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भारत की आवाज

हमारा ब्लॉग आयुर्वेद से संबंधित है और हम हर प्रकार की बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक सलाह देते हैं| यदि आपको बीमारियों से संबंधित आयुर्वेदिक उपचार की आवश्यकता है तो आप हमारा ब्लॉक फॉलो कर सकते हैं|

योग करने का सही समय कब होता है?

1. सुबह का समय सबसे उपयुक्त होता है 2. खाना खाने के कुछ घंटे बाद ही योग अभ्यास करें 3. योग शुरू करने के पहले खुद को तनावमुक्त और मन को शांत कर लें 4. चुने हुए समय पर ही नियम से योग करें 5. शरीर में आए बदलाव को अनुभव करने के लिए नियमित रूप से योग करें 6. योग का अभ्यास ज़्यादा न करें

मेथी एक गुणकारी औषधि


हमारे देश में सभी स्थानों पर मेथी का साग रुचि पूर्वक खाया जाता है।। मेथी के अंकुरित बीजों की स्वास्थ्यवर्धक सब्जी बनाकर भी सेवन करते हैं।। मेथी एक एंटी आक्सीडेंट,, प्राकृतिक एंटीबायोटिक एवं रक्तशोधक औषधि है।। मेथी ८० प्रकार के वातरोगों को नष्ट करने वाली प्रभावी औषधि है।। मधुमेह में भी इसकी बड़ी उपयोगिता है।। आम इत्यादि के अचार जो खट्टे होने से अम्लीयता के दोष से भरे होने के कारण वात का दर्द बढ़ाने वाले होते हैं,, उस दोष को कम करने के लिए अचार में मेथी का प्रयोग परंपरागत ढंग से करते आ रहे हैं।। मेथी में प्रोटीन,, विटामिन तथा आयरन,, पोटैशियम,, फास्फोरस,, कैल्शियम आदि खनिज लवणों का भंडार है।। दूध पिलाने वाली माताओं के लिए दुग्ध वर्धक,, स्तन््यग्रंथि विकासक है ।। हृदय रोग एवं रक्तचाप को नियंत्रित करने का गुण है।। बड़ी आंत के कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक है।। सौंदर्यवर्धक है।। हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को नष्ट करती है।। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है।। वायु नाशक,, पौष्टिक तथा मंद जठराग्नि को तीव्र करती है । मोटापा नियंत्रित करती है।। पाचन संबंधी दोष जैसे-- गैस,, अफरा,, अजीर्ण को दूर करने वाला है।। मेथी में मृदुविरेचक गुण है।। इसके बीजों को पानी में भिगोकर उसके पानी को चेचक के रोगी को शांतिदायक पेय के रूप में पिलाया जाता है।। यह कृमि नाशक तथा कफरोग निवारक है।।

                  🍃उपयोग🍃

गठिया संधिवात में👉  (१) ५ ग्राम मेथी दाना पानी के साथ सुबह शाम निगल लें।।

(२) मेथी के पत्तों को पीसकर आटा में मिलाकर बिना तेल के पराठे बनाकर खाएं।।

(३) मेथी के लड्डू बनाकर शीतकाल में नवंबर से फरवरी माह तक नियमित सेवन करें।।

(४) मेथी के पत्तों का साग या मेथी दाना अंकुरित कर उसकी सब्जी बनाकर खाना चाहिए।।

(५) ३० ग्राम अंकुरित मेथी नित्य प्रातः सेवन करें।।

शीत स्थल से बचें।। सुबह शाम १-१ घंटा अपनी स्थिति के अनुसार यथाशक्ति टहलना चाहिए।। नित्य तेल मालिस करना,, यथाशक्ति आसन प्राणायाम करें।। अनाज की अपेक्षा फलों का रस,, फल एवं हरी सब्जियाें का अधिक सेवन करें।। इससे रक्तशोधन होगा।। जोड़ों की चिकनाई बढ़ेगी।। अस्थि क्षरण रुकेगा।। नए ऊतकों का निर्माण होगा।। गठिया संधिवात जटिल रोग हैं,, इनके लिए लंबे समय तक पथ्य परहेज करना चाहिए।। खटाई से बचें।। गरम पानी से स्नान करें।।
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माता को दूध की कमी में👉  स्तनपान कराने वाली माताओं को मेथी का लड्डू खिलाने के बाद गोदुग्ध पिलाने से तथा शतावरी चूर्ण एवं सफेद जीरा ३-३ ग्राम सेवन करने से मां का दूध बढ़ने लगता है।। मेथी में डावोस्जेनिन नामक तत्व होता है जो दूध का उत्पादन बढ़ाने वाला होता है।।
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हाथ पेेैरों के दर्द में👉  मेथी को घी में भूनकर पीस कर गुड़ की चासनी में थोड़ा घी मिलाकर घोंट कर छोटे छोटे लड्डू बनाकर सुबह-शाम १५-२० दिनों तक १-१ लड्डू सेवन करें।।
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️जीर्ण अतिसार में👉 (१) ५ ग्राम मेथी दाना चूर्ण तथा १ ग्राम सोंठ,, १० ग्राम गुड़ तथा २०० ग्राम मथी हुई दही मिलाकर पीने से लाभ होता है।।

(२) १० ग्राम मेथी दाना पीसकर १५० ग्राम दही में मिलाकर दिन में २-३ बार सेवन करने से पेचिश में लाभ होता है।।
पथ्य के रूप में उबालकर ठंडा पानी,, नींबू पानी,, अच्छी तरह पका हुआ केला,, दही,, ईसबगोल की भूसी,, विल्ब चूर्ण तथा पुराने चावल का भात दें।।
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प्रदर रोग में👉  ५ ग्राम मेथी दाना चूर्ण थोड़े गुड़ एवं घी मिलाकर सुबह-शाम कुछ दिन चबा चबाकर खाने से लाभ होता है।।
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कब्ज में👉  (१) एक चम्मच मेथी दाना प्रति दिन सुबह शाम पानी के साथ निगल लें।।

(२) ३ ग्राम मेथी दाना चूर्ण गुड़ या पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है।। मेथी के पत्तों का साग बना कर खाने से लाभ होता है।।
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बहुमूत्र में👉  मेथी के पत्तों का ताजा रस एक कप,, २ ग्राम कत्था,, ४ ग्राम देशी खाँड मिलाकर नित्य पीने से लाभ होता है।।
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लू लगने पर👉  गरमी के दिनों में पर्याप्त पानी न पीने से लू जानलेवा हो जाती है।। मेथी के सूखे ५ ग्राम पत्तों को एक गिलास पानी में भिगोकर २ घंटे बाद मसलकर छान लें,, थोड़ा शहद मिलाकर शरबत बना कर पीने से लू का असर मिटता है।। सहायक उपचार में कच्चे आम का पन्ना बनाकर पीना चाहिए।।
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मधुमेह में👉  (१) २० ग्राम मेथी दाना रात को एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें।। प्रात: मसलकर व छानकर पी लें।। यह क्रम नित्य बनाए रखें।।

(२) मेथी दाना अंकुरित कर ३० ग्राम नित्य सेवन करें।।

(३) मेथी का साग,, मेथी दाना की सब्जी सप्ताह में ३-४ दिन सेवन करें।।

सावधानी👉  मधुमेह के रोगी चावल,, आलू,, शकरकंद,, मैदा,, चीनी,, गुड़,, केला से परहेज करें।।
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जोड़ों की सूजन में👉 मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर थोड़ा गुण करके पुल्टिस बनाकर बांधने से सूजन मिटती है।।
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खूनी बवासीर में👉  (१) मेथी के बीज पीसकर १५ ग्राम चूर्ण २५० ग्राम पानी में उबालकर जब आधा शेष बचे तब उतारकर ठंढ़ा करके पिलाने से खून गिरना बंद हो जाता है।।
(२) १५ ग्राम मेथी दाना चूर्ण को २५० ग्राम दूध में उबाल कर पीने से लाभ होता है।।
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बुखार,, सरदी,, जुकाम,, खांसी में👉  (१)  मेथी का साग बना कर खाने से लाभ होता है।।
(२) १० मेथी दाना चूर्ण एक चम्मच शहद तथा दो ग्राम नींबू रस के साथ चाटने से लाभ होता है।।
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हृदय रोग में👉  मेथी दाना नियमित सेवन करने से हानि कारक कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है।। मेथी में मौजूद पोटैशियम तत्व रक्तचाप तथा हृदय गति को नियंत्रित,, संतुलित रखने का काम करता है।।
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कील मुंहासों के दाग धब्बों में👉  मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर थोड़ी पिसी हल्दी मिलाकर चेहरे पर लेप करने से दाग धब्बे मिटते हैं।। त्वचा में निखार आता है।
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बालों के रोग में👉 बालों का झड़ना,, सफेद होना,, बालों का न बढ़ना,, रूसी होना आदि बालों की स्वास्थ्य समस्याओं में मेथी के पत्तों को नारियल के दूध में मिलाकर पेस्ट बना कर बालों की त्वचा में लगाने से लाभ होता है।।
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मासिक धर्म की अनियमितता में👉  मेथी दाने का नियमित सेवन करने से अनियमितता दूर होती है।। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में अनेक समस्याएं जैसे -- गुमी लगना,, डिप्रेशन,, चिड़चिड़ापन,, तनाव,, चिंता,, अनिद्रा आदि होती हैं,, इन्हें कम करने के में मेथी दाना लाभदायक होता है।।
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प्रसव के बाद👉 गर्भाशय की शुद्धि एवं संकुचन को बढ़ाने के लिए मेथी के लड्डू का सेवन करना चाहिए।।

प्रसव के बाद ज्वर आदि में👉 प्रसव के बाद प्रसूति का ज्वर आदि रोग होने पर एक किलो मेथी को महीन पीस कर उतना ही घी मिलाकर ३ किलो दूध में धीमी आँच पर पकाएं,, जब गाढ़ा हो जाए तब ३ किलो देशी खाँड की चासनी बनाकर उसमें मिलाकर २० ग्राम प्रति दिन खाने से प्रसूति रोगों से बचाव होता है।। बल वृद्धि होती है।
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मेथी की स्वास्थ्यवर्धक रोटियां👉 (१) मेथी के ताजे पत्तों का रस आटे में मिलाकर रोटी बनाकर खाएं।।

(२) मेथी के ताजे पत्तों को पीसकर,, पेस्ट बना कर आटे में मिलाकर पौष्टिक एवं स्वादिष्ट रोटी का सेवन करें।। स्वाद के लिए उचित मात्रा में अजवाइन,, जीरा,, धनिया,, सेंधा नमक,, काली मिर्च आटे में मिला लेना चाहिए।। मेथी की रोटी में रक्तशोधक,, वात विकार नाशक तथा कब्ज निवारक गुण होते हैं।।

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सभी प्रकार के यौन रोग का रामबाण इलाज


आजकल करीबन 70% लोग यौनरोग से पिडीत है | जिसमे कइ प्रकार की अलग अलग बिमारी देखने को मिलती है | मरीज हजारो रुपये बर्बाद करके भी इन रोगो से मुक्त नही हो सकतां जबकी हमारी यह रामबाण आैषधि आपको कुछ ही महिनो मे  यौनरोग से मुक्ति दिला देगी |

कीस रोग मे कारगर है यह हमारी जडीबुट्टी
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यह आैषधि शरीरकी सातो धातुआे को पोषण देकर उनमे वृद्धी करती है |

यह आैषधि के ३ महिने सेवन से विर्य शहद जैसा गाढ़ा हो जातां है |

वीर्य के सभी प्रकार के दोष दूर होते है |

जीनको नंपुसक्ता आइ है उनको ३-४ महिनो मे समस्या समाप्त होती है |

सेक्स के दोरान जिनका विर्य जल्दी निकल जातां है उनका सेक्स टाइमिंग ज्यादा होगा |

जिन लोगो को नसो की कमजोरी के कारन सेक्स करने मे मुसीबत का सामना करना पडता है वह दूर होतां है |

जो लोग पुरे उत्तेजित नही हो पाते तो वह लोग इनके रेग्युलर सेवन से स्वस्थ हौ जायेगें |

जिन लोगो मे शुक्राणु की कमी है आैर संतान प्राप्ति नही हे रही तो इनके सेवन से विर्यमे वृद्धी होकर संतान की प्राप्ति होगी |

जिन लोगो को "स्वप्नदोष" की समस्या है वह समस्या इनके सेवन से दूर होती है |

जो लोग दिनभर थकान महसुस करते है अगर वह लोग इनका सेवन करते है तो पूरे दिन काम करने पर भी थकान महसुस नही होगी |

आइये जानते है कैसे बनती है सभी योन रोग दूर करने वाली औषधि
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*अश्वगंधा             50 ग्राम*
*विदारीकंद          30 ग्राम*
*सफेदमूसली        20 ग्राम*
*इलायची             30 ग्राम*
*कौचबीज            30 ग्राम*
*शतावर जड़        30 ग्राम*
*शु.शिलाजीत      20 ग्राम*
*बंगभस्म             10 ग्राम*
*पीप्पली              20 ग्राम*
*जाविंञी             10 ग्राम*
*प्रवालपिष्टी         10 ग्राम*
*कालीमिर्च          10 ग्राम*   
*गोखरु                30 ग्राम*
*सौंठ                   20 ग्राम*
*लोंग                   10 ग्राम*

उपर दी गइ सभी चिजे पंसारी से लाकर साफ करके कुटकर चूरन बनाकर मिक्स करदे | आैर सुबह शाम १-१ चम्मच खाने के १ धंटे बाद दूध के साथ सेवन करे | अगर पित्त की तासीर हे तो १ चम्मच मिश्री पाउडर मिलाए |

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हरड़ के स्वास्थ्य लाभ


हरड़ के नाम से तो हम सब बचपन से ही परिचित हैं। इसके पेड़ पूरे भारत में पाये जाते हैं। इसका रंग काला व पीला होता है तथा इसका स्वाद खट्टा,मीठा और कसैला होता है। आयुर्वेदिक मतानुसार हरड़ में पाँचों रस -मधुर ,तीखा ,कड़ुवा,कसैला और अम्ल पाये जाते हैं। वैज्ञानिक मतानुसार हरड़ की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसके फल में चेब्यूलिनिक एसिड ३०%,टैनिन एसिड ३०-४५%,गैलिक एसिड,ग्लाइकोसाइड्स,राल और रंजक पदार्थ पाये जाते हैं। ग्लाइकोसाइड्स कब्ज़ दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये तत्व शरीर के सभी अंगों से अनावश्यक पदार्थों को निकालकर प्राकृतिक दशा में नियमित करते हैं, यह अति उपयोगी है।

हरड़ के लाभ

१- हरड़ के टुकड़ों को चबाकर खाने से भूख बढ़ती है।
२- छोटी हरड़ को पानी में घिसकर छालों पर प्रतिदिन ३ बार लगाने से मुहं के छाले नष्ट हो जाते हैं, इसको आप रात को भोजन के बाद भी चूंस सकते हैं।
३- छोटी हरड़ को पानी में भिगो दें, रात को खाना खाने के बाद चबा चबा कर खाने से पेट साफ़ हो जाता है और गैस कम हो जाती है।
४- कच्चे हरड़ के फलों को पीसकर चटनी बना लें। एक -एक चम्मच की मात्रा में तीन बार इस चटनी के सेवन से पतले दस्त बंद हो जाते हैं।
५- हरड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में दो किशमिश के साथ लेने से अम्लपित्त (एसिडिटी ) ठीक हो जाती है।
६- हरीतकी चूर्ण सुबह शाम काले नमक के साथ खाने से कफ ख़त्म हो जाता है।
७- हरड़ को पीसकर उसमे शहद मिलाकर चाटने से उल्टी आनी बंद हो जाती है.

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डायालीसीस से मुक्ति पाए, किडनी को बचाने वाली आैषधी


यह दवाइ किडनी रोग जेसे किडनी फेल्योर, ब्लड युरीयां बढ़नां, क्रिएटीनीन बढ़नां, किडनी सिकुडनां वगेरह पर 100% प्रभावी वं हमारे द्वारा कइ मरीजो पर अनुभूत है । इसको सभी ग्रृप वं रिश्तेदारो के साथ अचूक शेयर करे ताकी कीसी की जीन्दगी बचाइ जा सके ।

गोखरु          100 GMS
पुनर्नवां         100  Gms
एरण्डमूल     100 Gms
वरुणछाल     100 Gms
गिलोइबैल     100 Gms
पाषाणभेद    100 Gms
नीमके पत्ते    50 Gms
इन्द्र जौ        100 Gms
जौ-क्षार        30 Gms

उपर दी गइ सभी चिजो को पीसकर कपड़छान चूरन करके मिक्स करले । आैर डिब्बे मे पेक करके रख लिजिए । खालिपेट 2 चम्मच चूरन + २ ग्लास पानी मे मिक्स करके धीमी आंच पर पकाए फीर जब आधा ग्लास पानी बचे तब छानकर पीए । यह प्रयोग दिनमे २ बार करनां है आैर यह प्रयोग एलोपैथी दवाइ वं डायालीलीस के साथ भी कियां जा सकतां है ।

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अगर बार-बार होते हैं हाथ-पैर सुन्न तो अजमाएं ये घरेलू नुस्खा


हाथ या पैर का सुन्न हो जाना बहुत ही कष्टदायक होता है। लेकिन घबराइए नहीं क्योंकि सरल घरेलू उपचार की मदद से इसका इलाज किया जा सकता है।

1. घरेलू उपचार

कभी-कभी हाथ या पैर के सुन्न होने पर स्पर्श संवेदना में कमी आ जाती है। इसके साथ ही सुन्न हाथ या पैर में झनझनाहट, जलन, तेज दर्द और कमजोरी भी महसूस होती है। यह बहुत ही आम समस्या है और हम में से लगभग सभी को कभी-कभी इसका अनुभव होता है।

लगातार हाथों और पैरों पर दबाव, तंत्रिका में चोट, ठंडी चीज को काफी देर तक छूना, बहुत अधिक शराब का सेवन, धूम्रपान, डायबिटीज, थकान, श्रम का अभाव, विटामिन बी या मैग्‍नीशियम जैसी पोषक तत्वों की कमी जैसे इस समस्या के कई कारण हो सकते हैं। लेकिन घबराइए नहीं क्योंकि सरल घरेलू उपचार की मदद से इसका इलाज किया जा सकता है।

2. गर्म सिंकाई

सबसे पहले प्रभावित हिस्से पर गर्म पानी का सेक करें। यह सुन्न हिस्से में ब्लड की आपूर्ति बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा, यह उस हिस्से की मांसपेशियों और नसों को आराम देता है। एक साफ कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर 5-7 मिनट के लिये प्रभावित जगह को सेंके।

3. मसाज

हाथ या पैर में सुन्‍नपन आने पर मसाज इस समस्‍या से निपटने का सबसे आसान और सरल तरीका है। यह ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है, जिससे सुन्नता में कमी आती है। इसके अलावा यह मसल्‍स और नसों को प्रोत्‍साहित कर, समग्र कामकाज में सुधार करता है। अपने हाथों में गर्म जैतून, नारियल या सरसों के तेल लेकर इसे सुन्न हिस्‍से में लगाकर 5 मिनट के लिए सर्कुलर मोशन में अपनी उंगालियों से मसाज करें। जरूरत पड़ने पर इस उपाय को दोहराये।

4. ऑक्सीजन में सुधार करें एक्सरसाइज

एक्सरसाइज शरीर के विभिन्न अंगों में ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन में सुधार करता है, जिससे हाथ और पैर सहित शरीर के किसी भी अंग में सुन्नपन, झनझनाहट को रोकने में मदद मिलती है। इसके अलावा नियमित रूप एक्सरसाइज गतिशीलता में सुधार और कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाता है।

5. हल्दी

हल्दी में मौजूद कुरकुर्मीन नाम का तत्व पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करने में मदद करता है। इसके अलावा, इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुण प्रभावित हिस्से में दर्द और परेशानी कम करने में मदद करता है। समस्या होने पर एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी मिक्स करके हल्की आंच पर पकाएं। फिर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में एक बार पीने से ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है। आप हल्दी और पानी से बने पेस्ट से प्रभावित हिस्से पर मसाज भी कर सकते हैं।

6. दालचीनी

दालचीनी में महत्वपूर्ण विटामिन बी के साथ मैंग्नीज और पोटेशियम सहित कई प्रकार के केमिकल और पोषक तत्व होते हैं। यह पोषक तत्व हाथ और पैर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाकर हाथ और पैर की सुन्नता को दूर करने में मदद करते है। विशेषज्ञ अच्छी तरह से ब्लड सर्कुलेशन के लिए नियमित रूप से 2 से 4 ग्राम दालचीनी लेने की सलाह देते हैं। एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर नियमित रूप से सेवन करें। या आप एक चम्‍मच दालचीनी के पाउडर में थोड़ा सा शहद मिलाकर नियमित रूप से कुछ हफ्तों के लिए ले सकते हैं.

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रोना हमारे लिए उतना ही आवश्यक है जितना कि हंसना



जी हां दोस्तों आज मैं आप को रोने के फायदे बताने जा रहे है जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे
अगर आप भी उनमें से हैं जो अपने दर्द को छुपाते हैं तो अपनी आदतों को बदल डालिए और जब मन करे तो दिल खोल कर रो लीजिए. इससे आपका मन हल्का हो जाएगा और आप अपने आपको काफी फ्रेश महसूस करेंगे.

आइए दोस्तों एक-एक कर मैं आपको रोने के फायदे बताने जा रहे हैं
रोने के फायदे –

1 – डिप्रेशन से बाहर निकालने में मददगार
कोई भी इंसान डिप्रेशन में तब चला जाता है जब वह अंदर ही अंदर घुटता रहता है. उसके दिल में किसी तरह का दर्द, किसी तरह की तकलीफ इत्यादि दबी हो. और वो उसे बाहर ना निकाल पाता हो. ऐसे में कोई भी इंसान धीरे – धीरे कर डिप्रेशन में चलता चला जाता है. लेकिन अगर वो इंसान दिल खोलकर किसी के पास रो लेता है, या नहीं तो अकेले में भी रो ले, तो उसका मन काफी हद तक हल्का हो जाता है. और ऐसे में उसे डिप्रेशन से बाहर निकलने में काफी मदद मिल जाती है.

2 –आंखों की रोशनी बनाए रखने में मददगार
आंखों में मेंब्रेन के सूखने की वजह से आंखों की रोशनी कम होने लगती है. लेकिन आपके आंसू अगर निकलते रहें तो इसे सूखने नहीं देते हैं. और आंखों की रोशनी बनी रहती हैं. इसलिए आंखों से आंसू का निकलना आपकी आंखों की रोशनी के लिए काफी फायदेमंद है.
3 –बैक्टीरिया को खत्म करने में मददगार
हमारे आंसुओं में लोसोजोम नाम का एक तत्व पाया जाता है. जो बाहरी बैक्टीरिया को खत्म करने में 90 फ़ीसदी तक सफल है.

4 – तनाव मुक्त करने में मददगार
हम जब भी तनाव में होते हैं, और रोते हैं, तो आसुओं के साथ एड्रेनोकार्टिकोट्रोपिक और ल्यूसिन जैसे हार्मोन निकलते हैं. जिससे हमें तनाव से मुक्ति पाने में मदद मिलती है.

5 – दिल दिमाग और लिंबिक सिस्टम को ठीक रखने में मददगार
रोने के कारण हमारा मन हल्का होता है जिससे दिमाग लिंबिक सिस्टम और दिल स्वस्थ बना रहता है.
ये है रोने के फायदे – आपको एक उदाहरण के तौर पर मैं बताना चाहता हूं कि आप ध्यान दें तो पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में हार्ट की समस्या कम होती है. इसके पीछे मेरे ख्याल से सबसे बड़ी वजह है रोना. गौर करने वाली बात है कि महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा खुल कर रो लेती है. जिससे उनका मन हल्का हो जाता है. जबकि वहीं पुरुष अपने दर्द को दबा कर रखते हैं. जल्दी रो नहीं पाते. कहीं ना कहीं उनमें हर्ट की समस्या बढ़ने का ये भी एक बड़ा कारण हो सकता है.
इसलिए मेरा तो हर किसी से यही सजेशन होगा, कि जब भी दिल करे खुल कर रो लेना चाहिए.

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सरदर्द के लिए अचूक "प्राकृतिक चिकित्सा "मात्र पांच मिनट में सरदर्द "गायब"


नाक के दो हिस्से हैं दायाँ स्वर और बायां स्वर जिससे हम सांस लेते और छोड़ते हैं ,पर यह बिलकुल अलग - अलग असर डालते हैं और आप फर्क महसूस कर सकते हैं |

दाहिना नासिका छिद्र "सूर्य" और बायां नासिका छिद्र "चन्द्र" के लक्षण को दर्शाता है या प्रतिनिधित्व करता है |

सरदर्द के दौरान, दाहिने नासिका छिद्र को बंद करें और बाएं से सांस लें |

और बस ! पांच मिनट में आपका सरदर्द "गायब" है ना आसान ?? और यकीन मानिए यह उतना ही प्रभावकारी भी है..
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अगर आप थकान महसूस कर रहे हैं तो बस इसका उल्टा करें...
यानि बायीं नासिका छिद्र को बंद करें और दायें से सांस लें ,और बस ! थोड़ी ही देर में "तरोताजा" महसूस करें |
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दाहिना नासिका छिद्र "गर्म प्रकृति" रखता है और बायां "ठंडी प्रकृति"

अधिकांश महिलाएं बाएं और पुरुष दाहिने नासिका छिद्र से सांस लेते हैं और तदनरूप क्रमशः ठन्डे और गर्म प्रकृति के होते हैं सूर्य और चन्द्रमा की तरह |
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प्रातः काल में उठते समय अगर आप बायीं नासिका छिद्र से सांस लेने में बेहतर महसूस कर रहे हैं तो आपको थकान जैसा महसूस होगा ,तो बस बायीं नासिका छिद्र को बंद करें, दायीं से सांस लेने का प्रयास करें और तरोताजा हो जाएँ |
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अगर आप प्रायः सरदर्द से परेशान रहते हैं तो इसे आजमायें ,दाहिने को बंद कर बायीं नासिका छिद्र से सांस लें बस इसे नियमित रूप से एक महिना करें और स्वास्थ्य लाभ लें |
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तो बस इन्हें आजमाइए और बिना दवाओं के स्वस्थ महसूस करें

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कैल्शियम की कमी होने पर हमारा शरीर देता है यह सकेंत


1. कैल्शियम की कमी से दांतों में सड़न होने लगती है।

2. कैल्‍शियम की कमी से हमारे नाखून बहुत कमजोर हो जाते हैं और वह टूटने लगते हैं। और बाल झड़ने लगते हैं।

3. कमजोरी और थकान लगातार रहना। कुछ ना करने पर भी हड्डियों में दर्द बना रहना।

4. हाथ पैरों में दर्द होना, मांसपेशियों में दर्द बने रहना।

5. कैल्शियम की कमी होने पर हमारे शरीर के मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या उत्पन्न होने लगती है।

6. हमारी याददाश्त कमजोर तथा डिप्रेशन की समस्या बढ़ने लगती है। यह कैल्शियम की कमी के लक्षण है।

यह करें -

जो लोग ये सोचते हैं कि उनके शरीर में कैल्शियम की कमी नहीं सकती है, तो यह गलत है। केवल बूढ़े ही नहीं बल्‍कि हर उम्र के लोगों को भी कैल्शियम की कमी होती है।कैल्‍शियम की कमी का पता लगाने के लिए खून की जांच करवाएं और डॉक्‍टर द्वारा लिखें गए अन्‍य लैब टेस्‍ट करवाएं।

कैल्शियम की कमी को पूरा करने वाले खाद्द पर्दाथ -

दूध, पनीर, दही।

ब्रोकोली, काले चने और भिंडी, हरी पत्तेदार सब्जियां।

मुनक्का, किशमिश, बादाम, पिस्ता, अखरोट, तरबूज के बीज, कद्दूब के बीज।

संतरा, पाइनापल, केला, एवोकाडो, कीवी, अंजीर, खजूर, शहतूत आदि फलों का सेवन। और इनके अलावा पर्याप्त मात्रा में धूप लेनी चाहिए।

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त्वचा को जवां रखने के लिए रोज सोने से पहले करें ये 5 काम


हर रात सोने से पहले क्या आप अपनी त्वचा को गुड-नाइट कहती हैं? अगर नहीं, तो अब भी वक्त है, इसे अपनी आदत में शुमार कर लीजिए...

आमतौर पर हम सभी दिनभर तो अपनी त्वचा की देखभाल कर लेते हैं लेकिन रात को उसे अनदेखा करके सो जाते हैं. पर विशेषज्ञों की मानें तो रात के समय त्वचा की अनदेखी करना खतरनाक हो सकता है. कुछ छोटे से उपाय है जिन्हें सोने से पहले करके आप निखरी-जवान त्वचा पा सकती हैं.....

1. भले ही आप कितनी भी थकी हुई क्यों न हों लेकिन बिना मेकअप उतारे सोने मत जाएं. बिना मेकअप उतारे सोने से आपकी त्वचा पर रसायनिक प्रभाव पड़ेगा और आपकी त्वचा पर मौजूद सूक्ष्म रंध्र बंद हो जाएंगे. त्वचा का सांस लेते रहना बहुत जरूरी है और रंध्रों के बंद हो जाने से त्वचा की चमक फीकी पड़ने लग जाती है.

2. अगर आपको फेशियल कराए काफी समय हो चुका है और आपकी त्वचा बेजान नजर आने लगी है तो रोज रात को अपने हाथों से चेहरे की अच्छी तरह मसाज करें. ऐसा करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और त्वचा में निखार आता है. फेशियल के लिए नेचुरल चीजों का इस्तेमाल करना ज्यादा कारगर साबित होगा.

3. सोने से पहले हल्के गुनगुने पानी से नहाना आपको राहत देने का काम करेगा. अगर आप इसी पानी में कुछ मात्रा में नमक मिला सकें तो और अच्छा रहेगा. नमक में मौजूद तत्वों के चलते संक्रमण होने की आशंका कम हो जाती है.

4. अगर आप चाहती हैं कि आपके बाल लंबे हों तो रोज रात को सोने से पहले कंघी करके सोएं. इससे बालों का झड़ना भी कम हो जाएगा. दरअसल, बालों में कंघी करने से ब्लड सर्कुलेशन बूस्ट होता है और जड़ें मजबूत होती हैं.

5. दिनभर की थकान हमारी आंखों को भी बोझिल कर देती है. ऐसे में बेहतर होगा कि आप अपनी आंखों को अच्छी तरह से पानी से धोएं और उसके बाद ही सोने जाएं. ऐसा करने से डार्क सर्कल होने की अाशंका कम हो जाएगी.

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सोने से पहले पैरों की मालिश करेंगे तो होंगें ये लाभ



1 :- खून का दौरा सुचारु करे :- सारा दिन टाईट जूते और अन्य तरह के फुटवियर पहनने से पैरों के तलवों तक खून का दौरा सुचारु रूप से नही हो पाता है । इस अवरुद्ध हुये खून के दौरे को सुचारू करने के लिये पैरों की मालिश सर्वोत्तम उपाय है । सोने से पहले 10 से 20 मिनट तक पैरों और तलवों की मालिश करने से पैरों के अंतिम हिस्से तक खून का दौरा सुचारू हो जाता है । यह मालिश उन लोगों के लिये विशेष रूप से लाभकारी है जिनको मधुमेह रोग के कारण तलवों में सुन्नपन की समस्या पैदा होने लगी है ।
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2 :- अच्छी नींद लाये :- सारे दिन की भाग-दौड़ के बाद शाम होते होते दिमाग बहुत ज्यादा थकने लगता है जिस कारण बहुत से लोग शांतिपूर्वक नही सो पाते है और उनकी नींद पूरी रात बार बार टूटती है । यदि ऐसे परेशान लोग रोज रात को सोने से पहले 10-15 मिनट तक अपने पैरों पर मालिश करें तो यह पैरों की बेचैनी को खत्म करके शांतिपूर्वक नींद आने में सहायता करता है ।

3 :- तनाव और अधीरता को भगाये :- हम लोग अधिकतर तनाव और अधीरता में रहते ही हैं । पैरों की मालिश तनाव और हड़बड़ी को घटाने में बहुत मदद कर सकती है । यह दिमाग को शांति पहुचाने के अलावा और भी बहुत से लाभ कर सकती है । मालिश करते समय तलवों पर अलग अलग हिस्सों पर अतिरिक्त दवाब देनें से नाड़ीतंत्र सही होता है और पूरे शरीर में आराम महसूस होता है जिससे तनाव में बहुत लाभ होता है ।
दवाब हाथों से देने के अतिरिक्त एक्यूप्रेशर वाले फुटपैड़ भी प्रयोग किये जा सकते हैं ।
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4 :- पैरों के दर्द से राहत :- अच्छी तरह से की गयी मालिश पैरों और पैरों की माँशपेशियों को बहुत अच्छी तरह से आराम पहुँचाती है साथ ही साथ पैरों पर आयी हुयी सूजन भी मालिश से उतर जाती है जिस कारण से पैरों के दर्द में बहुत आराम होता है । यदि मलिश करने से पहले पैरों को हल्के गुनगुने पानी से धो लिया जाये तो परिणाम और भी बेहतर होते हैं ।

5 :- रक्तचाप कम करता है :- चूंकि दिन भर जूते पहने रहने से पैर के अंतिम भाग तक खून का दौरा सही से नही पहुँच पाता है अत: दिल ज्यादा जोर से पम्पिंग करके इस समस्या को दूर करने की कोशिश करता है जिस कारण से बाकि पूरे शरीर में रक्त्चाप बढ़ने का खतरा रहता है । यदि रात को तलवों में मालिश की जाये तो पैरों का रक्तदवाब सही रहता है और इस समस्या से बचा जा सकता है ।
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पैरों की मालिश कैसे की जाये :- शरीर के बाकि हिस्सों की मालिश करने के लिये आपको दूसरों की मदद की जरूरत पड़ सकती है किंतु पैरों की मालिश आप अपने आप ही कर सकते हैं । पैरों की मालिश का सही तरीका पढ़िये प्रकाशित आयुर्वेद के सौजन्य से ।
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– एक बड़े बरतन में गुनगुना पानी भरिये और उसमें अपनी पसंद का कोई भी तेल 5-6 बूँद ड़ालिये ।
– 10 मिनट के लिये अपने पैरों को इसमें डुबाकर बैठ जाइये और फिर एक सूती तौलिये से पैरों को दबा-दबा कर पोंछ लीजिये ।
– अब एक कुर्सी पर आराम से बैठ जाइये ।
– अपने सीधे पैर के तलवे को उल्टे पैर के घुटने पर टिका लें ।
– अपनी पसंद का कोई भी तेल जैसे कि नारियल तेल, तिल तेल, सरसों तेल अथवा जैतून का तेल हल्का गर्म किया हुया लेकर अपने सीधे पैर की मालिश कीजिये । मालिश करते समय हाथ ऊपर से नीचे की तरफ ले जायें और पैरों पर हल्का हल्का सा दवाब जरूर दीजिये ।
– पैरों के बाद तलवों और पैर की अंगुलियों की भी मालिश कीजिये ।
– अब पैरों की स्थिति बदलकर उल्टे पैर भी इसी तरह मालिश कीजिये ।
– ध्यान रखें एक पैर की सम्पूर्ण मालिश के लिये 10-15 मिनट पर्याप्त हैं.

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खट्टी डकारें आने से छुटकारा दिलाने वाले सबसे कारगर प्राकृतिक नुस्ख़े...


डकार आना एक आम समस्या है। इससे निजात पाने के लिए आपको जलन पैदा करने वाली चीज़ों को खाना कम करना होगा। साथ ही, भोजन में उन चीज़ों को शामिल करना होगा जो इसकी रोकथाम करके आपको राहत पहुंचाती हैं..

डकारें आना यानी कि गैस्ट्रोफेजियल रिफ्लेक्स (Gastroesophageal reflux) एक आम समस्या है। इसमें छाती में उस स्थान पर जलन और दर्द होता है जहां भोजन-नली (ईसोफेगस) अमशाय यानी पेट से जुड़ती है।

यह स्थिति तब पैदा होती है जब ईसोफेगस तक के मार्ग को नियंत्रित करने वाले वाल्व- ईसोफेजियल स्फिंक्टर में गड़बड़ी पैदा हो जाती है और यह भोजन को ठीक से पेट में ही रखने में नाकाम रहता है।

इसके अलावा, खाना भोजन-नली की ओर वापस लौटता रहता है। जब यह भोजन-नली की दीवारों पर रगड़ खाता है तो हमें जलन होती है और हम परेशान हो जाते हैं।

इस स्थिति का कारण ठीक से भोजन नहीं करना हो सकता है, जैसेः

लंबे समय तक भोजन न करना
एसिड की अधिक मात्रा वाले खाद्य का सेवन करना
ज़रूरत से ज़्यादा जलन पैदा करने वाली चीज़ें खाना जैसे कि चॉकलेट, मसाले या ज़्यादा फैट वाले खाद्य।
डकार आने के लक्षण

एसिडिटी यानी गैस्ट्रिक रिफ्लक्स या ईसोफेजियल रिफ्लक्स में दिखने वाले लक्षण बहुत आम हैं। इनमें शामिल हैंः

सीने में जलन
उल्टी आना
अनिद्रा
भूख न लगना
पेट में एसिडिटी
अगर गैस्ट्रिक रिफ्लक्स का ठीक से उपचार न किया जाए को इसके कारण हियाटल हर्निया (hiatal hernia) हो सकता है। इसमें डायफ्राम का नियंत्रक वाल्व ठीक से काम नहीं कर पाता है। जैसा कि हमने पहले बताया है, यह वाल्व भोजन का प्रवाह नियंत्रित करता है और उसे पेट से बाहर नहीं आने देता है..

हमारे आसपास बहुत से लोग यह जानते हैं कि कई शारीरिक समस्याओं का उपचार करने में प्रकृति में पाई जाने वाली चीज़ों के औषधीय गुण ज़्यादा कारगर होते हैं। इनमें दवाइयों की तरह कृत्रिम रसायन नहीं होते हैं और इस कारण ये और उपयोगी होती हैं।

इसके बावजूद, आप यह बात ध्यान में रखें कि ये प्राकृतिक नुस्ख़े पहले से जारी मेडिकल ट्रीटमेंट के सप्लीमेंट हैं और इन्हें पूरी तरह उनके स्थान पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। नीचे हम आपको कुछ ऐसे प्राकृतिक नुस्ख़ों के बारे में बता रहे हैं जिनसे आप डकार आने का उपचार कर सकते हैं।

मुलैठी की चाय (Licorice Tea)

मुलैठी के औषधीय गुण सीने में जलन, पेट में सूजन (गैस्टिराइटिस) और अल्सर का उपचार करते हैं।

सामग्री
1 ग्लास पानी (200 मिली.)
3 चम्मच मुलैठी (45 ग्राम)
आपको क्या करना चाहिए?
पानी को उबलने तक गर्म करें।
मुलैठी के बेहद महीन टुकड़े कर लें और इसे उबलते हुए पानी में डालें।
5 मिनट तक पानी में भीगने के लिए छोड़ दें। इसके बाद आंच से हटा दें और 15 मिनट तक बैठने दें।
इस पेय को दिन में दो बार पीयें।
सेब
इस फल के औषधीय गुणों का पूरा फ़ायदा उठाने का एक तरीका इसका काढ़ा बनाकर पीना है।

सामग्री
1 सेब
1 कप पानी (250 मिलीलीटर)
आपको क्या करना चाहिए?
एक छोटे भगौने में पानी लें और इसे उबलने के लिए आंच पर रखें।
बिना छिलका उतारे सेब के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें और इन्हें उबलते हुए पानी में डालें।
बर्तन को ढक दें और धीमी आंच पर 10 मिनट तक काढ़ा बनने दें।
तैयार पेय को कप में डालकर पियें।
आप इसे रोज़ाना तीन बार पी सकते हैं।
बेकिंग सोडा

सामग्री
1 ग्लास पानी (200 मिलीलीटर)
1 चम्मच बेकिंग सोडा (9 ग्राम)
आपको क्या करना चाहिए?
एक ग्लास पानी में बेकिंग सोडा डालें और अच्छी तरह मिलाएं।
पेय को दिन में एक बार पियें।
इसे भी पढ़ें:
8 लक्षण जो लीवर में टॉक्सिन जमा होने पर आपको परेशान करते हैं

एलोवेरा
एलोवेरा में एंटी-इन्फ्लामेटरी गुण होते हैं जो डकार आने में कमी लाने में मददगार हैं।

सामग्री
4 चम्मच एलोवेरा जेल (60 ग्राम)
1 ग्लास पानी (200 मिलीलीटर)
आपको क्या करना चाहिए?
एलोवेरा की एक पत्ती से जेल निकालें और इसे ब्लेंडर में एक ग्लास पानी के साथ मिलाएं।
छानकर पीने के लिए दें।
इस पेय को डकार आने या सोने से पहले पीने को दें।
अदरक
आप काढ़ा बनाकर इसके एंटी-इन्फ्लामेटरी गुणों का फ़ायदा उठा सकते हैं।

सामग्री
1 चम्मच अदरक की गांठ (15 ग्राम)
1 ग्लास पानी (250 मिलीलीटर)
आपको क्या करना चाहिए?
एक बर्तन में पानी उबालें। जब यह गर्म हो जाए तो अदरक के महीन टुकड़े कर लें।
उबलते हुए पानी में अदरक के टुकड़े डालें और 10 मिनट तक पड़ा रहने दें।
निर्धारित समय के बाद आप इसे पी सकते हैं।
आप इस पेय को दिन में एक बार पी सकते हैं।

इन्हें भी आजमाएं

आप कई अन्य नुस्ख़े भी आजमा सकते हैं। दूध जैसे ग्लूटामीन से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। ये छाती में जलन से राहत पहुंचाते हैं। ग्लूटामीन शरीर में पाया जाने वाला एक खनिज है जिसकी कमी से डकार आने की समस्या हो सकती है।

अधिक शारीरिक गतिविधियां करें। आपके एक्सरसाइज करने से शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है। भोजन अच्छी तरह पचता है। इससे एसिडिटी और शरीर के लिए बेकार टॉक्सिन कम करने में मदद मिलती है।

डकार आने से होने वाली परेशानी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्यवर्धक आहार से दिन की शुरुआत करें। फैटी फूड खाने से परहेज करें।
लगातार शराब पीने या तंबाकू खाने से ईसोफेजियल कैविटी (भोजन-नली गुहा) को नुकसान पहुंचता है। इनका सेवन करने से बचने के अच्छे नतीजे आपको जल्द नज़र आएंगे।
अगर आपके लक्षण लगातार बने रहते हैं या बदतर हो जाते हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं आपको कोई अन्य बीमारी तो नहीं है।

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सर्दियों में नहीं टूटेंगे आपके बाल, जानें शहनाज हुसैन से टिप्स


सर्दी के मौसम  में बालों की ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। सर्द हवाओं के चलते सिर की त्वचा  शुष्क और बेजान हो जाती है, जिससे बालों की जड़ें  कमजोर  हो जाती हैं और वे टूटने लगते हैं। और भी कई कारण हैं, जिनकी वजह से बालों को नुकसान पहुंचता है। इन दिनों बालों को कैसे रखें सेहतमंद, आइए जानें-

’सर्दियों में हीटर, ब्लोअर का खूब उपयोग होता है, जिनकी वजह से घर के वातावरण में नमी की कमी हो जाती है और बाल  टूटने शुरू हो जाते हैं। अधिक गर्म पानी से नहाना भी बालों के खराब होने का कारण बनता है। इस मौसम में सामान्य गुनगुने पानी से नहाना  ही बालों के लिए लाभदायक रहेगा।

इन दिनों खुश्की की वजह से बालों में आद्र्रता तथा तैलीयपन में कमी आ जाती है, जिससे बालों में पोषाहार की जरूरत ज्यादा बढ़ जाती है। बालों में नारियल तेल की मालिश से बालों को पोषाहार मिलता है। यदि आप नारियल तेल लगाकर हल्की-हल्की मालिश करती हैं तो इससे बालों की कोशिकाओं में खून का संचार बढ़ जाता है।

बालों की जड़ों को मजबूत करने के लिए हफ्ते में तीन बार जैतून या बादाम तेल में नीबू का रस डाल  कर  बालों की नियमित मसाज जरूरी होती है। इससे बालों में नमी बनी रहती है तथा  बाल घने व काले  बने रहेंगे।
आंवला तथा एलोवेरा का रस लगाने से बालों की जड़ें मजबूत होती हैं। आंवले के सेवन तथा आंवले के जूस को बालों पर लगाने से बाल काले व घने होते हैं।  आंवला व रीठा पाउडर  बालों में लगाने से भी बालों को पोषण मिलता है।

घरेलू उपचार के तौर पर एक कप आंवला पाउडर , दो चम्मच  कैस्टर आयल और एक अंडे को फेंट कर पेस्ट बना लें तथा सिर और बालों पर लगा कर आधे घंटे बाद हल्के गुनगुने पानी से धो डालें। क्योंकि बाल प्रोटीन से बने होते हैं, इसलिए हमें अपने भोजन में दूध, अनाज, सोयाबीन आदि प्रोटीन युक्त पदार्थ जरूर शामिल करने चाहिए। अपने खाने में हरी सब्जियों को भी जरूर शामिल करें।

शुष्क बालों के पोषण के लिए
एक कप दूध में अंडा को फेंटे तथा इस मिश्रण को स्कैल्प पर लगाकर पांच मिनट तक रहने दें। इसके बाद बालों को सादे पानी से धो डालें। इस विधि को हफ्ते में दो बार प्रयोग करें।

दही में नीबू का रस मिलाकर पेस्ट बनाएं और उस पेस्ट को बालों की जड़ों पर लगाएं तथा एक घंटा तक उसे लगा रहने दें। इसके बाद इसे हल्के गुनगुने पानी से धो डालें। इससे आपके बालों का रूखापन खत्म हो जायेगा तथा बालों की खोई हुई चमक भी लौट आएगी।
शुष्क, दो मुंहे तथा भुरभुरे बालों के लिए एक या दो चम्मच शुद्ध बादाम तेल में एक चम्मच शुद्ध ग्लिसरीन मिलाएं तथा इस मिश्रण को बालों पर लगा लें। यदि बाल लम्बे हों तो तेल की मात्रा बढ़ा लें। इस मिश्रण को लगाने के आधा घंटे बाद बालों को ताजे पाने से धो डालें।

बालों की रंगत तथा बनावट सुधारने के लिए एक चम्मच अरंडी के तेल तथा एक चम्मच नारियल के तेल को मिलाकर गर्म कर लें तथा इसे बालों व स्कैल्प पर लगाएं और रात भर लगा रहने दें। अरंडी का तेल बालों को काला करने में मदद करता है। रातभर लगा रहने के बाद बालों को सुबह ताजे स्वच्छ पानी से धो डालें। ध्यान रखें, जब भी धूप में बैठें तो अपने बालों को हमेशा ढक कर रखें।

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गाजर खाने के फायदे


गाजर को उसके प्राकृतिक रूप यानी कच्चा खाना लाभदायक होता है। भीतर का पीलापन भाग नहीं खाना चाहिए। क्योंकि, वह अत्यघिक गरम होता है। इससे छाती में जलन होती है।

शिवरात्री तक गाजर का सेवन लाभकारी है।

गाजर के रस का एक गिलास पूर्ण भोजन है। इसके सेवन से रक्त में वृद्धि होती है।

यह पीलिया की प्राकृतिक औषधि है। इसका सेवन
ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर ) और पेट के कैंसर में
भी लाभदायक है। इसके सेवन से कोषों और
धमनियों को संजीवन मिलता है। गाजर में बिटा-
केरोटिन नामक औषधीय तत्व होता है, जो कैंसर पर नियंत्रण करने में उपयोगी है।

गाजर ह्दय के लिए लाभकारी, रक्तको शुद्ध करने वाली, वातदोषनाशक, पुष्टिवर्द्धक तथा दिमाग और नस- नाडि़यों के लिए बलवर्घक, बवासीर, पेट के रोगों, सूजन, पथरी तथा दुर्बलता का नाश करने वाली है।

गाजर के बीज गरम होते हैं। अत: गर्भवती महिलाओं को उनका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

कैल्शियम और केरोटीन की प्रचुर मात्रा होने के कारण छोटे बच्चों के लिए यह उत्तम आहार है। गाजर से आंतों के हानिकारक कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

इसमें विटामिन ए काफी मात्रा में पाया जाता है।
गाजर रक्तको शुद्ध करने वाली होती है। 10-15 दिन गाजर का रस पीने से रक्तविकार, गांठ, सूजन और त्वचा के रोगों में लाभ मिलता है इसमें लौहतत्व भी अत्यघिक मात्रा में पाया जाता है। गाजर खूब चबा - चबा कर खाने से दांत भी मजबूत, स्वच्छ और चमकीले होते हैं। मसूढ़े मजबूत होते हैं।

रोजाना गाजर का रस पीने से दिमागी कमजोरी दूर
होती है।

गाजर को कद्दूकस करके नमक मिलाकर खाने से खाज-खुजली में फायदा होता है।

गाजर के रस में नमक, घनिया पत्ती, जीरा,
काली मिर्च, नीबू का रस डालकर पीने से पाचन
संबंघी गड़बड़ी दूर होती है।

ह्दय की कमजोरी अथवा घड़कनें बढ़ जाने पर गाज को भूनकर खाने पर लाभ होता है।

गर्मी में गाजर का मुरब्बा दिमाग के लिए फायदेमंद
होता है।

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ल्युकोरीयां (सफेद पानी) की समस्या को जड़ से समाप्त करने वाला इलाज


आजकल काफी महिलाए सफेद पानी की समस्या से परेशान है । काफी इलाज करने पर भी यह समस्या से परेशान होती रहती है । लेकीन हम आज आपको जो इलाज बताने जा रहे है वह इलाज अगर २ महिने तक रेग्युलर करते है तो गारंटीसे आपकी समस्या जड़ से समाप्त हो जायेगी ।

*अशोकछाल.        50 ग्राम*
*मुलहठी                50 ग्राम*
*इलायची               50 ग्राम*
*शतावरजड़           50 ग्राम*
*बंगभस्म.              10 ग्राम*
*शुद्ध शिलाजीत     10 ग्राम*
*धागेवाली मिश्री   100 ग्राम*

उपर दी गइ सभी चिजो को पंसारी से लाकर साफ करके कपड़छान चूरन तैयार करले वं शुद्ध शिलाजीत वं बंगभस्म बैधनाथ कंपनी का लेकर सबको मिलादे आैर कांच के डीब्बेमे भर दिजिए ।

*सेवन विधि :-*

*सुबह शाम 1-1 चम्मच चूरन को 200 Ml दूधमे मिलाकर सेवन करे । नियमित 2 या 3 महिने के सेवन से आपकी समस्या जड़ से समाप्त हो जायेगी ।*

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नवजात को सर्दी खांसी सिम्पल टीप्स


*अजवाइन*
अजवाइन को हल्का गुलाबी भून ले कपडे मे लपेट कर बच्चे की छाती पर हल्की सिकाई दे
ऐसी ही दूसरी पोटली बना कर बच्चे के सीरहाने रखै बच्चे को सांस लेने मे आराम रहता है जमा बलगम आसानी से नीकल जाता है

*सरसों का तेल*

5-10 चम्मच सरसों के तेल में पिसे हुए लहसुन और अजवाइन के बीज का तड़का दें । इसके ठंडा होने पर इसे छान कर एक बोतल में भर लें। जब भी आपको लगे की बच्चों को सर्दी–खांसी की शुरुआत हो तो इसकी हल्के हाथ से बच्चे के माथे, गले और छाती पर मालिश करें। तकलीफ से तुरंत आराम आना शुरू हो जाएगा।

*तुलसी पत्ते*

तुलसी के पत्तों में बहुत औषधीय गुण होते हैं। छोटे बच्चों को सर्दी–खांसी ठीक करने के उपाय के रूप में इन्हें पानी या दूध किसी भी प्रकार से मिलकर पिया जा सकता है। तुलसी के कुछ पत्तों को पानी में भिगो कर एक घंटे के लिए रख दें और 2 वर्ष से ऊपर के बच्चों को यह पीने के लिए दिया जा सकता है ।छोटे बच्चे यदि ऊपर का दूध लेते है तो इसमे  पका कर या दे

*विक्स वेपोरब*

छोटे बच्चों की खांसी ठीक करने के लिए विक्स एक बहुत अच्छा उपाय है । बच्चे के पाँव में इसकी मालिश करके उसे मोज़े पहना दें। अगर चाहें तो इसकी मालिश छाती और गले पर भी कर दें।

*नमी*

जब छोटे और नवजात बच्चों को सर्दी खांसी का असर होता है तो बच्चे हवा की शुष्कि से परेशान हो जाते हैं । ऐसे में कमरे में नमी देने का पूरा इंतजाम करके उन्हें आराम देने का प्रयास करें।

*भाप दें*

बहुत बच्चों को कभी भी भाप उस तरह नहीं दी जाती है जैसे हम वयस्क व्यक्ति को देते हैं। इसके लिए आप कमरे में के बाल्टी या बाथरूम में बाथटब गरम पानी से भर लें। ऐसे में छोटे बच्चे को अपनी बाँहों में लेकर भाप के वातावरण में खड़े हो जाएँ । इससे छाती में जमा बलगम आसानी से ढीला पड़ सकता है । नन्हें बच्चों की सर्दी–खांसी में इससे बहुत जल्दी आराम आने की संभावना होती है।

*ज़ीरे* को पाचन तंत्र के स्वस्थ्य के लिए लाभदायी माना जाता है। लेकिन क्या आप जानतीं हैं की इसका उपयोग छोटे बच्चों में सूखी खांसी के उपचार में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। थोड़े से पानी में एक चम्मच ज़ीरा डालकर उबाल लें। अच्छी तरह उबाल आने के बाद इसे छान लें और ठंडा होने पर इसे बच्चे को देंगी तो उसे निश्चित ही सूखी खांसी में आराम आएगा।

*घी*

छोटे बच्चों को सूखी खांसी होने की स्थिति में 2 बड़े चम्मच घी को गरम करके उसमें 2-3 काली मिर्च के दाने पीस कर मिला दें और बच्चे को सारा दिन थोड़ा–थोड़ा देते रहें । यह एक वर्ष से ऊपर के बच्चों को आराम से दिया जा सकता है।

*बच्चों की खांसी का घरेलू नुस्खा है मां का दूध*

जितना संभव हो आपको अपने बच्चे को स्तनपान कराना चाहिए, क्योंकि मां के दूध में ऐसे एंटीबॉडीज होते हैं, जो वायरस, रोगाणुओं और बैक्टीरिया से लड़ने के लिए बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं।


*बच्चों की खांसी का उपाय है नारियल तेल से मालिश* –

इसके लिए आप आधा कप नारियल तेल में एक प्याज, दो से तीन तुलसी की पत्तियों और पान की बेल का तना मिलाकर गर्म करें। गैस को बंद करने के बाद इसमें एक चुटकी कपूर को भी मिला लें। इस तेल से बच्चे की छाती, गर्दन और अंडर आर्म (under arms/ बगल) में मालिश करने से बच्चे की बंद नाक खुल जाती है और उसको सांस लेने में आसानी होती है।

 *बच्चों की खांसी को कम करती है हल्दी*

इस उपाय के लिए आपको हल्दी को पानी में घोल कर पेस्ट तैयार करना होगा। इसके बाद इस पेस्ट को किसी बड़े चम्मच में रखकर गर्म कर लीजिए, जब यह हल्का गर्म हो तब इसे अपने बच्चे की छाती, पैरों और माथे पर लगाएं। हल्दी की गर्माहट बलगम को अवशोषित करती है और बच्चे को राहत प्रदान करती है।

 *शिशु की खांसी में लहसुन और अजवाइन के तेल से* मालिश करें - इस तेल को बनाने के लिए आप लहसुन को सरसों के लगभग एक-चौथाई कप तेेल में डालकर गर्म कर लें। हल्का गर्म रहने पर तेल से बच्चे के पैरों और छाती के तलवों पर मालिश करें। अजवाइन के बीजों को भी इस तेल में मिलाया जा सकता है। सरसों के तेल का गर्म प्रभाव बच्चे की खांसी को कम करने में मदद करता है।


*यदि आपके बच्चे को इनमें से कोई भी तकलीफ है तो आप फौरन डॉक्टर को दिखाएँ*

नाक से हल्का हरा या पीला और गाढ़ा पानी आ रहा है

तेज खांसी के साथ पिला या हरा बलगम है

बहुत तेज बुखार है

टॉन्सिल्स की सूजन के कारण निगलने में परेशानी

सांस लेने में कठिनाई

तेज सांस चल रही हो

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माँ के दूध को बढ़ाते हैं घरेलु उपाय


माँ का अपने बच्चे को दूध पिलाना ममता से भरा और प्रकृति का नियम हैं। माँ का दूध बच्चे के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता हैं। माँ का पहला पीला दूध बच्चे को जानलेवा बीमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता हैं। और तो और स्तनपान करवाने से माँ और बच्चे में एक भवनात्मक रिश्ता भी बनता हैं। लेकिन कई बार माँ के स्तनों में दूध की कमी हो जाती हैं जिस कारण यह बहुत ही गंभीर स्तिथि बन जाती हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए आज हम आपको ऐसे नेचुरल तरीके बताने जा रहे हैं, जो माँ का दूध बढ़ाने में आपकी मदद करेंगे।

कारण:

प्रसूता स्त्रियों में देखा गया है कि कुछ कमजोर कारणों से पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं उतरता है जिसके कारण शरीर का कमजोर होना, दु:ख और चिंता का सताना तथा कलह का वातावरण होना स्त्रियों के छाती में दूध के कम होने के कारण होते हैं

आइये जाने माँ के दूध(Maa ka Doodh) को बढाने के आयुर्वेदिक घरेलू उपाय|
उपाय :

पहला प्रयोगः खजूर, खोपरा, दूध, मक्खन, घी, शतावरी, अमृता आदि खाने से अथवा मक्खन मिश्री के साथ चने खाने से अथवा गाय के दूध में चावल पकाकर खाने से अथवा रोज 1-1 तोला सौंफ दो बार खाने से दूध(Maa ka Doodh)बढ़ता है।

दूसरा प्रयोगः अरण्डी के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी को ऊपर से स्तनों पर डालें एवं उसमें ही उबले हुए पत्तों को छाती पर बाँधने से सूखा हुआ दूध भी उतरने लगता है।

गर्म दूध में घी डालकर पीने से माँ के दूध की वृद्धि होती है।

दूध बंद करने के लिएः कुटज छाल का 2-2 ग्राम चूर्ण दिन में तीन बार खाने से दूध आना बंद हो जाता है

औषधियों से उपचार:

1. विदारीकन्द : विदारीकन्द 100 ग्राम, मुलेठी 100 ग्राम तथा शतावर 100 ग्राम लेकर इसे कूट-पीस और छानकर चूर्ण बना लें। इसका 10 ग्राम चूर्ण और 10 ग्राम पिसी हुई मिश्री एक गिलास दूध में डालकर आधे घंटे तक उबाले इसे थोड़ा ठण्डा करके सोने से पहले घूंट-घूंट कर पीयें। इसे 40 दिन तक अवश्य पीना चाहिए। इस प्रयोग से स्तनों में दूध की बहुत अधिक वृद्धि होती है।

2. जीरा:

सफेद जीरा, सौंफ तथा मिश्री तीनों का अलग-अलग चूर्ण बनाकर समान मात्रा में मिलाकर रख लें। इसे एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ दिन में तीन बार देने से प्रसूता स्त्री के दूध में अधिक वृद्धि होती है।

लगभग 125 ग्राम जीरा सेंककर 125 ग्राम पिसी हुई मिश्री मिला लें। इसको 1 चम्मच भर रोज सुबह और शाम को सेवन करें। जिन माताओं को शिशुओं के लिए दूध की कमी हो, उनका दूध बढा़ने के यह बहुत ही लाभकारी है।

जीरे का लेप लगाने से माँ का दूध की वृद्धि होती है।

3. पपीता: यदि महिलाओं के शरीर में खून की कमी के कारण स्तनों में दूध की कमी हो जाए तो डाल का पका हुआ एक पपीता प्रतिदिन खाली पेट खाने लगातार बीस दिनों तक खिलाना चाहिए। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

4. अंगूर: अंगूर दुग्धवर्द्धक होता है। प्रसवकाल में यदि उचित मात्रा से अधिक रक्तस्राव हो तो अंगूर के रस का सेवन बहुत अधिक प्रभावशाली होता है। खून की कमी की शिकायत में अंगूर के ताजे रस का सेवन बहुत उपयोगी होता है क्योंकि यह शरीर के रक्त में रक्तकणों की वृद्धि करता है।

5. मुनक्का: 10-12 मुनक्के लेकर दूध में उबालकर प्रसूता स्त्री को प्रसव के बाद दिन में दो बार सेवन कराने से पर्याप्त लाभ मिलता है।

6. गाजर: गाजर का रस और भोजन के साथ कच्चे प्याज का सेवन भी मां का दूध बढ़ाने में सहायक होता है।

7. एरण्ड: मां के स्तनों पर एरण्ड के तेल की मालिश दिन में दो-तीन बार करने से स्तनों में पर्याप्त मात्रा में दूध की वृद्धि होती है।

8. प्याज: भोजन के साथ कच्चे प्याज का सेवन अधिक मात्रा में करने से माताओं के स्तनों में दूध में वृद्धि होती है। जब भी माताएं भोजन करें तो कच्चे प्याज का सेवन भोजन के साथ अवश्य करें।

9. मटर: मटर की फली खाने से स्त्रियों के दूध में वृद्धि होती है। मटर की कच्ची फलियां खाएं तथा मटर की सब्जी बनाकर खानी चाहिए।

10. उड़द: उड़द की दाल में घी मिलाकर खाने से स्त्रियों के स्तनों में पर्याप्त मात्रा में दूध की वृद्धि होती है।

11. चना: लगभग 50-60 ग्राम काबुली चने रात को दूध में भिगो दें। सुबह के समय दूध को छानकर अलग कर लें। इसके बाद इन चनों को खूब चबा-चबाकर खायें। ऊपर से इसी दूध को गर्म करके पीने से स्त्रियों के दूध में पर्याप्त मात्रा में वृद्धि होती है।

12. मेहन्दी: स्तनों में दूध की कमी को दूर करने के लिए महुए के फूल का रस 4 चम्मच सुबह-शाम कुछ दिनों तक नियमित सेवन करने से लाभ मिलेगा।

13. मुलहठी: प्रसूता (शिशु को जन्म देने वाली महिला) के स्तनों में दूध नहीं आ पाता हो, तो मुलहठी बहुत ही गुणकारी है। गर्म दूध के साथ जीरा और मुलहठी का पाउडर बराबर मात्रा 1-1 चम्मच मिलाकर सुबह-शाम दूध से फंकी लेने से लाभ होता है।

14. केसर: पानी में केसर को घिसकर स्तनों पर लेप करने से स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

15. सेहुण्ड:

दूध के साथ शतावरी दस ग्राम चूर्ण की फंकी देने से स्त्री का दूध बढ़ता है।

शतावरी को गाय के दूध में पीसकर सेवन करने से स्त्री का दूध मीठा और पौष्टिक भी हो जाता है।

16. शतावर: शतावर की जड़ का चूर्ण समभाग (बराबर) मात्रा में मिश्री मिलाकर पीस लें। 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार एक कप दूध के साथ पिलाते रहने से न केवल मां के दूध में बढ़ोतरी होगी, बल्कि मासिकस्राव के पश्चात आई कमजोरी भी दूर होगी।

17. शहतूत: शहतूत प्रतिदिन खाने से दूध पिलाने वाली माताओं का दूध बढ़ता है। प्रोटीन और ग्लूकोज शहतूत में अच्छी मात्रा में मिलते हैं।

18. सोयाबीन: दूध पिलाने वाली स्त्री यदि सोया दूध (सोयाबीन का दूध) पीये तो शिशु को पिलाने के लिए दूध बढ़ जाती है।

19. अरबी:

अरबी की सब्जी खाने से दुग्धपान कराने वाली स्त्रियों का दूध बढ़ता है।

जच्चा महिलाएं अरबी की सब्जी खायें तो बच्चे को पिलाने के लिए दूध बढ़ जायेगा।

20 अरनी: छोटी अरनी का शाक बनाकर प्रसूता महिलाओं को खिलाने से उनके स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

सावधानी: दूध पिलाने वाली स्त्री को भूखा रहना, व्रत रहना उचित नहीं होता है। आहार में गेहूं, जौ, चावल, दूध, दलिया, तिल, लहसुन, मौसमी फल आदि का सेवन करने से स्तनों में दूध पर्याप्त मात्रा में होता है।

होमेओपेथी द्वारा

● स्तनों में दूध बढ़ाने के लिए - (कल्केरिया कार्ब 30 या 200 या लैक्चुआ विरोसा Q)

● स्तनों में दूध कम करने के लिए - (लैक वैफ डेफ 6 या 30)

● स्तनों का दूध बिलकुल बंद करने के लिए - (चियोनैनथस Q)

● स्तनों में दूध बिलकुल न हो तो दूध बढ़ाने के लिए - ( सैबाल सेरुलता Q)

● शिशु को दूध पिलाने वाली माताओं में दूध बढ़ाने के लिए - (रिसिनस कौम 6 या 30)

● स्तनों से जब दूध के साथ रक्त भी आये - (ब्यूफो 30)

● प्रसव के बाद स्तनों में दूध न आने पर - (सिकेल कोर 30 या 200)

● इस दवा को देने से दूध की मात्रा भी बढ़ती है और दूध सुपाच्य हो जाता है। (अलफाल्फा Q)

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सर्द मौसम के 10 रोग और 10 उपचार


ठंड के मौसम में अक्सर जो रोग होते हैं, उनसे हम छुटकारा पा सकते हैं। बशर्ते यह उपाय आजमाएं।

पाचन दोष के रोगियों को ठंड से कब्ज बढ़ जाने का खतरा रहता है। उन्हें ठंड में पानी खूब पीना चाहिए।

सर्दी में सिर दर्द की शिकायत रहती है, दूध में जायफल घिसकर माथे पर लेप करें, आराम मिलेगा।

सर्दी में अक्सर होंठ फटते हैं। कोकम का तेल लगाने से आराम मिलेगा।

बिवाइयां फट जाने पर प्याज का पेस्ट लगाने से आराम मिलेगा।

सर्दियों में प्रायः छाती में बलगम जमा हो जाता है, अंजीर का सेवन करने से बलगम निकलेगा तथा खांसी में राहत मिलेगी।

भोजन के पश्चात जीरा पावडर खाएं पाचन क्रिया ठीक रहेगी।

आजवाइन के चूर्ण का आधा चम्मच दिन में तीन बार खाने से ठंड से आया बुखार उतर जाता है।

सर्दियों में खांसी, बुखार, जुकाम में पुदीने के पत्तों की चाय, शकर या नमक मिलाकर पीने से लाभ होता है।

कफ जमा हो जाने से व दमा बढ़ने पर आजवायन छोटी पीपर, पोस्त दाना का काढ़ा बनाकर पीने से शीघ्र आराम मिलता है।

ठंड के मौसम में अक्सर जोड़ों के दर्द की शिकायत रहती है, धतुरे के पत्तों पर तेल लगाकर गर्म करके दर्द वाले स्थान पर बाँध देने से आराम मिलता है।

सर्दियों में सरसों के तेल में 3-4 लहसुन की कली डालकर पका लें और ठंडा होने पर इसमें मालिश करें तो बदन दर्द में आराम मिलता है।

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मशरूम के फायदे - benefits of mushrooms


1. प्रतिरक्षा प्रणाली बढा़ए
मशरूम में मौजूद एंटी ऑक्‍सीडेंट हमें भंयकर फ्री रेडिकल्‍स से बचाता है। इसको खाने से शरीर में एंटीवाइरल और अन्‍य प्रोटीन की मात्रा बढती है, जो कि कोशिकाओं को रिपेयर करता है। यह एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक है जो कि माइक्रोबियल और अन्‍य फंगल संक्रमण को ठीक करता है।

2. कैंसर में असरदार
मशरुम का सेवन करने से जैसी भयानक बीमारी से निजात पाई जा सकती हैं ।

3. अनेक बीमारियों में सहायक
मशरुम हमारे शरीर को कई रोगों से राहत दिलवाने में मददगार साबित हुआ हैं जैसे: हृदय, लिवर संबंधित बीमारियों से बचाने में मदद करता हैं ।

4. ब्लड प्रैशर होगा कंट्रोल
ब्लड प्रैशर जैसी बीमारी को भी कट्रोल करने में मदद करता हैं जो लोग की बीमारी से परेशान हैं उन्हें मशरुम का सेवन अवश्य करना चाहिए ।

5. मधुमेह
मशरूम वह सब कुछ देगा जो मधुमेह रोगी को चाहिये। इसमें विटामिन, मिनरल और फाइबर होता है। साथ ही इमसें फैट, कार्बोहाइड्रेट और शुगर भी नहीं होती, जो कि मधुमेह रोगी के लिये जानलेवा है। यह शरीर में इनसुलिन को बनाती है।

6. मोटापा कम करे
इसमें लीन प्रोटीन होता है जो कि वजन घटाने में बडा़ कारगर होता है। मोटापा कम करने वालों को प्रोटीन डाइट पर रहने को बोला जाता है, जिसमें मशरूम खाना अच्‍छा माना जाता है।

7. मैटाबॉलिज्‍म करे मजबूत
मशरूम में विटामिन ‘बी’ होता है जो कि भोजन को ग्‍लूकोज़ में बदल कर ऊर्जा पैदा करता है। विटामिन बी-2 और बी-3 भी मैटाबॉलिज्‍म को दुरुस्त रखते हैं। इसलिए मशरूम खाने से मैटाबॉलिज्‍म बेहतर बना रहता है।

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दाद खाज और खुजली का घरेलू उपाय


दाद खाज और खुजली आज के समय में बहुत आम बात होती जा रही है। ये समस्या कई बार पसीने की वजह से हो जाती है तो कई बार गीले कपड़े की वजह से हो जाती है। आज कल प्रदूषण की वजह से भी ये समस्या बहुत ज्यादा फैल रही है। बहुत जगह पर पानी शुद्ध ना होने की वजह से भी ये समस्या पैदा हो जाती है। सूरज से निकलने वाली पराबैगनी किरणों के कारण भी कई बार इस समस्या का सामना करना पड़ सकता है। कारण चाहे जो भी आज हम आप को एक ऐसा उपाय बताने जा रहे है जिससे इस समस्या का सामना किया जा सकता है।


अक्सर दाद खाज और खुजली होने पर हम बाजार से दवा लाकर लगाते है। जब तक दवा का असर रहता है तब तक आराम रहता। गेंदे के फूल से इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। गेंदे का फूल आप की इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है। गेंदा के फूल में एंटी एलर्जी और एंटी फंगल तत्व पाया जाता है। इसका असर इतना जबरदस्त होता है की कुछ ही दिनों में ये दाद खाज और खुजली को हमेशा के लिए ठीक कर सकता है।

गेंदे के फूल का चमत्कारी प्रभाव देखने के लिए आप को उसका रस निकाल कर प्रभावित स्थान पर लगाना होगा। इसे लगाने से अक्सर जलन नही होती है लेकिन अगर आप की बिमारी बहुत ज्यादा बढ़ गई हो तो थोड़ा बहुत जलन भी हो सकता है। इसके रस को कुछ दिनों तक लगाने से आप को दाद खाज और खुजली से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जायेगा। यदि आप किसी अन्य समस्या से परेशान है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में लिखे, आप की पूरी सहायता की जायेगी।
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पाए परफेक्ट शेप वो भी बिना जिम और डाइटिंग के


परफेक्ट बॉडी और शेप किसको अच्छा नही लगता है पर बिना जिम ये संभव नही है, और आज के इस बीजी समय में जिम जाने के लिए समय किसके पास है। सबको यही लगता है की बिना जिम ये संभव नही है है। आज हम आप को बताने जा रहे है की आप घर पर किस तरह अच्छी शेप बना सकते हा और वो भी बिना किसी साजो सामान के।

जो पोजीसन आप फोटो में देख रहे है इसे 5 मिनट करना है। इससे आप कंधो का शेप ठीक हो जाता है। इससे पेट की चर्बी कम होती है और पेट का शेप ठीक हो जाता है। इस पोज से शरीर के सामने का सभी भग शेप में आ जाता है चाहे वो महिला हो या पुरुष।

इस पोज में हाथों को क्रॉस कर ब्रेस्ट की सीध मैं रखना है। इसको लगभग 30 सेकेण्ड तक 8 बार करना है। इससे शोल्डर का शेप आता है और ब्रेट का शेप भी ठीक होता है। यदि आप किसी अनय समस्या से परेशान है तो आप हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करे आप की पूरी सहायता की जायेगी।

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