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भारत की आवाज

हमारा ब्लॉग आयुर्वेद से संबंधित है और हम हर प्रकार की बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक सलाह देते हैं| यदि आपको बीमारियों से संबंधित आयुर्वेदिक उपचार की आवश्यकता है तो आप हमारा ब्लॉक फॉलो कर सकते हैं|

योग करने का सही समय कब होता है?

1. सुबह का समय सबसे उपयुक्त होता है 2. खाना खाने के कुछ घंटे बाद ही योग अभ्यास करें 3. योग शुरू करने के पहले खुद को तनावमुक्त और मन को शांत कर लें 4. चुने हुए समय पर ही नियम से योग करें 5. शरीर में आए बदलाव को अनुभव करने के लिए नियमित रूप से योग करें 6. योग का अभ्यास ज़्यादा न करें

क्यां होतां है साइटिका रोग कैसे कर सकते है हम इस रोग को जड़ से समाप्त


कमर से शुरु होकर पिछे की तरफ से पुरे पैर मे लंभी नस होती है जिसको साइटिक वेइन कहते है | जो की बेक साइड मे होती है उसमे कीसी भी प्रकार के खिंचाव वातवृद्धी या डेमेज के कारन पूरी नस मे दर्द होतां है जिसे हम आैर आप साइटीका (ग्रधसी) रोग से भी जानते है | यह रोग के बारे मे अगर देखा जाये तो यह रोग ज्यादातर महिलामे देखा जातां है तरहा तरहां के इलाज वं ऐलोपैथी आधुनिक दवाइयां सालो खाने के बावजूद भी यह रोग ठिक नही हो पातां है | जबकी आयुर्वेद थेरापी वं नेचरोपैथी मे इसका सटिक इलाज बतायां गयां है |*

*आयुर्वेदानुसार साइटिका रोग वातव्याधि है जो वात दूषित होने के कारन होने वाला रोग है आैर रोग की शरुआत यहां से होती है जबकी हमारे शरीरका अग्नी मंद हो मतलब की मंदाग्नी के कारन हमारा पाचन बिगड जातां है जिसके कारन हमे भयंकर कब्ज रहती है आैर आंतो मे पुरानां मल सडतां है आैर इससे वात उतपन्न होतां है | यह वात दूषित होकर साइटिक नामक नाडी मे प्रवेश करतां है आैर असह्य दर्द देतां है | जबकी आयुर्वेदिक शास्ञ वं ग्रंथो मे कुछ ही महिनो मे इस रोग से जड़ से निजात पा सकते है | आइये जानते है साइटिका को जड़ से समापेत करने वाली आयुर्वेदिक चिकित्सा के बारे मे |*

 *संजीवनी साइटिका स्पेशियल आैषधिय योग*
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*सिंहनाद गुगुल        40 ग्राम*
*ञिफला गुगुल        40 ग्राम*
*पुनर्नवां मंडुर.         20 ग्राम*
*महायोगराज गुगुल  20 ग्राम*
*निर्गुडी                   50 ग्राम*
*सौंठ.                      20 ग्राम*
*शुद्ध भल्लांतक      05 ग्राम*
*सहिंजन के पत्ते      30 ग्राम*
*सूतशेखर रस.       40 ग्राम*
*गोखरु कांटा         30 ग्राम*

सभी द्वव्यो को कुटकर मिला दिजिए | आैर सुबह शाम 4-4 ग्राम की माञामे सेवन करीए | जो लोगो पाउडर नही खानां चाहते उनके लिए अलग पैकेज भी उपलब्ध है ||

मानसून में इनके सेवन से करें परहेज



इसमें कोई शक नहीं है कि चिलचिलाती गर्मी में बारिश की बूंदें काफी राहत देती हैं !
लेकिन बारिश के मौसम में अगर खाने को लेकर परहेज नहीं किया जाए - तो इससे सेहत से जुड़ी बहुत सारी समस्याएं भी पैदा हो सकती है !
इस मौसम कुछ गलत खाना खाने से पेट खराब हो जाता है - जिस वजह से काफी परेशानी होती है !

 मानसून में कौन सी चीजों का सेवन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है ...?

* बारिश के मौसम में हमारी पाचन क्रिया काफी कमजोर हो जाती है - इसलिए ज्यादा भारी भोजन पचने में मुश्किल होती है !
ऐसे में इस मौसम में आलू - अरबी - भिंडी - फूलगोभी और मटर जैसी सब्जियों के सेवन से बचना चाहिए !

* लोग अक्सर अपने घर में पत्तागोभी और पालक की सब्जी बनाते हैं !

पर क्या आपको पता है कि बरसात के मौसम में इन सब्जियों में छोटे-छोटे कीड़े होते हैं !
जिससे इनका सेवन करने से पेट खराब हो सकता है !
इसलिए इस मौसम में इन सब्जियों से परहेज करें !

* बरसात के मौसम में मशरूम के सेवन से भी परहेज करना चाहिए !
क्योंकि इसे खाने से इंफेक्शन होने का खतरा बना रहता है !

* खीरा हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है !
खासकर गर्मियों के मौसम में लोग खीरे को सलाद के रूप में खाते है !
लेकिन इस मौसम में किसी भी सब्जी को कच्चा खाना सेहत के लिए नुकसान दायक साबित हो सकता है !
क्योंकि इनमें भी कीड़े होने का खतरा रहता है !

* इस मौसम में अक्सर लोगों को चटपटा और तीखा खाने का शौक बढ़ जाता है !
और भूख मिटाने के चक्कर में सड़कों पर बिक रही फ्रूट चाट या फिर बाहर का खाना खाने पर जोर देते हैं !
ऐसा करना आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है !
बारिश के मौसम में कभी भी खुले में रखे फल या किसी अन्य खाने की चीजें आपके सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है !

पाचन तंत्र को जल्दी ठीक करने के उपाय


1. अधिक मात्रा में पानी पीये
 हमारे लिए पानी बहुमूल्य है. अधिकतर लोग बहुत कम पानी पीते है. हमें एक दिन में लगभग 2 लीटर पानी पीना चाहिए. अगर आपका पाचन तन्त्र ठीक नहीं है तो आप इसे अधिक पानी भी पी सकते है. यह हमारे शरीर में पानी की मात्रा को पूरा करता है जिससे भोजन को पचने में आसानी होती है. इसलिए पानी पीये और भरपूर पीये.

*2. अपनी दिनचर्या सही रखे –*
मनुष्य के लिए एक अच्छी दिनचर्या का होना बहुत आवश्यक है. अगर आपकी दिनचर्या संतुलित नहीं है तो आपको दिनभर कई छोटी – छोटी समस्याओ का सामना करना पड़ेगा. पाचनतंत्र को आप बेहतर दिनचर्या से दूर कर सकते हो. सुबह से लेकर रात सोने तक अपनी दिनचर्या सही रखे. सही समय पर अपना भोजन ले.
अगर आपका daily routine ठीक होगा तो आपका शरीर भी उसी अनुसार चलता रहेगा. जिससे पाचन तन्त्र भी दुरुस्त हो जाएगी.

*3. रात को जल्दी सो जाए-*
कई लोग काम के चलते और कई अपनी बुरी दिनचर्या (Dincharya) के कारण देर रात जगे रहते है. वे जल्दी सोते नहीं और सुबह लेट में उठते है. देर रात तक जगे रहने से पाचन तन्त्र पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. इसलिए रात को भोजन करने के बाद सो जाए. अगर देर रात तक जगे रहोगे तो आपका पाचन तंत्र का ख़राब होना तय है. इससे बचने का उपाय है की रात को देर से सोने की आदत को बदला जाए.

*4.अच्छी नींद ले*
– नींद का हमारे शरीर से गहरा नाता है. जिस तरह हमारे लिए भोजन करना जरुरी है ठीक उसी तरह हमारे लिए नींद भी जरुरी है. बिना अच्छी नींद के अच्छे स्वास्थ्य की कल्पना करना भी मुश्किल है. कई लोग खुद को ओवर स्मार्ट समझते है और सोचते है की कम नींद लेने पर भी वे खुद को फिट रख सकते है. आप कुछ दिन तक तो ऐसा कर सकते हो पर long time में आपकी helth ख़राब हो ही जाएगी. एक दिन में इसलिए 8 से 9 घंटे की अच्छी नींद जरुर ले.

*5. तनाव को करे दूर –*
तनाव आज लोगो का बहुत बड़ा दुश्मन बन गया है. तनाव आदमी को अन्दर ही अन्दर दीमक की तरह खोखला कर देता है. जिससे व्यक्ति कई रोगों से घिर जाता है. अधिक तनाव लेने से पाचन तन्त्र ख़राब हो जाता है. इसलिए तनाव को अपनी लाइफ से दूर करे.

*6. फास्ट फ़ूड को कहे अलविदा*–
स्वाद हर कोई लेना चाहता है. इस स्वाद के चक्कर में हम लोग फास्ट फ़ूड खाने लगते है. किसी को यह कम पसंद होता है तो किसी को ज्यादा. जिसको यह ज्यादा पसंद होता है वह ख़राब पाचन तन्त्र का शिकार बन जाता है. महीने में कभी – कभी तो फ़ास्ट फ़ूड (fast food) चल सकता है.

लेकिन अगर आप रोजाना फ़ास्ट फ़ूड लेते हो तो इसका नेगेटिव इफ़ेक्ट आपको दिखने लग जायेगा. इसका सेवन बहुत कम मात्रा में ले और इसकी जगह helthi food ले.

*7. शारारिक कार्य जरुर करे –* अधिकतर पाचन तन्त्र ख़राब उन्ही लोगो का होता है जो शारारिक काम नहीं करते है. ऐसे बहुत से लोग होते है जिनका काम शारारिक नहीं होता. ऐसे लोग अपनी दिनचर्या में कुछ शारारिक काम कर सकते है. अगर काम नहीं है तो वे सुबह उठकर टहल सकते है. पैदल घूम सकते है या दौड़ लगा सकते है. इसके अलावा कोई
स्पोर्ट्स या साइकिलिंग कर सकते है.

*8. सही समय पर रोजाना भोजन करे –*
सही समय पर भोजन करना अच्छी सेहत की निशानी होती है. ब्रेकफास्ट से लेकर डिनर तक आपका खाना खाने का time निश्चित होना चाहिए. हमारा शरीर हमारे डेली रूटीन के हिसाब से खुद को ढाल लेता है. अगर हम कभी 1 घंटे पहले कभी एक घंटे बाद खाना खाये तो हमारा भोजन रोज अनियमित हो जाएगा.
जो हमारे पाचन तन्त्र को गड़बड़ा देता है. माना आप सुबह 8 बजे अपना Breakfast लेते हो तो रोज उसी time पर ले. ऐसा हो Lunch और dinner पर भी करे.

9. खाने – पीने में कमी न करे – यह बहुत लोगो की problem होती है की जब उनको तेज भूख लगती है तब वे कुछ नहीं खाते और जब भूख न हो तब पेट में कुछ न कुछ ठुसते रहते है. जो गलत है, अगर आप खाने – पीने में कमी करोगे तो आपकी सेहत बनना मुश्किल है. जब भी आपको भूख लगती है तब खुद को न रोके. उस समय कुछ खा लें. भूख के समय शरीर को भोजन दो तो पाचन तन्त्र भी अच्छा बना रहेगा.

*10. शराब और सिगरेट से दूर रहे-*
शराब और सिगरेट हमारे Helth के लिए ठीक नहीं होते यह शायद आपको बताने की जरुरत नहीं है. यह आप जानते हो फिर भी जानने के बावजूद लोग इसका सेवन करते रहते है. इनका लगातार सेवन करते रहने से हमारा पाचन तन्त्र ख़राब हो जाता है और कई बीमारियाँ भी घेर देती है. इसके अलावा चाय और कॉफ़ी से भी दूरी बनाये रखे.

*11. अधिक खाना खाने से बचे –*
आवश्यकता से अधिक भोजन लेना हमारे स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता. अधिक खाने से हमें अपच हो सकती है. जितनी भूख हो हमें उतना ही खाना चहिये. कई बार लोग स्वाद के चक्कर में अधिक खाना खा लेते है और बाद में उन्हें पछताना पड़ता है. आप ऐसा न करे. खाने से ज्यादा प्राथमिकता अपने शरीर को दे. अधिक खाना लेने से हमारे पाचन तन्त्र पर अधिक दबाव पड़ता है जो की उचित नहीं है. ऐसा करने से इसलिए बचे.

*12. हमेशा बैठे – बैठे काम न करे-*
अगर आपका काम ऑफिस का है, आपको कंप्यूटर के आगे या कुर्सी पर बैठकर काम करना पड़ता है तो आप बीच – बीच में ब्रेक लेते रहे. अगर आपको लगातार काम करना होता है तो हर दो घंटे में कुछ मिनट निकाल कर थोड़ा टहल ले. बैठे रहने से हमारा भोजन पच नहीं पाता फलस्वरूप हमारे पाचन तन्त्र के लिए इसे
हैंडल कर पाना मुश्किल हो जाता है.

*13. ऑयली खाने से परहेज करे*–  – ज्यो हमारी उम्र बढती जाती है.. हमारे लिए ऑयली खाने को पचा पाना मुश्किल होने लग जाता है. अगर हम Oily  खाना ज्यादा खा लेते है तो इससे हमें उल्टी, अपच और खट्टी डकारे हो सकती है. इनसे बचने के लिए जरुरी है कि इन चीजो को बहुत ही कम मात्रा में खायें. ऑयली खाना पचा पाना थोड़ा मुश्किल रहता है. इसलिए अपने पाचन तंत्र की मदद करे और तैलीय खाना कम ही खाएं.

*14. वसायुक्त भोजन लेने से बचे*– उन चीजो को लेने से बचे जिनमे बहुत ज्यादा Fat होता है. वसा युक्त पदार्थ हमारे पाचन क्रिया को Slow कर देता है. अगर पाचन तंत्र स्लो रहेगा तो भोजन पचने में भी समय लगेगा. जितना हो सके बेहतर पाचन तन्त्र के लिए वसायुक्त भोजन कम ही ले.

*15. रोजाना व्यायाम करे* – व्यायाम करना हमारी body के लिए बहुत लाभदायक होता है. रोजाना Exercise को अपनी दिनचर्या में शामिल करे. डेली एक्सरसाइज करने से हमें खाना बेहतर रूप से पचता है. इसके अलावा यह हमारे वजन का सही स्तर बनाये रखता है जो हमारे digestive health के लिए अच्छा है. इसलिए रोजाना एक्सरसाइज करे और एक अच्छी सेहत बनाये.

*पाचन शक्ति बढ़ाने के लिए इन चीजो का सेवन*

*इलायची का सेवन*- इलायची का सेवन एक गर्भवती महिला के लिए बहुत लाभकारी होता है. यह गर्भवती स्त्री के पाचन सम्बन्धी परेशानियों को दूर करता है. आप इलायची को चाय के साथ के सकते है

*निम्बू ले*– नींबू हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होता है. इसका सेवन करते रहने से यह हमारे पेट की कई समस्याएँ दूर कर देता है. नींबू हमारी बदहजमी और पेट की गैस को दूर करता है. यह हमारे पाचन शक्ति के लिए भी लाभकारी होता है.

*सलाद का सेवन करे*- खाने में अगर सलाद हो तो खाने का मजा दोगुना बढ़ जाता है. सलाद अच्छे खाने के साथ – साथ हमारे हेल्थ के लिए भी अच्छा है. खाने को अगर अच्छी तरह पचाना है तो खाने के साथ सलाद भी ले. जिसमे आप नींबू, टमाटर और प्याज ले सकते है.

*अमरुद खाएं* – अमरुद एक बहुत ही उपयोगी फल है जो पौष्टिक होता है. अमरुद में विटामिन सी, फास्फोरस और पौटेशियम पाया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है. अमरुद के सेवन करते रहने से मस्तिष्क, ह्रदय और पाचन शक्ति मजबूत बनती है.

*सौंफ का प्रयोग करे* – एसिडिटी को दूर करने के लिए, सीने की जलन कम करने के लिए और खाना अच्छी तरह पचाने के लिए आप सौफ ले सकते है. रोजाना एक एक चम्मच सौंफ लेने से पाचन क्रिया सही बनी रहती है.

*एलोवेरा ले*- पाचन क्रिया को मजबूत बनाने के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल करे. एलोवेरा हमारी पाचन सम्बन्धी रोगों को दूर करता है जिसमे सुजन और पेट का अल्सर शामिल है.पानी के साथ आप एलोवेरा जेल का इस्तेमाल कर सकते हो.

*हल्दी का प्रयोग करे –* हल्दी हमारे शरीर के अपच, अल्सर,पित्त निकालने और पाचन से सम्बन्धित अन्य समस्याओ को दूर करता है. पाचन सम्बन्धी समस्याएँ दूर करने के लिए एक ग्लास पानी के साथ हल्दी लेते रहे.

*आंवले लेते रहे–*
आंवला हमारे शरीर में विटामिन सी की कमी को दूर करता है. आवले का लगातार सेवन करते रहने से यह हमारे पाचन तन्त्र को ख़राब होने से बचाता है. आंवले को पिस करके उसमे काली मिर्च, हींग और जीरा मिला कर भी आप ले सकते है.

*पपीता का सेवन-*
कच्चा पपीता सेहत के लिए बहुत अच्छा है. आंत की कमजोरी के कारण शरीर में विटामिन्स का संचय नहीं होता है तो हम पपीते के सेवन से विटामिन सी प्राप्त कर सकते हैं. इसमें पपाइन होता है जो कि प्रोटीन को विभाजित करता है और खाने को पाचन योग्य बनाता है और पाचन क्रिया को प्रबल बनाता हैं.

*केला खाएं –* केला हर मौसम और हर सीजन में मिल जाता है. यह हमारे पेट के लिए बहुत better है. सस्ता होने के साथ – साथ यह हमारे पाचन शक्ति को भी बढाता है. इसलिए केला खाएं और अपनी सेहत बनाये.

इसके अलावा भी आप अपने भोजन में मूंग, अंकुरित चना, गेहूं और जौ की रोटियां शामिल करे और इन फलों को आम, अनार, अंजीर, अमरूद और संतरे को लेते रहे. ये फल आपके पेट को साफ़ रखेंगे जिससे आपका पाचन तन्त्र मजबूत बनेगा.


*पाचन शक्ति को दुरुस्त करने के अन्य घरेलू नुस्खे* –

* अपने भोजन को हमेशा चबा – चबा कर खाएं जिससे भोजन अच्छी तरह पचे.

* दही का सेवन हमारे पाचन के लिए अच्छा होता है. खाने में दही शामिल करे.

* मीठे अनार का रस मुँह में लेने से आंत दोष ठीक होता है और पाचन शक्ति बढती है.

* अजवाइन को पानी में उबाल कर पीने से भी पाचन तंत्र सही रहता है.

* रोजाना 3 ग्राम काली राई लेने से कब्ज वाली बदहजमी दूर हो जाती है.

* अनानास का रस हमारे पाचन के लिए लाभदायी होता है.

* अमरूद के पत्तों में शक्कर मिलाकर सेवन करने से बदहजमी दूर हो जाती है.

* हरड़ का मुरब्बा भी हमारे पाचन के लिए अच्छा होता है.

* नींबू पर काला नमक लगाकर चाटते रहे इससे बदहजमी दूर हो जाएगी.

* हींग का उपयोग करे.. इसका प्रयोग बदहजमी और गैस को दूर करने के लिए किया जाता है.

लूस मोशन (दस्त) को रोकने के घरेलू उपाय


1. सेब का सिरका लूज मोशन को रोकने के लिए एक अच्छा घरेलू उपाय है। यह पेक्टिन का एक अच्छा स्रोत है और उत्तेजित पेट को शांत करने में मदद करता है। यह बैक्टीरिया से लड़ता है जो लूज मोशन का कारण बनते हैं। एक गिलास पानी में सेब साइडर सिरका के एक चम्मच को मिलाएं और हर भोजन के बाद इसे पीएं। 

2. पेट दर्द में दही का इस्तेमाल काफी लाभकारी रहता है। दही में मौजूद बैक्टीरिया संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दही प्रोबायोटिक्स का एक अच्छा स्रोत है। यह एक तरह का अच्छा बैक्टीरिया है, जो सामान्य रूप से आपके पाचन तंत्र में पाए जाने वाले स्वस्थ जीवाणुओं के समान होती हैं। 

3. यदि आप बार-बार हो रहे मोशन से परेशान हो चुके हैं, तो केले का इस्तेमाल आपको आराम देगा। कच्चा और पका हुआ केला दोनों आपके पेक्टिन गुण के कारण लूज मोशन का इलाज करने में सहायता कर सकते हैं। यह घुलनशील फाइबर आंतों में तरल पदार्थ को अवशोषित करने में मदद करता है और लूज मोशन की समस्या को दूर कर सकता है।

कैंसर रोगी ध्यान दे



कैंसर शब्द ऐसे रोगों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जिसमें असामान्य कोशिकाएं बिना किसी नियंत्रण के विभाजित होती हैं और वे अन्य ऊतकों पर आक्रमण करने में सक्षम होती हैं। कैंसर की कोशिकाओं रक्त और लसीका प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं।

 *कैंसर के मुख्य श्रेणियां -*

 *कार्सिनोमा* : ऐसा कैंसर जो कि त्वचा में या उन ऊतकों में उत्पन्न होता है, जो आंतरिक अंगों के स्तर या आवरण बनाते हैं।
 *सारकोमा* : ऐसा कैंसर जो कि हड्डी, उपास्थि, वसा, मांसपेशियों, रक्त वाहिकाओं या अन्य संयोजी ऊतक या सहायक में शुरू होता है।
 *ल्युकेमिया* : कैंसर जो कि रक्त बनाने वाले अस्थि मज्जा जैसे ऊतकों में शुरू होता है और असामान्य रक्त कोशिकाओं की भारी मात्रा में उत्पादन और रक्त में प्रवेश का कारण बनता है।
 *लिंफोमा और माएलोमा* : ऐसा कैंसर जो कि प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं में शुरू होता है।
 *केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र के कैंसर:* कैंसर जो कि मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के ऊतकों में शुरू होता हैं।

              *कैंसर की उत्पत्ति -*

सभी प्रकार के कैंसर कोशिकाओं में शुरू होते है, जो शरीर में जीवन की बुनियादी इकाई होती हैं। कैंसर को समझने के लिए, यह पता लगाना उपयोगी है कि सामान्य कोशिकाओं के कैंसर कोशिकाओं में परिणत होने पर क्या होता है।

शरीर कई प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ये कोशिकाओं वृद्धि करती हैं और नियंत्रित रूप से विभाजित होती हैं। कोशिकाएं जब पुरानी या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो वे मर जाती हैं और उनके स्थान पर नई कोशिकाएं आ जाती हैं।

हालांकि कभी कभी यह व्यवस्थित प्रक्रिया गलत हो जाती है। जब किसी सेल की आनुवंशिक सामग्री (डीएनए) क्षतिग्रस्त हो जाती है या वे बदल जाती हैं, तो उससे उत्परिवर्तन (म्युटेशन) पैदा होता है, जो कि सामान्य कोशिकाओं के विकास और विभाजन को प्रभावित करता है। जब ऐसा होता है, तब कोशिकाएं मरती नहीं, और उसकी बजाए नई कोशिकाएं पैदा होती हैं, जिसकी शरीर को जरूरत नहीं होती। ये अतिरिक्त कोशिकाएं बड़े पैमाने पर ऊतक रूप ग्रहण कर सकती हैं, जो ट्यूमर कहलाता है। हालांकि सभी ट्यूमर कैंसर नहीं होते, ट्यूमर सौम्य या घातक हो सकता हैं।

 *सौम्य ट्यूमर:* ये कैंसर वाले ट्यूमर नहीं होते। अक्सर शरीर से हटाये जा सकते है और ज्यादातर मामलों में, वे फिर वापस नहीं आते। सौम्य ट्यूमर में कोशिकाएं शरीर के अन्य भागों में नहीं फैलते।
 *घातक ट्यूमर:* ये कैंसर वाले ट्यूमर होते हैं, और इन ट्यूमर की कोशिकाएं आसपास के ऊतकों पर आक्रमण कर सकती हैं तथा शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं। कैंसर के शरीर के एक भाग से दूसरे फेलने के प्रसार को मेटास्टेसिस कहा जाता है।
 *ल्युकेमिया* : यह अस्थिमज्जा और रक्त का कैंसर है इसमें ट्यूमर नहीं।

           *कैंसर के कुछ लक्षण -*

स्तन या शरीर के किसी अन्य भाग में कड़ापन या गांठ।
एक नया तिल या मौजूदा तिल में परिवर्तन।
कोई ख़राश जो ठीक नहीं हो पाती।
स्वर बैठना या खाँसी ना हटना।
आंत्र या मूत्राशय की आदतों में परिवर्तन।
खाने के बाद असुविधा महसूस करना।
निगलने के समय कठिनाई होना।
वजन में बिना किसी कारण के वृद्धि या कमी।
असामान्य रक्तस्राव या डिस्चार्ज।
कमजोर लगना या बहुत थकावट महसूस करना।

सफेद दाग का 100% आयुर्वेदिक इलाज



सफेद दाग क्या है

इस रोग में त्वचा का प्राकृतिक रंग बदल जाता है और वहां सफेदी आ जाती है। सफेदी के कारण इसे शिवत्र भी कहते हैं। इस रोग को हिन्दी में ‘श्वेत कुष्ठ’ अथवा ‘सफेद कोढ़’ के नामों से भी जाना जाता है, परंतु कुछ चिकित्सक इसे ‘कोढ़” न मानकर एक अलग ही रोग मानते हैं। शरीर के किसी भी हिस्से पर त्वचा का रंग में बदलाव होकर धीरे-धीरे यह रोग फैलता जाता है और एक समय ऐसा आता है, जब लगभग सारा शरीर ही सफेद हो जाता है। शरीर के विभिन्न भागों (चेहरा, होंठ, टांग, हाथ) पर पहले छोटे-छोटे सफेद दाग या सफेद चकत्ते पड़ जाते हैं, परंतु बाद में वे धीरे-धीरे फैलते जाते हैं | यह रोग संक्रामक नहीं होता और न ही इसके होने पर दर्द होता है। मेडिकल टर्म में इस समस्या को vitiligo के नाम से जाना जाता है | दरअसल त्वचा के बाहरी स्तर में मेलेनिन नामक रंजक द्रव्य रहता है, जो त्वचा को प्राकृतिक रंग देता है। विभिन्न कारणों से इसके ठीक से काम न करने से सफेद दाग उत्पन्न होते है |

ये सफेद दाग कभी-कभी तो अपने आकार में सिमटकर ही रह जाते हैं और कभी-कभी शरीर पर अत्यधिक फैल जाते हैं।
यदि त्वचा पर हल्के सफेद दाग और दाग छोटे, कम हों तो चिकित्सा के लायक समझा जाता है |

सफेद दाग कोई ऐसा रोग नहीं जो एक से दूसरे को लग जाए। पीड़ित रोगी की संतान भी सफेद दाग से ग्रस्त हो, ऐसा जरुरी नहीं होता। इस बीमारी को छिपाने की जरूरत नहीं है। सफेद दाग का सफल इलाज लगभग सभी चिकित्सा प्रणालियों में है मगर ये इस पर निर्भर करता है की बीमारी की तीव्रता क्या है कौन सी स्टेज है और रोग को कितना समय हुआ है | सबसे ज्यादा समय की भूमिका ज्यादा खास होती है जितना जल्दी आप इसका इलाज करवाएंगे इसके ठीक होने की उतनी ही ज्यादा संभावना होगी |

 सफेद दाग की विकृति कुष्ठ की तरह हानिकारक नहीं होती है। चिकित्सा करने पर सफेद दागों को आसानी से ठीक किया जा सकता है। कुछ रोगियों के सफेद दाग पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं और कुछ रोगियों के चेहरे और शरीर के विभिन्न अंगों में हल्के दाग रह जाते है

                  सफेद दाग होने के कारण

श्वेत कुष्ठ की उत्पति प्रकृति विरुद्ध खाना खाने से , खाने में अनियमितता, बासी, दूषित सड़े-गले मांस के खाने से होती है।
सफेद दाग होने के अन्य कारणों में जब कोई व्यक्ति मछली और दूध, नीबू का रस व घी, घी और दही आदि
प्रकृति विरुद्ध खाद्य-पदार्थों का निरंतर सेवन करता है तो रक्त दूषित होने से श्वेत कुष्ठ पैदा होता है।
आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार सफेद दाग होने का प्रमुख कारण त्वचा में स्थित मेलोनिक नामक रंगीन पदार्थ का निर्माण करने वाली पेशियां किसी कारण से कमजोर हो जाती हैं तो त्वचा पर सफेद दाग बनने लगते हैं।
श्वेत कुष्ठ कोई प्राणघातक रोग नहीं, लेकिन इन सफेद दागों से चेहरे की सुंदरता नष्ट हो जाने के कारण सभी इस रोग से भयभीत रहते हैं।
वैसे ज्यादातर विशेषज्ञों का मत यह है की सफेद दाग होने के प्रमुख कारणों में त्वचा में मेलानोसाइट्स सेल्स द्वारा उत्पादित मेलेनिन की कमी ही होता है
 फंगल संक्रमण से भी सफेद दाग होने का कारण होता है
खाने में तांबा तत्व की कमी होना |
त्वचा के जल जाने से अंदुरुनी परत का खराब हो जाना |
पैतृक या वंशानुगत होना, रजस्वला, विरुद्ध (बेमेल) भोजन करना, भोजन पचे बिना दूसरा भोजन करना, गरिष्ठ पदार्थों का सेवन, पुराना कब्ज, पाचन शक्ति का कमजोर होना भी सफेद दाग होने के कारणों में आता है |
अत्यधिक मानसिक चिंता, क्रोनिक या पेट में ज्यादा गैस्ट्रिक विकार होने से |
आहार नलिका में इन्फेक्शन,टाइफाइड |
लीवर और थायराइड की गड़बड़ी से भी सफेद दाग की बीमारी हो सकती है। दरअसल थायरॉयड की वजह से भी स्किन से नेचुरल तेल निकलने की कमी से त्वचा ड्राई लगने लगती है। और आगे चलकर वो सफ़ेद दाग होने का कारण बन जाती है |
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) उलटा असर, मतलब जब शरीर का इम्यूनिटी सिस्टम ठीक से काम ना करें |
एन्टीबायोटिक तथा तेज औषधियों की भारी खुराक से भी सफेद दाग का रोग हो सकता है।

                    सफेद दाग के लक्षण

इस रोग के लक्षणों में शुरू में हाथों, कोहनी, चेहरे, टखने, पैर, कमर आदि स्थानों पर सफेद दाग उभर कर धीरे-धीरे सारे शरीर में फैलते हैं तथा इन दागों में कोई पीड़ा नहीं होती है।
 या अन्य मांसाहार, शराब, तंबाकू से परहेज करें।
लौकी को उबालकर इसका पानी पियें |
आलू, उड़द, गन्ना, प्याज, मक्खन, दूध, जामुन, मिठाई, केला न खाएं।
दूध और मछली या दूध और मांस एक साथ सेवन न करें। इन चीजो का सफेद दाग में विशेष तौर पर परहेज रखें
दूध से बनी चीजों का सेवन कम कर दें, मिठाई, रबडी, दही का एक साथ खाने में शामिल न करें।
तिल, गुड़ और दूध भी एक साथ सेवन न करें।
खट्टी चीजें जैस इमली, खटाई, नीबू, संतरा, आम, अंगूर, टमाटर, आंवला, अमरुद, आलूबुखारा, अचार, दही, लस्सी, मिर्च, मैदा, उड़द दाल न खाएं। इन चीजो का सफेद दाग में परहेज रखें |

कैंसर रोगी ध्यान दे


कैंसर एक किस्म की बीमारी नहीं होती, बल्कि यह कई रूप में होता है। कैंसर के 100 से अधिक प्रकार होते हैं। अधिकतर कैंसरों के नाम उस अंग या कोशिकाओं के नाम पर रखे जाते हैं जिनमें वे शुरू होते हैं- उदाहरण के लिए, बृहदान्त्र में शुरू होने वाला कैंसर पेट का कैंसर कहा जाता है, कैंसर जो कि त्वचा की बेसल कोशिकाओं में शुरू होता है बेसल सेल कार्सिनोमा कहा जाता है।
               
कैंसर शब्द ऐसे रोगों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जिसमें असामान्य कोशिकाएं बिना किसी नियंत्रण के विभाजित होती हैं और वे अन्य ऊतकों पर आक्रमण करने में सक्षम होती हैं। कैंसर की कोशिकाओं रक्त और लसीका प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में फैल सकती हैं।
                     
मित्रो कैंसर हमारे देश मे बहुत तेज़ी से बड़ रहा है । हर साल बीस लाख लोग कैंसर से मर रहे है और हर साल नए Cases आ रहे है । और सभी डॉक्टर्स हाथ-पैर डाल चुके है ।

            कैंसर में क्या खाएं

1. हरी सब्जियां खाएं :– कैंसर रोग में हरी सब्जियां जैसे फूलगोभी,पत्तागाोभी और ब्रोकली , पालक, मेथी आदि को सेवन में सामिल करना चहिये क्यूंकि ये हरी सब्जियां डिटोक्सीफिकेशन एंजाइम के उत्पादन को बढ़ाते हैं, जो कैंसर की कोशिकाओं को मारते हैं।

2. ताजे फल खाएं :- कैंसर रोग में ताजे फल जैसे अंगूर , पपीता , तरबूज , अमरुद आदि का सेवन करना चहिये क्यूंकि ये फल कैंसर को होने से रोकते हैं।

3. ताजा रस पियें :- सुबह-सुबह प्रतिदिन नीबू , संतरा , मौसमी का जूस पीना चहिये ये भी कैंसर के खतरे को टालते हैं।

4. ड्राई फ्रूट्स खाएं :- ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम, किसमिस, छुआरे, मुनक्का आदि का सेवन करना चहीये ये सभी कैंसर के फैलाब को रोकते हैं।

5. लहसुन के सेवन करें :- कैंसर रोग में रोगी का लहसुन का सेवन करना चहिये ये कैंसर रोग के खत्म होने की क्षमता रखता है क्यूंकि ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखता है।

6. गो मूत्र पिए :- कैंसर रोग में गौ मूत्र और ज्वारे का रस पीना चहिये क्यूंकि ये कैंसर को खत्म करते।

7. ग्रीन टी पिए :- ग्रीन टी पीने से भी ब्रैस्ट कैंसर से छुटकारा मिलता है।

8. प्रोटीन का सेवन :- कैंसर रोग में प्रोटीन का अधिक सेवन करना चहिये प्रोटीन के स्रोत्र जैसे चना, मटर, मूंग, मसूर, उड़द, सोयाबीन, राजमा, लोभिया, गेहूँ, मक्का प्रमुख हैं।

           कैंसर में क्या नही खाएं

1. नशीले पदार्थ :- नशीले पदार्थ जैसे तम्बाकू, कुबेर, गुटका, सिगरेट बिंडी, इत्यादि का सेवन न करें। क्यूंकि ये सभी कैंसर को बढ़ावा देते हैं।

2. कैलोरी वाला भोजन :- ज्यादा केलोरी वाले का खाने का सेवन जितना हो सकें उतना ही कम करें। क्यूंकि कैंसर रोग में जादा कैलोरी का सेवन परेशानी बढ़ा सकता है।

3. स्वादनुसार नमक :- कभी भी खाना पकने के बाद ऊस पर ऊपर से नमक नहीं डालना चहिये खाना बनते समय ही नमक डालना चहिये केवल स्वादनुसार ही नमक खाना चहिये।

4. मॉस का सेवन न करें :- ज़्यादा चर्बी वाला भोजन न करें। माँस, तला भुना खाना आदि को अपने सेवन में सामिल न करें क्यूंकि ये आसानी से पचते नहीं हैं।

5. मीठे पदार्थ का सेवन :- कैंसर रोग में मीठे पदार्थों का सेवन नहीं करना चहिये क्यूंकि ये परेशानी बढ़ा सकते हैं।

6. सैचुरेटिड फूड्स न खाएं :- कैंसर होने पर सैचुरेटिड फूड्स बहुत हाई एमाउंट में नहीं खाने चाहिए अगर आप खाना चाहते हैं तो कम मात्रा में खाएं।

           कैंसर से बचने के उपाय

1. तली हुई चीजो का सेवन न करें :- ज्यादा से ज्यादा तली हुई चीजो का सेवन न करें और खाने में डालडा घी की जगह सुद्ध देशी तेल जैसे सरसों ,नारियल ,मूँगफली का सेवन करें।

2. जाँच कराएँ :- जब भी आपको लक्षण को देखकर लगे की ये कैंसर के लक्षण है तो समय पर जाँच करा लेनी चहिये।

3. योन सम्बन्ध :- ज्यादा लोगों से योन सम्बन्ध नहीं बनाने चहिये अगर किसी को कैंसर है।

4. पैन किलर दवा :- पैन किलर या दर्द निवारक दवा का सेवन बहुत कम मात्रा में करना चहिये या फिर इनकी आदत छोडनी चहिये।

5. योगासन करें :- सुबह-सुबह जग कर योग करने चहिये घूमना चहिये इनसे व्यक्ति बीमारियों से दूर रहता है।

6. वेग न रोकें :- कभी भी अपने वेग नहीं रोकने चहिये वेग मतलब छींक आना , बाथरूम आना , हंसी आना आदि इनको कभी भी नही रोकना चहिये।

7. वजन कम करें :- अगर आपका वजन जादा है तो अपना वजन कर करें ये भी एक कैंसर का कारण है।

8. तनावमुक्त रहें :- कभी भी चिंता न करें और कोई भी मानसिक कार्य जादा न करें और खुश रहें।

प्राणायाम करें
सुबह-सुबह थोड़ी-थोड़ी सेर कराएँ और और प्राणायाम कराएँ जेसे अनुलोम विलोम , कपालभाती इन दोनों प्राणायाम को करने से कोई भी बीमारी पास नहीं आ सकती और अगर कोई बीमारी है तो वो भी जल्द ही ठीक हो जाएगी। – योग से कैंसर का इलाज

कपालभाती
अनुलोम – विलोम


कैंसर से बचना है तो पहले अपनी आदतें बदलें : अध्ययन


हमारी सेहत कई बार हमारी आदतों की वजह से बनती या बिगड़ती है। भागदौड़ भरी जिंदगी में खाने और सोने की हमारी आदतों की वजह से कई गंभीर रोगों की चपेट में आ रहे हैं। हाल में हुए एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने इस बात का खुलासा किया है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में हर साल कैंसर के 26 हजार मामलों को सिर्फ बेहतर लाइफस्टाइल से बचाया जा सकता है। इसी तरह पुरुषों में 24 हजार कैंसर के मामले स्वस्थ रहन-सहन से संबंधित होते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि महिलाएं अगर शराब का सेवन कम करें और खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ा दें, तो हर हफ्ते 500 कैंसर के मामलों कमी आ सकती है। शोध में कहा गया है कि प्रसंकृत मीट और शारीरिक सक्रियता में कमी इस समस्या में इजाफा करते हैं।

कैंसर रिसर्च यूके में हुए इस अध्ययन में निदेशक एलिसन कॉक्स ने कहा कि हर दिन उठाया गया सकारात्मक कदम हमें गंभीर बीमारियों से बचा सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि इस बात की गारंटी तो कोई नहीं दे सकता है कि स्वस्थ रहन-सहन से कैंसर नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे जीवन के खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कम करें शराब और प्रसंस्कृत मीट
पूर्व में हुए अध्ययनों में कहा गया है कि शराब सात तरह के कैंसर का कारण हो सकती है। इससे हर साल कैंसर के तीन फीसदी मामले होते हैं। शराब में एसिटलडिहाइड रसायन होता है, जो डीएनए को न सिर्फ क्षतिग्रस्त करता है, बल्कि उसकी मरम्मत में भी बाधा उत्पन्न करता है। यह ऑस्ट्रोजेन हॉर्मोन में भी इजाफा करता है, जिससे स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा अधिक मात्रा में शराब के सेवन से लिवर क्षतिग्रस्त हो सकता है और ट्यूमर बनने की आशंका बढ़ जाती है।

प्रसंस्कृत मीट में कुछ ऐसे रसायन होते हैं, जो प्राकृतिक रूप से भी उत्पन्न होते हैं और इसमें मिलाए भी जाते हैं। इनसे कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। इसके अत्यधिक इस्तेमान से कोलोन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

फाइबर और व्यायाम की शरण में जाएं
फाइबर पाचन तंत्र के लिए अच्छा होता है, लिहाजा इसके सेवन से पेट की सेहत दुरुस्त रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि फाइबर की वजह से हम जो कुछ भी खाते हैं उसके शरीर से बाहर निकलने में अधिक समय नहीं लगता है। जो चीजें पाचन में दिक्कत पैदा करती हैं, असल में वही कैंसर का कारण होती हैं।

व्यायाम या शारीरिक सक्रियता हमारे शरीर में बनने वाले ऑस्ट्रोजेन और इनसुलिन हॉर्मोन का स्तर घटाती हैं। इनके बढ़े हुए स्तर स्तन और गर्भाशय कैंसर का कारण बनते हैं। इसके अलावा सक्रियता से वजन नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है, जो अपने आप में कई समस्याओं की जड़ होता है।

निपाह वायरस का आयुर्वेदिक इलाज


दोस्तों आप सभी निपाह वायरस के बारे में रोज सुन या पढ रहे होंगे। यह एक प्रकार का वायरस है, जो जानवरो से इंसानो में आ रहा है। खासतौर पर चमगादड़ और सुअरों से। ये वायरस इतना खतरनाक है कि इसके शरीर में प्रवेश करने के 24 घन्टों के भीतर ही आदमी कोमा में चला जाता है और समय पर इलाज ना मिलने के कारण इंसान की मौत हो जाती है।

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इससे बचने के लिए ये अलर्ट जारी किया गया है कि चमगादड़ और सूअर जैसे जानवरो से सावधान रहे। कुछ चमगादड़ फलों का रस पते है इसीलिए आप फल खाते समय सावधान रहे। ऐसे किसी भी फल का सेवन ना करें जीनमें छेद हो या वो पहले से कटा हुआ हो।

निपाह वायरस की पहचान

बुखार आना
ऊल्टीयां आना
दिमाग भ्रमित होना
मांसपेशियों में दर्द
सिर दर्द और बेहोस होना
निमोनिया का असर

निपाह वायरस के इलाज के लिए आयुर्वेदिक उपाय

200 ग्राम सरसों के तेल में 20 ग्राम लौंग मिलाकर उसे 20 मिनट तक गर्म करें। सरसों तेल और लौंग से निकलने वाला भाफ किसी भी तरह के वायरस को मारने में पूरी तरह से खत्म कर सकता है।

2 चम्मच चीरायता का चूरण 2 गिलास पानी में मिलाकर तब तक जब तक पानी आधा गिलास न बचे। उबलने के बाद इसे अच्छे से छान कर पीए। इससे रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है।


आप सभी ने गन्धक रसायन के बारे में सुना होगा। बाजार मैं इसकी गोली मिल जाती है। रोज सुबह शाम गर्म पानी से एक एक गोली का सेवन करे। यह किसी भी वायरस को रोकने में और उसे खत्म करने में बहुत उपयोगी है।

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सोरायसिस का रामबाण घरेलू इलाज

सोरायसिस एक बहुत ही खतरनाक बिमारी है। यह शरीर के किसी भी भाग में एक छोटे से धब्बे के रूप शुरू होता है और देखते ही देखते पूरे शरीर में फैल जाता है। सोरायसिस एक प्रकार का चर्म रोग ही होता है लेकिन ये इतनी विक्राल अवस्था में होता है कि इसका पूरी तरह से इलाज बहुत कठिन हो जाता है। कुछ आयुर्वेदिक औषधियां है जिनके नियमित सेवन से सोरायसिस को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

4 ग्राम चिरायता को 4 ग्राम कुटकी के साथ मिलाकर किसी शीशे के बर्तन में या चीनी मिट्टी के बर्तन में डाल दें। उसके बाद उसमें 125 ग्राम पानी डालकर उसे ढक कर रख दें। सुबह उठकर इस पानी को छानकर खाली पेट पी लें। और फिर उसी बर्तन में 125 ग्राम पानी मिलाकर उसे ढककर अगले दिन के लिए रख दें। एक बार चिरायता और कुटकी मिलाने पर 4 दिन तक उसके पानी का सेवन करें। पांचवें दिन फिर उसमें 4 ग्राम चिरायता और 4 ग्राम कुटकी मिलाकर 125 ग्राम पानी के साथ भिगो दें। एक बार चिरायता और कुटकी मिलाने के बाद 4 दिन तक ही उसके पानी का सेवन करें पांचवे दिन नए चिरायता और कुटकी का प्रयोग करें।
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चिरायता और कुटकी के मिश्रण से बनने वाला यह पानी सोरायसिस या किसी भी प्रकार के चर्म रोग को जड़ से खत्म कर देता है। जिन लोगों को खून की अशुद्धि से संबंधित कोई समस्या है वह लोग भी इस पानी का सेवन कर सकते हैं। जापानी खून को साफ करने में भी बहुत लाभदायक है। इस पानी के सेवन से खून से सभी विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं और खून पुनः शुद्ध हो जाता है।

यदि यह पानी आप किसी बच्चे को पिला रहे हैं तो ध्यान रखें कि उसे दो चम्मच से ज्यादा ना पिलाएं। इस पानी के लगातार दो महीने तक सेवन के बाद फर्क आपको स्वता ही दिख जाएगा। आप देखेंगे कि आपका चर्म रोग या सोराइसिस काफी हद तक ठीक हो गया है। यह पानी शरीर को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाता इसीलिए आप चाहें तो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने के लिए इस पानी का सेवन लंबे समय तक कर सकते हैं।

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नपुंसकता और शीघ्र पतन का इलाज

हमारे बचपन में हम बहुत सारी गलतियां करते है। उनमें से कुछ गलतियां ऐसी होती है जिसकी सजा हमें जवानी में भुगतना पड़ता है लेकिन शर्म के कारण हम किसी को बता नही पाते है। जिसका असर हमारे वैवाहिक जीवन पर भी पड़ता है।

मंद कामेच्छा
नपुंसकता
शुक्राणु की कमी
शीघ्र स्खलन
शीघ्र पतन
वीर्य पतला होना
स्वपन दोष

उपर बताई गई किसी भी समस्या से आप परेशान है तो इन औषधीयों का सेवन करें। इन औषधीयों के चमत्कारी लाभों को देखा गया है। ये औषधीयां वो लोग भी प्रयोग कर सकते है जो एलोपैथी इलाज करवा के थक चुके है।
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200 ग्राम सुवाणभस्म
02 ग्राम रजचभस्म
20 ग्राम सालमपंजा
10 ग्राम बंगभस्म
05 ग्राम रससिंदुर
15 ग्राम मकरध्वज
20 ग्राम शुद्ध शिलाजीत
10 ग्राम पुष्पधन्वारस
10 ग्राम शंखभस्म
10 ग्राम प्रवाल पिष्टी
30 ग्राम अश्वगंधा
30 ग्राम इलायची
20 ग्राम शतावर जड़
10 ग्राम जायफल
20 ग्राम पिपली
10 ग्राम अक्कलकरा
20 ग्राम विदारीकंद
20 ग्राम गुरुची घनसत्व
20 ग्राम गोखरू
10 ग्राम लोंग

इन सभी औषधियों को किसी अच्छे दुकान से उच्च गुणवत्ता की ले। इन सब का पाउडर बनाने के बाद सब को एक साथ मिला दे। सभी औषधियों को अच्छी तरह मिला लेने के बाद इसको कांच की शीशी में भरकर रख दें। सुबह शाम 4 ग्राम औषधि में 4 ग्राम मिश्री का पाउडर मिलाकर 200 ग्राम गुनगुने दूध के साथ इसका सेवन करें। मात्र 2 माह तक इसका नियमित प्रयोग करने से आपको अपने शरीर में कुछ चमत्कारी फायदे भी नजर आएंगे। इन औषधियों का प्रयोग 9 माह से 1 वर्ष तक करने के बाद आपकी समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।


टायफाइड का घरेलू और आयुर्वेदिक इलाज

टायफाइड एक ऐसी बिमारी जो शरीर को अन्दर से पूरी तरह तोड़ देती है। इस बिमारी के होने पर सबसे पहले शारीरिक कमजोरी होती है। कमजोरी इतनी भयानक होती है कि शरीर को बिस्तर पर हिलाना भी कठिन हो जाता है। इसीलिए इस बिमारी का इलाज दर्द भरा होता है। हर रोज 15 दिनों तक सुबह शाम इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। आज हम आप सभी को इस बिमारी के लिए आयुर्वेदिक उपाय बताते है।

1. एक चिटकी दालचीनी के चूर्ण को शहद में मिलाकर उसका सेवन करें। इससे टायफाइड जैसे खतरनाक रोग से बचा जा सकता है।

2. इस रोग में होने वाली कमजोरी से बचने के लिए मूंग का पानी या चावल की रब (माड़) का सेवन करे। ये दोनों ही शक्ति प्रदान करने वाले आहार है।

3. इस रोग से पीडित रोगी को दूध पिलाने के बाद नारंगी खिलाए।
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4. साबूत मुन्नका को बिच से चीर कर उसमें थोड़ा सा काला नमक लगाने के बाद उसे तवे पर थोड़ा सेक कर खाने से इस बिमारी मैं बहुत लाभ होता है।

5. इस रोग में रोगी प्यास बहुत लगती है। आधा लीटर पानी में 5 लौंग मिलाकर उसे उबाल कर ठंडा कर ले। थोडी थोडी देर पर यही जल रोगी को पीने के लिए दे।

6. बुखार तेज होने पर लौकी के टुकड़े पौर के तलवे पर रगड़ने से बुखार उतर जाता है।

7. 3 ग्राम अजमोद को चूर्ण शहद में मिलाकर खाने से इस रोग में बहुत लाभ होता है।

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ऑयली स्किन का घरेलू इलाज

ऑयली स्किन ड्राई स्किन की अपेक्षा ज्यादा गंदी हो जाती है, क्योंकि ऑयली स्किन पर धूल और मिट्टी सबसे ज्यादा झपकती है। कई लोगों का चेहरा ऑइली स्किन की वजह से खराब हो जाती है क्योंकि ऑयली स्किन होने की वजह से उस पर धूल और मिट्टी चिपकती है जिसके कारण चेहरे पर दाग धब्बे और पिंपल्स हो जाते हैं। बहुत सारे लोग जन्म से ही पहले स्क्रीन के शिकार होते हैं लेकिन फिर भी इस समस्या का समाधान संभव है। आज हम आपको कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जो वाली स्क्रीन की समस्या को दूर कर सकते हैं।
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इस उपाय को करने से पहले आप किसी अच्छे फेस वाश से अपने चेहरे को अच्छी तरह धो लें। भूलने के बाद चेहरे को सूती के कपड़े से या किसी ऐसे कपड़े से पूछ हैं जिससे आपके चेहरे में और अगर ना लगे। यह सब करने के बाद आप नीचे वाले तरीके को अपनाएं।

आपको हल्दी दालचीनी और ग्रीन टी लेकर उसे गर्म पानी में डाल देना है। इसके बाद आप अपने सिर को अच्छी तरह तोलिए से बांध लीजिए और उस गर्म पानी के भाप को अपने चेहरे पर आने दे। जितनी ज्यादा देर संभव हो आप भाग लेते रहे। यदि भाग की जलन बर्दाश्त से बाहर हो जाए तो कुछ समय आराम कर सकते हैं। उसके बाद फिर से यही तरीका अपनाएं। जब पानी ठंडा हो जाए तो उसे हटा दें और अपने चेहरे को धीरे-धीरे तौलिए से साफ करें। यह उपाय कुछ ही दिनों में आपकी ऑयली स्किन के समस्या को दूर कर देगी।

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घुटनों के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधि

बढ़ती उम्र के साथ शरीर के कई अंग कमजोर पड़ने लगते हैं। कुछ रंग तो ऐसे भी होते हैं जो हमेशा के लिए काम करना बंद कर देते हैं। कुछ रंग ऐसे होते हैं जो आजीवन तकलीफ देते हैं। उन्हीं अंगों में से एक अंग है हमारा घुटना। बढ़ती उम्र के साथ हमारे घुटने बहुत तेजी से कमजोर होते जाते हैं। अकारण ही उसमें दर्द होता रहता है। ऐसा लगता है जैसे मानो वहां की हड्डियां बिल्कुल कमजोर हो गई हों। आज हम इसी समस्या के समाधान के लिए कुछ औषधियों के बारे में बताने जा रहे हैं। इसके लिए कृपया आप इस पूरे पोस्ट को ध्यान से पढ़ें।

1. मेथी के दाने से घुटने का उपचार- मेथी दाने को अच्छी तरह पीसकर उसका पाउडर बना लें उसके बाद हर रोज सुबह खाली पेट एक चम्मच मेथी दाना का पाउडर एक गिलास पानी के साथ खा ले। इसके साथ ही आप चाहे तो रात को 15 से 20 मेथी के दाने पानी में भिगो दें और सुबह उठकर उसे पानी सहित निकल ले। यह प्रक्रिया कम से कम तीन महीनों तक जारी रखें। इससे घुटनों की बीमारी का अंत होता है। इस उपचार को हर उम्र के स्त्री या पुरुष अपना सकते हैं।
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2. घुटने की समस्या के समाधान के लिए अदरक का उपयोग- चाय तो आप लोग रोज पीते होंगे। यदि उस चाय में अदरक की मात्रा को बड़ा कर पिए तो आपके घुटनो की समस्या भी ठीक हो जाएगी। यदि आप अदरक का रस निकालने में सक्षम है तो अदरक के रस में नींबू और शहद मिलाकर उसका सेवन करें। यदि कही से अदरख का तेल मिल जाए तो उसे लाकर अपने घुटनों पर मालिश करे, इससे घुटनों का दर्द व अन्य प्रकार की समस्या भी समाप्त हो जाती है।

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