक महिना करें और स्वास्थ्य लाभ लें |
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तो बस इन्हें आजमाइए और बिना दवाओं के स्वस्थ महसूस करें

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सोने से पहले पैरों की मालिश करेंगे तो होंगें ये लाभ



1 :- खून का दौरा सुचारु करे :- सारा दिन टाईट जूते और अन्य तरह के फुटवियर पहनने से पैरों के तलवों तक खून का दौरा सुचारु रूप से नही हो पाता है । इस अवरुद्ध हुये खून के दौरे को सुचारू करने के लिये पैरों की मालिश सर्वोत्तम उपाय है । सोने से पहले 10 से 20 मिनट तक पैरों और तलवों की मालिश करने से पैरों के अंतिम हिस्से तक खून का दौरा सुचारू हो जाता है । यह मालिश उन लोगों के लिये विशेष रूप से लाभकारी है जिनको मधुमेह रोग के कारण तलवों में सुन्नपन की समस्या पैदा होने लगी है ।
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2 :- अच्छी नींद लाये :- सारे दिन की भाग-दौड़ के बाद शाम होते होते दिमाग बहुत ज्यादा थकने लगता है जिस कारण बहुत से लोग शांतिपूर्वक नही सो पाते है और उनकी नींद पूरी रात बार बार टूटती है । यदि ऐसे परेशान लोग रोज रात को सोने से पहले 10-15 मिनट तक अपने पैरों पर मालिश करें तो यह पैरों की बेचैनी को खत्म करके शांतिपूर्वक नींद आने में सहायता करता है ।

3 :- तनाव और अधीरता को भगाये :- हम लोग अधिकतर तनाव और अधीरता में रहते ही हैं । पैरों की मालिश तनाव और हड़बड़ी को घटाने में बहुत मदद कर सकती है । यह दिमाग को शांति पहुचाने के अलावा और भी बहुत से लाभ कर सकती है । मालिश करते समय तलवों पर अलग अलग हिस्सों पर अतिरिक्त दवाब देनें से नाड़ीतंत्र सही होता है और पूरे शरीर में आराम महसूस होता है जिससे तनाव में बहुत लाभ होता है ।
दवाब हाथों से देने के अतिरिक्त एक्यूप्रेशर वाले फुटपैड़ भी प्रयोग किये जा सकते हैं ।
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4 :- पैरों के दर्द से राहत :- अच्छी तरह से की गयी मालिश पैरों और पैरों की माँशपेशियों को बहुत अच्छी तरह से आराम पहुँचाती है साथ ही साथ पैरों पर आयी हुयी सूजन भी मालिश से उतर जाती है जिस कारण से पैरों के दर्द में बहुत आराम होता है । यदि मलिश करने से पहले पैरों को हल्के गुनगुने पानी से धो लिया जाये तो परिणाम और भी बेहतर होते हैं ।

5 :- रक्तचाप कम करता है :- चूंकि दिन भर जूते पहने रहने से पैर के अंतिम भाग तक खून का दौरा सही से नही पहुँच पाता है अत: दिल ज्यादा जोर से पम्पिंग करके इस समस्या को दूर करने की कोशिश करता है जिस कारण से बाकि पूरे शरीर में रक्त्चाप बढ़ने का खतरा रहता है । यदि रात को तलवों में मालिश की जाये तो पैरों का रक्तदवाब सही रहता है और इस समस्या से बचा जा सकता है ।
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पैरों की मालिश कैसे की जाये :- शरीर के बाकि हिस्सों की मालिश करने के लिये आपको दूसरों की मदद की जरूरत पड़ सकती है किंतु पैरों की मालिश आप अपने आप ही कर सकते हैं । पैरों की मालिश का सही तरीका पढ़िये प्रकाशित आयुर्वेद के सौजन्य से ।
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– एक बड़े बरतन में गुनगुना पानी भरिये और उसमें अपनी पसंद का कोई भी तेल 5-6 बूँद ड़ालिये ।
– 10 मिनट के लिये अपने पैरों को इसमें डुबाकर बैठ जाइये और फिर एक सूती तौलिये से पैरों को दबा-दबा कर पोंछ लीजिये ।
– अब एक कुर्सी पर आराम से बैठ जाइये ।
– अपने सीधे पैर के तलवे को उल्टे पैर के घुटने पर टिका लें ।
– अपनी पसंद का कोई भी तेल जैसे कि नारियल तेल, तिल तेल, सरसों तेल अथवा जैतून का तेल हल्का गर्म किया हुया लेकर अपने सीधे पैर की मालिश कीजिये । मालिश करते समय हाथ ऊपर से नीचे की तरफ ले जायें और पैरों पर हल्का हल्का सा दवाब जरूर दीजिये ।
– पैरों के बाद तलवों और पैर की अंगुलियों की भी मालिश कीजिये ।
– अब पैरों की स्थिति बदलकर उल्टे पैर भी इसी तरह मालिश कीजिये ।
– ध्यान रखें एक पैर की सम्पूर्ण मालिश के लिये 10-15 मिनट पर्याप्त हैं.

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खट्टी डकारें आने से छुटकारा दिलाने वाले सबसे कारगर प्राकृतिक नुस्ख़े...


डकार आना एक आम समस्या है। इससे निजात पाने के लिए आपको जलन पैदा करने वाली चीज़ों को खाना कम करना होगा। साथ ही, भोजन में उन चीज़ों को शामिल करना होगा जो इसकी रोकथाम करके आपको राहत पहुंचाती हैं..

डकारें आना यानी कि गैस्ट्रोफेजियल रिफ्लेक्स (Gastroesophageal reflux) एक आम समस्या है। इसमें छाती में उस स्थान पर जलन और दर्द होता है जहां भोजन-नली (ईसोफेगस) अमशाय यानी पेट से जुड़ती है।

यह स्थिति तब पैदा होती है जब ईसोफेगस तक के मार्ग को नियंत्रित करने वाले वाल्व- ईसोफेजियल स्फिंक्टर में गड़बड़ी पैदा हो जाती है और यह भोजन को ठीक से पेट में ही रखने में नाकाम रहता है।

इसके अलावा, खाना भोजन-नली की ओर वापस लौटता रहता है। जब यह भोजन-नली की दीवारों पर रगड़ खाता है तो हमें जलन होती है और हम परेशान हो जाते हैं।

इस स्थिति का कारण ठीक से भोजन नहीं करना हो सकता है, जैसेः

लंबे समय तक भोजन न करना
एसिड की अधिक मात्रा वाले खाद्य का सेवन करना
ज़रूरत से ज़्यादा जलन पैदा करने वाली चीज़ें खाना जैसे कि चॉकलेट, मसाले या ज़्यादा फैट वाले खाद्य।
डकार आने के लक्षण

एसिडिटी यानी गैस्ट्रिक रिफ्लक्स या ईसोफेजियल रिफ्लक्स में दिखने वाले लक्षण बहुत आम हैं। इनमें शामिल हैंः

सीने में जलन
उल्टी आना
अनिद्रा
भूख न लगना
पेट में एसिडिटी
अगर गैस्ट्रिक रिफ्लक्स का ठीक से उपचार न किया जाए को इसके कारण हियाटल हर्निया (hiatal hernia) हो सकता है। इसमें डायफ्राम का नियंत्रक वाल्व ठीक से काम नहीं कर पाता है। जैसा कि हमने पहले बताया है, यह वाल्व भोजन का प्रवाह नियंत्रित करता है और उसे पेट से बाहर नहीं आने देता है..

हमारे आसपास बहुत से लोग यह जानते हैं कि कई शारीरिक समस्याओं का उपचार करने में प्रकृति में पाई जाने वाली चीज़ों के औषधीय गुण ज़्यादा कारगर होते हैं। इनमें दवाइयों की तरह कृत्रिम रसायन नहीं होते हैं और इस कारण ये और उपयोगी होती हैं।

इसके बावजूद, आप यह बात ध्यान में रखें कि ये प्राकृतिक नुस्ख़े पहले से जारी मेडिकल ट्रीटमेंट के सप्लीमेंट हैं और इन्हें पूरी तरह उनके स्थान पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। नीचे हम आपको कुछ ऐसे प्राकृतिक नुस्ख़ों के बारे में बता रहे हैं जिनसे आप डकार आने का उपचार कर सकते हैं।

मुलैठी की चाय (Licorice Tea)

मुलैठी के औषधीय गुण सीने में जलन, पेट में सूजन (गैस्टिराइटिस) और अल्सर का उपचार करते हैं।

सामग्री
1 ग्लास पानी (200 मिली.)
3 चम्मच मुलैठी (45 ग्राम)
आपको क्या करना चाहिए?
पानी को उबलने तक गर्म करें।
मुलैठी के बेहद महीन टुकड़े कर लें और इसे उबलते हुए पानी में डालें।
5 मिनट तक पानी में भीगने के लिए छोड़ दें। इसके बाद आंच से हटा दें और 15 मिनट तक बैठने दें।
इस पेय को दिन में दो बार पीयें।
सेब
इस फल के औषधीय गुणों का पूरा फ़ायदा उठाने का एक तरीका इसका काढ़ा बनाकर पीना है।

सामग्री
1 सेब
1 कप पानी (250 मिलीलीटर)
आपको क्या करना चाहिए?
एक छोटे भगौने में पानी लें और इसे उबलने के लिए आंच पर रखें।
बिना छिलका उतारे सेब के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें और इन्हें उबलते हुए पानी में डालें।
बर्तन को ढक दें और धीमी आंच पर 10 मिनट तक काढ़ा बनने दें।
तैयार पेय को कप में डालकर पियें।
आप इसे रोज़ाना तीन बार पी सकते हैं।
बेकिंग सोडा

सामग्री
1 ग्लास पानी (200 मिलीलीटर)
1 चम्मच बेकिंग सोडा (9 ग्राम)
आपको क्या करना चाहिए?
एक ग्लास पानी में बेकिंग सोडा डालें और अच्छी तरह मिलाएं।
पेय को दिन में एक बार पियें।
इसे भी पढ़ें:
8 लक्षण जो लीवर में टॉक्सिन जमा होने पर आपको परेशान करते हैं

एलोवेरा
एलोवेरा में एंटी-इन्फ्लामेटरी गुण होते हैं जो डकार आने में कमी लाने में मददगार हैं।

सामग्री
4 चम्मच एलोवेरा जेल (60 ग्राम)
1 ग्लास पानी (200 मिलीलीटर)
आपको क्या करना चाहिए?
एलोवेरा की एक पत्ती से जेल निकालें और इसे ब्लेंडर में एक ग्लास पानी के साथ मिलाएं।
छानकर पीने के लिए दें।
इस पेय को डकार आने या सोने से पहले पीने को दें।
अदरक
आप काढ़ा बनाकर इसके एंटी-इन्फ्लामेटरी गुणों का फ़ायदा उठा सकते हैं।

सामग्री
1 चम्मच अदरक की गांठ (15 ग्राम)
1 ग्लास पानी (250 मिलीलीटर)
आपको क्या करना चाहिए?
एक बर्तन में पानी उबालें। जब यह गर्म हो जाए तो अदरक के महीन टुकड़े कर लें।
उबलते हुए पानी में अदरक के टुकड़े डालें और 10 मिनट तक पड़ा रहने दें।
निर्धारित समय के बाद आप इसे पी सकते हैं।
आप इस पेय को दिन में एक बार पी सकते हैं।

इन्हें भी आजमाएं

आप कई अन्य नुस्ख़े भी आजमा सकते हैं। दूध जैसे ग्लूटामीन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। ये छाती में जलन से राहत पहुंचाते हैं। ग्लूटामीन शरीर में पाया जाने वाला एक खनिज है जिसकी कमी से डकार आने की समस्या हो सकती है।

अधिक शारीरिक गतिविधियां करें। आपके एक्सरसाइज करने से शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है। भोजन अच्छी तरह पचता है। इससे एसिडिटी और शरीर के लिए बेकार टॉक्सिन कम करने में मदद मिलती है।

डकार आने से होने वाली परेशानी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्यवर्धक आहार से दिन की शुरुआत करें। फैटी फूड खाने से परहेज करें।
लगातार शराब पीने या तंबाकू खाने से ईसोफेजियल कैविटी (भोजन-नली गुहा) को नुकसान पहुंचता है। इनका सेवन करने से बचने के अच्छे नतीजे आपको जल्द नज़र आएंगे।
अगर आपके लक्षण लगातार बने रहते हैं या बदतर हो जाते हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं आपको कोई अन्य बीमारी तो नहीं है।

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ल्युकोरीयां (सफेद पानी) की समस्या को जड़ से समाप्त करने वाला इलाज


आजकल काफी महिलाए सफेद पानी की समस्या से परेशान है । काफी इलाज करने पर भी यह समस्या से परेशान होती रहती है । लेकीन हम आज आपको जो इलाज बताने जा रहे है वह इलाज अगर २ महिने तक रेग्युलर करते है तो गारंटीसे आपकी समस्या जड़ से समाप्त हो जायेगी ।

*अशोकछाल.        50 ग्राम*
*मुलहठी                50 ग्राम*
*इलायची               50 ग्राम*
*शतावरजड़           50 ग्राम*
*बंगभस्म.              10 ग्राम*
*शुद्ध शिलाजीत     10 ग्राम*
*धागेवाली मिश्री   100 ग्राम*

उपर दी गइ सभी चिजो को पंसारी से लाकर साफ करके कपड़छान चूरन तैयार करले वं शुद्ध शिलाजीत वं बंगभस्म बैधनाथ कंपनी का लेकर सबको मिलादे आैर कांच के डीब्बेमे भर दिजिए ।

*सेवन विधि :-*

*सुबह शाम 1-1 चम्मच चूरन को 200 Ml दूधमे मिलाकर सेवन करे । नियमित 2 या 3 महिने के सेवन से आपकी समस्या जड़ से समाप्त हो जायेगी ।*

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आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए हमारे पूर्वज अपनाते थे यह चीज


पुराने जमाने में आंखों की रोशनी को एक बहुत ही गंभीर समस्या माना जाता था क्योंकि उस जमाने में खानपान और लोगों का रहन सहन बहुत अच्छा था। आज के दौर में लोगों का रहन-सहन और खान-पान बिल्कुल बदल चुका है। इस आधुनिक जीवन शैली पर आधुनिक खान-पान की वजह से हमारे शरीर पर इसका काफी असर पड़ा। आज के इस आधुनिक युग में बचपन से ही आंखों की रोशनी दुधली पड़ने लगती है और हमें चश्मा लगाना पड़ता है। पुराने समय में यह समस्या सिर्फ 70 या 80 साल के बुजुर्गों को ही होती थी। आज के इस आधुनिक युग में 70-80 साल तो इंसान की अधिकतम आयु होती है। आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए हमारे पूर्वज जिस चीज का प्रयोग करते थे आज हम उसी के बारे में आपको विस्तार से बताएंगे।

हम जिस चीज की बात कर रहे हैं वह चीज है सफेद मिर्च। आप सभी ने काली मिर्च के बारे में सुना होगा लाल मिर्च के बारे में सुना होगा हरी मिर्च के बारे में सुना होगा पर आज हम आपको सफेद मिर्च के बारे में बताएंगे। सफेद मिर्च को आंखों की रोशनी के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें बहुत सारे विटामिन और कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं।

पुराने समय में इस मिर्च के लड्डू बनाए जाते थे। इस लड्डू को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता था। जिन लोगों को आंखों की समस्या होती थी उन लोगों को यह लड्डू खिलाया जाता था। यह लड्डू खाने के बाद आंखों की रोशनी धीरे-धीरे बढ़ने लगती थी। हमारे बुजुर्ग इसी तरीके से बिना डॉक्टर के अपना इलाज बहुत अच्छे तरीके से किया करते थे। यदि आप भी किसी समस्या का समाधान चाहते हैं तो हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करें आपकी पूरी सहायता की जाएगी।

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भीगे चने के बाद गलती से भी ना खाएं ये 2 चीजें, वरना पड़ सकते हैं बहुत अधिक बीमार


अक्सर लोग जिम, yoga और gym करने के बाद केले और भीगे हुए चने खाना बहुत पसंद करते हैं। excercise करने के बाद इन्हें खाने से शरीर में नई ऊर्जा का विकास होता है जिसकी वजह से body को ताकत मिलती है। कई बार भीगे हुए चने का सेवन खाना health के लिए हानिकारक भी सिद्ध हो जाता है क्योंकि इसके बाद हम कुछ ऐसा खा लेते हैं जो चने की energy को खत्म करता है और साथ ही आपको बीमार भी कर सकता है। आज हम आपको इसी विषय में बताने जा रहे हैं कि भीगे हुए चने का सेवन करने के बाद किन दो चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

1. भीगे हुए चने खाने के बाद कभी भी अचार का सेवन नहीं करना चाहिए। इन दोनों की शक्तियां एक दूसरे के विपरीत कार्य करते हैं। अधिकतर आचारों को सिरका डालकर बनाया जाता है। भीगे हुए चने को खाने के बाद अचार खाने से शरीर में सफेद दाग धब्बे की बीमारी हो सकती है। इसलिए यह बात हमेशा अपने दिमाग में बैठा लीजिए कि जब भी आपने भीगा हुआ चना खाया हो उसके 2 घंटे के भीतर अचार का सेवन भूलकर भी ना करें। चना खाने के बाद अचार खाने से सफेद दाग के अलावा और भी कई सारी skin problems आपको हो सकती हैं। हमेशा स्वस्थ रहना चाहते हैं तो इन दोनों का सेवन कभी भी एक साथ ना करें।
2. भीगे हुए चने को खाने के बाद दूसरी जो चीज है जो आपको नहीं खानी चाहिए वह है करेला। यह दोनों भी विपरीत शक्तियों के स्वामी होते हैं जिनका तालमेल आपस में कभी भी ठीक नहीं रहता है। इन दोनों का एक साथ सेवन करने से शरीर में ऑक्साइड की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है। जिसकी वजह से आप बहुत बड़ी बीमारियों से ग्रसित हो सकते हैं। चना और करेला दोनों ही स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है लेकिन इनका सेवन अलग अलग समय पर करना चाहिए। एक साथ इन दोनों का सेवन करने पर आपको फायदे की जगह बहुत अधिक नुकसान हो सकता है।

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रोज रात को खाइए ये चीज, सभी रोग होंगे दूर


आज हम आप सभी को लहसुन के लाभ बताने जा रहे है। हमने इससे पहले भी लहसुन के बहुत सारे लाभ आप सभी को बताए हैं। इससे पहले मैंने आप सभी को बताया था कि कच्चे लहसुन के सेवन से हमारे शरीर को क्या लाभ होता है। आज मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूं कि भुने हुए या पाके हुए लहसुन के सेवन से हमें क्या लाभ होगा। आइए अब विस्तार से चर्चा करते हैं लहसुन के चमत्कारी परिणामों के बारे में।

लहसुन में बहुत सारे आयुर्वेदिक गुण पाए जाते हैं जो हमारे शरीर को विषैले पदार्थों से दूर रखते हैं तथा हमें रोगमुक्त बनाते हैं। अक्सर हम लोग बाजार जाते हैं और बाजार की चीजों का सेवन कर लेते हैं। हमें नहीं पता होता है कि उन चीजों पर धूल लगी होती है या जो पानी हम पी रहे हैं वह साफ है या गंदा है फिर भी हम उसे पी लेते हैं। ऐसा करने से हमारे शरीर में विषैले पदार्थ बन जाते हैं। कई बार ऐसे विषैले खानपान की वजह से लोगों को पथरी हो जाती है।

खानपान की वजह से जो विषैले तत्व हमारे शरीर में प्रविष्ट कर लेते हैं उन को बाहर निकालने के लिए भुना हुआ लहसुन बहुत ही लाभदायक होता है। हर रोज भुने हुए लहसुन का तीन से चार कली खाएं। इस प्रकार से लहसुन खाने से सभी विषैले पदार्थ मल-मूत्र के द्वारा शरीर से बाहर निकल जाते हैं और शरीर विषैले दुष्प्रभाव से बच जाता है।

भुना हुआ लहसुन खाने से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। इसके नियमित सेवन से शरीर में कभी भी ट्यूमर नहीं होता है। भुना हुआ लहसुन कैंसर की समस्या को भी कई गुना कम कर देता है। आप खुद ही सोच लीजिए जब लहसुन के कुछ कलियां आपको इतना फायदा पहुंचाती हैं तो इसका सेवन क्यों ना आज से ही शुरु कर दिया जाए। यदि आप किसी अन्य समस्या का आयुर्वेदिक समाधान चाहते हैं तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें आपकी पूरी सहायता की जाएगी।

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इस Plant की की पत्तियों के सेवन से दूर हो जाते हैं ये 6 रोग


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प्रकृति ने हमें कई गुणकारी आयुर्वेदिक plant दिए है जिससे हमारी बहुत सारी बिमारिया जड़ से खत्म हो जाती है। जानकारी के अभाव में हम उन पौधों का प्रयोग नही कर पाते है। आज हम आप को एक ऐसे ही पौधे के बारे मे बताने जा रहा हूं जो कई बिमारियों से लड़ने में बहुत ही कारगर औषधी है। आप सभी में से कुछ लोग इसका प्रयोग हर रोज अपने खाने में स्वाद के करते है। दोस्तों मैं जिस पौधे के बारे मैं बात कर रहा हूं वो पौधै करी पत्ते का। तो आइये अब उस पौधे के बारे में विस्तार से बात करते है।
करी पत्ते के सेवन से होने वाले फायदे
1. एनीमिया के रोगियों के लिए करी पत्ता बहुत ही लाभदायक होता है। करी पत्ते में फोलिक एसिड और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जो लोग प्रतिदिन करी पत्ते का सेवन करते हैं उन्हें एनीमिया जैसी खतरनाक बीमारी होने का डर बहुत कम रहता है। जो लोग एनीमिया के शिकार हो चुके हैं उनके लिए भी करी पत्ते का सेवन बहुत ही लाभदायक होता है।
2. Blood Sugar के रोगियों के लिए भी करी पत्ता बहुत उपयोगी पौधा है। इसमें कई ऐसे गुणकारी तत्व पाए जाते हैं जो ब्लड में शुगर की मात्रा को कम करने में बहुत लाभदायक सिद्ध होते हैं। इसके नियमित सेवन से ब्लड शुगर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
3. पेट और liver के लिए भी कड़ी पत्ता बहुत ही लाभदायक होता है। जिन लोगों को लीवर की समस्या है वह नियमित रूप से प्रतिदिन खाने में करी पत्ता का सेवन करें। यह लीवर की समस्या को दूर करता है तथा गैस और एसिडिटी का विनाश करता है।4. आजकल कोलेस्ट्रोल की समस्या बहुत ही आम हो गई है। करी पत्ते में ऐसा गुणकारी तत्व पाया जाता है जो कोलेस्ट्रोल से लड़ने और उसे कम करने में बहुत लाभदायक होता है। हृदय रोगियों को प्रतिदिन करी पत्ते का सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से हृदय संबंधी सभी रोग ठीक हो जाते हैं।
5. Green Leaves में कई ऐसे आयुर्वेदिक तत्व पाए जाते हैं जो एक बहुत ही भयंकर बीमारी से लड़ने में भी लाभदायक सिद्ध होता है। मैं जिस भयंकर बीमारी की बात कर रहा हूं वह है कैंसर। कैंसर रोग में भी कड़ी पत्ता बहुत लाभदायक होता है।
6. Kari पत्ते के नियमित सेवन से बालों की समस्या भी हमेशा के लिए दूर हो जाती है। जिन लोगों को बाल झड़ने की शिकायत है वह लोग हर रोज करी पत्ते का सेवन करें। यह बालों को टूटने से रोकता है तथा बालों को मजबूत बनाता है।
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महिलाओं के लिए Wine पीना हो सकता है हानिकारक


शराब किसी के लिए भी फायदेमन्द नही होता है। इसका सभी के शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आजकल पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा शराब पीने लगी है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का शरीर थोड़ा नाजुक होता है इसी कारण शराब का नकारात्मक प्रभाव उन पर तेजी से बढ़ता है। आज अस्पताल शराब की वजह से जाने वालों में महिलाओं की संख्या बहुत ज्यादा है। शराब पीने के बाद 100 मे से 70 महिला को डॉक्टर की आवश्यकता पड़ती है। ये ग्राफ लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

Womens को Mens की तुलना में बहुत तेजी से नशा होता है। कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि महिलाओं एल्कोहल डिहाड्रोगेनेज एंजाइम बहुत कम मात्रा में निकलती है। यह एंजाइम लीवर से निकलती है जो शरीर में एल्कोहल को तोड़ने का काम करती है। यही कारण है की कुछ ही पैग के बाद महिलाए नियंत्रण से बाहर चली जाती है और कभी कभी डॉक्टर की भी जरूरत पड़ जाती है।

वैज्ञानिकों का मानना है की शराब की वजह से महिलाओं के बिमार पड़ने का कारण शरीर में फैट और पानी की कमी है। शरीर में मौजूद फैट एल्कोहल को बचाता है और पानी उसके असर को कम कर देता है। महिलाओं में फैट और पानी दोनों की कमी होने के कारण उन पर शराब का नकारात्मक प्रभाव बहुत तेजी से होता है।

पुरुषों की तुलना में महिलाओं को शराब की लत जल्दी लग जाती है। वैसे तो पुरुष कम उम्र से ही शराब पीना शुरू कर देते है, जबकि महिलाए काफी देर से शराब पीना शुरू करती है। फिर भी महिलाओं की इसकी लत बहुत जल्दी लग जाती है। आज पूरे विश्व में शराबी महिलाओं की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। शराब की ही वजह से महिलाओं मे लीवर डायमेज की की समस्या बढ़ जाती है ।

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सेब खाने के बाद भूलकर भी ना खाएं ये 3 चीजें, वरना हो जाएंगी यह खतरनाक बीमारियां


डॉक्टरों का ऐसा मानना है कि जो व्यक्ति हर रोज एक सेब का सेवन करता है वह जीवन में कभी बीमार नहीं पड़ता है। लेकिन कई बार ऐसा देखा गया है कि जो चीज हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है वह हमें हानि भी पहुंचा देती है। सेब खाने के बाद इन तीन चीजों का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खतरनाक सिद्ध हो सकता है। आइए जानते हैं कि वह कौन सी तीन चीजें हैं जिन्हें सेब खाने के बाद नहीं खाना चाहिए।

यह वह तीन चीजें जिन्हें सिर्फ खाने के बाद नहीं खाना चाहिए।

1. अक्सर आप लोगों ने महसूस किया कि कोई भी फल खाने के बाद तुरंत बहुत तेज प्यास लग जाती है। ऐसा होने पर आप लोग तुरंत पानी पीना शुरु कर देते हैं। सेब खाने पर भी ठीक इसी प्रकार प्यास लग जाती है और वह प्यास इतनी तेज होती है कि बिना पानी पिए नहीं रहा जाता। लेकिन सेब खाने के बाद कभी भी आधे घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए। जो लोग सेब खाने के तुरंत बाद पानी पीते हैं उन्हें छाती में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है।

2. मूली और सेब की आपस में बहुत ही गहरी शत्रुता होती है। हमेशा यह बात ध्यान में रखना चाहिए कि जब आपने मूली खाया हो तब आपको सेब का सेवन नहीं करना चाहिए या जब आपने सेब खाया हो तब आपको मूली का सेवन नहीं करना चाहिए। दोनों का सेवन एक साथ करने पर चेहरे पर या पूरे शरीर में सफेद दाग की समस्या उत्पन्न हो जाती है। सफेद दाग एक बहुत ही खतरनाक चर्मरोग है।

3. दूध और सेब को भी एक साथ कभी ग्रहण नहीं करना चाहिए। यदि आपको रात में सेव खाने की आदत है तो हमेशा यह बात ध्यान में रखें कि सेब खाने के बाद आधे घंटे तक दूध ना पिए। सेब खाने के तुरंत बाद दूध पीने से पेट में टॉक्सिन बन जाता है जिसके कारण हमारा पेट खराब हो जाता है या हमें उल्टी होने लगती है कभी कभी नाक से खून भी निकलने लगता है।

सेब खाने के बाद इन चीजों का सेवन कभी ना करें वरना आपका स्वास्थ्य बहुत ज्यादा बिगड़ सकता है। हमेशा यह बात ध्यान में रखें किसी अब आपको तभी स्वस्थ रख सकता है जब आप उसका सेवन स्वस्थ तरीके से करेंगे। यदि आप किसी अन्य समस्या का समाधान जाते हैं तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें आपकी पूरी सहायता की जाएगी।

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जो लड़के हैंडसम और स्मार्ट दिखना चाहते हैं, वो खाली पेट इन चीजों का सेवन करें


इस संसार में ना तो सभी व्यक्ति गोरे हैं और ना ही सभी सुंदर दिखते हैं लेकिन सबकी इच्छा होती है कि वह गोरे आकर्षक और सुंदर दिखें। सुंदरता पाने के लिए लोग बाजार की केमिकल वाली चीजों का प्रयोग करते हैं जिससे सुंदरता बढ़ने के बजाय और घटती चली जाती है क्योंकि इन केमिकल वाले सामानों का कई बार साइड इफेक्ट भी हो जाता है। आज हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं जो सुंदरता बढ़ाने में बहुत कारगर है और इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है।

डॉक्टरों का यह मानना है कि जिन लोगों का खून साफ नहीं होता है उनकी सुंदरता लगातार खराब होती जाती है। खून साफ करने के लिए आप हर रोज सुबह खाली पेट चुकंदर का सेवन करें। चुकंदर शरीर में खून को बढ़ाता भी है वह उसको साफ करने का भी काम करता है।

गर्मियों में नहाते समय पानी नींबू का रस मिलाकर नहाए। नींबू का रस गर्मियों में होने वाले सनबर्न से बचाता है। जब भी आप बाहर से आते है ठंडे पानी से मुंह धोए। सप्ताह में एक बार शहद में नींबू का रस मिलाकर अपने चेहरे पर स्क्रब करें।

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अदरक के सेवन से ठीक हो जाएगा जुखाम


इस संसार में कुछ परेशानी ऐसी भी होती है जो दवाइयों से कभी खत्म नही होती है। फिर भी हम ये सोचकर दवाइयां खाते रहते है कि एक दिन हमारी ये समस्या खत्म हो जायेगी। कुछ चीजें दवाइयों से कभी खत्म नही होती है। उन्हीं में से एक समस्या है नजला जिसको कभी ना खत्म होने वाला जुकाम भी कहा जाता है।

इस समस्या का समाधान आप के घर में मिलने वाले अदरक से किया जा सकता है वो भी हमेशा के लिए। आप को करना ये है कि अदरक के छोटे - छोटे टुकड़े कर ले और उसे देशी घी भूरा होने तक भूने। अगर गाय का घी हो ज्यादा ठीक रहेगा। गाय का ना हो तो अन्य का भी प्रयोग कर सकते है।

भूरे होने तक भूनने के बाद उसे चूल्हे से उतारकर अदरक से घी को अलग कर दे। अब अदरक में थोड़ा सा गुड़ अपने हाथों से मसलकर मिला ले। जितना गर्म आप खा सकते है इसे खा ले। जो नजला वर्षों से ठीक ना हो रही हो वो इसके प्रयोग से कुछ ही दिनों में ठीक हो जाएगा।

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हाथों को मुलायम बनाने के लिए घर में ऐसे करें मैनीक्योर


1. गर्म पानी में लेवेंडर ऑयल की कुछ बूंदे अच्छी तरह मिला ले। उसके बाद अपने दोनों हाथों को उस गुनगुने पानी में 15 मिनट तक डाल कर रखे। इससे आप के हाथ मुलायम हो जाएगे।

2. रात को सोने से पहले अपने हाथों को गर्म पानी से धोकर अपने हाथों पर वैसिलिन लगा ले।

3. शक्कर और जैतून के तेल को एक साथ अच्छी तरह मिला ले और अपने हाथों को इससे स्क्रब करे। इससे हथों के सभी डेड सेल्स मर जाएगे।

4. ड्राई स्किन पर मलाई लगाकर उसे एक घन्टे तक रखे। एक घनटे के बाद उसे हल्के गर्म पानी से धो ले।

5. बेसन में दही डालकर उसे अच्छे से मिला लें। बेसन और दही अच्छी तरह मिक्स हो जाने के बाद उसे अपने दोनों हाथों पर लगा लें और 15 मिनट तक इसे ऐसे ही छोड़ दें। 15 मिनट के बाद अपने दोनों हाथों को गुनगुने पानी से धो लें।

6. बटर और बादाम तेल को मिलाकर उसे अपने दोनों हाथों पर लगा लें। बादाम के तेल में विटामिन ई होने की वजह से यह आपकी हाथों की झुर्रियों को खत्म करेगा। दोनों का लेप लगाकर आधे घंटे तक अपने हाथों को ऐसे ही छोड़ दें और उसके बाद इसे हल्के गर्म पानी से धो लें।

7. अंडे का पीला भाग बादाम का तेल और शहद तीनों को आपस में अच्छी तरह मिला लें। तीनों का मिश्रण तैयार हो जाने के बाद इसे अपने हाथों पर अच्छी तरह रगड़ें। इस हाथों का रूखापन दूर हो जाता है।

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