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भारत की आवाज

हमारा ब्लॉग आयुर्वेद से संबंधित है और हम हर प्रकार की बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक सलाह देते हैं| यदि आपको बीमारियों से संबंधित आयुर्वेदिक उपचार की आवश्यकता है तो आप हमारा ब्लॉक फॉलो कर सकते हैं|

योग करने का सही समय कब होता है?

1. सुबह का समय सबसे उपयुक्त होता है 2. खाना खाने के कुछ घंटे बाद ही योग अभ्यास करें 3. योग शुरू करने के पहले खुद को तनावमुक्त और मन को शांत कर लें 4. चुने हुए समय पर ही नियम से योग करें 5. शरीर में आए बदलाव को अनुभव करने के लिए नियमित रूप से योग करें 6. योग का अभ्यास ज़्यादा न करें

कैंसर से बचना है तो पहले अपनी आदतें बदलें : अध्ययन


हमारी सेहत कई बार हमारी आदतों की वजह से बनती या बिगड़ती है। भागदौड़ भरी जिंदगी में खाने और सोने की हमारी आदतों की वजह से कई गंभीर रोगों की चपेट में आ रहे हैं। हाल में हुए एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने इस बात का खुलासा किया है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में हर साल कैंसर के 26 हजार मामलों को सिर्फ बेहतर लाइफस्टाइल से बचाया जा सकता है। इसी तरह पुरुषों में 24 हजार कैंसर के मामले स्वस्थ रहन-सहन से संबंधित होते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि महिलाएं अगर शराब का सेवन कम करें और खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ा दें, तो हर हफ्ते 500 कैंसर के मामलों कमी आ सकती है। शोध में कहा गया है कि प्रसंकृत मीट और शारीरिक सक्रियता में कमी इस समस्या में इजाफा करते हैं।

कैंसर रिसर्च यूके में हुए इस अध्ययन में निदेशक एलिसन कॉक्स ने कहा कि हर दिन उठाया गया सकारात्मक कदम हमें गंभीर बीमारियों से बचा सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि इस बात की गारंटी तो कोई नहीं दे सकता है कि स्वस्थ रहन-सहन से कैंसर नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे जीवन के खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कम करें शराब और प्रसंस्कृत मीट
पूर्व में हुए अध्ययनों में कहा गया है कि शराब सात तरह के कैंसर का कारण हो सकती है। इससे हर साल कैंसर के तीन फीसदी मामले होते हैं। शराब में एसिटलडिहाइड रसायन होता है, जो डीएनए को न सिर्फ क्षतिग्रस्त करता है, बल्कि उसकी मरम्मत में भी बाधा उत्पन्न करता है। यह ऑस्ट्रोजेन हॉर्मोन में भी इजाफा करता है, जिससे स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा अधिक मात्रा में शराब के सेवन से लिवर क्षतिग्रस्त हो सकता है और ट्यूमर बनने की आशंका बढ़ जाती है।

प्रसंस्कृत मीट में कुछ ऐसे रसायन होते हैं, जो प्राकृतिक रूप से भी उत्पन्न होते हैं और इसमें मिलाए भी जाते हैं। इनसे कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। इसके अत्यधिक इस्तेमान से कोलोन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

फाइबर और व्यायाम की शरण में जाएं
फाइबर पाचन तंत्र के लिए अच्छा होता है, लिहाजा इसके सेवन से पेट की सेहत दुरुस्त रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि फाइबर की वजह से हम जो कुछ भी खाते हैं उसके शरीर से बाहर निकलने में अधिक समय नहीं लगता है। जो चीजें पाचन में दिक्कत पैदा करती हैं, असल में वही कैंसर का कारण होती हैं।

व्यायाम या शारीरिक सक्रियता हमारे शरीर में बनने वाले ऑस्ट्रोजेन और इनसुलिन हॉर्मोन का स्तर घटाती हैं। इनके बढ़े हुए स्तर स्तन और गर्भाशय कैंसर का कारण बनते हैं। इसके अलावा सक्रियता से वजन नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है, जो अपने आप में कई समस्याओं की जड़ होता है।

निपाह वायरस का आयुर्वेदिक इलाज


दोस्तों आप सभी निपाह वायरस के बारे में रोज सुन या पढ रहे होंगे। यह एक प्रकार का वायरस है, जो जानवरो से इंसानो में आ रहा है। खासतौर पर चमगादड़ और सुअरों से। ये वायरस इतना खतरनाक है कि इसके शरीर में प्रवेश करने के 24 घन्टों के भीतर ही आदमी कोमा में चला जाता है और समय पर इलाज ना मिलने के कारण इंसान की मौत हो जाती है।

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इससे बचने के लिए ये अलर्ट जारी किया गया है कि चमगादड़ और सूअर जैसे जानवरो से सावधान रहे। कुछ चमगादड़ फलों का रस पते है इसीलिए आप फल खाते समय सावधान रहे। ऐसे किसी भी फल का सेवन ना करें जीनमें छेद हो या वो पहले से कटा हुआ हो।

निपाह वायरस की पहचान

बुखार आना
ऊल्टीयां आना
दिमाग भ्रमित होना
मांसपेशियों में दर्द
सिर दर्द और बेहोस होना
निमोनिया का असर

निपाह वायरस के इलाज के लिए आयुर्वेदिक उपाय

200 ग्राम सरसों के तेल में 20 ग्राम लौंग मिलाकर उसे 20 मिनट तक गर्म करें। सरसों तेल और लौंग से निकलने वाला भाफ किसी भी तरह के वायरस को मारने में पूरी तरह से खत्म कर सकता है।

2 चम्मच चीरायता का चूरण 2 गिलास पानी में मिलाकर तब तक जब तक पानी आधा गिलास न बचे। उबलने के बाद इसे अच्छे से छान कर पीए। इससे रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है।


आप सभी ने गन्धक रसायन के बारे में सुना होगा। बाजार मैं इसकी गोली मिल जाती है। रोज सुबह शाम गर्म पानी से एक एक गोली का सेवन करे। यह किसी भी वायरस को रोकने में और उसे खत्म करने में बहुत उपयोगी है।

दोस्तों इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे, ताकि इस वायरस की चपेट में आए हुए लोगों तक ये जानकारी पहुंच सके। यदि आप इस वायरस से पीडितों की मदद करना चाहते है तो किसी भी Add पर Click करें। इस माह Adds से होने वाली सारी कमाई इस वायरस से पीडित व्यक्ति के इलाज पर खर्च किया जाएगा।

सोरायसिस का रामबाण घरेलू इलाज

सोरायसिस एक बहुत ही खतरनाक बिमारी है। यह शरीर के किसी भी भाग में एक छोटे से धब्बे के रूप शुरू होता है और देखते ही देखते पूरे शरीर में फैल जाता है। सोरायसिस एक प्रकार का चर्म रोग ही होता है लेकिन ये इतनी विक्राल अवस्था में होता है कि इसका पूरी तरह से इलाज बहुत कठिन हो जाता है। कुछ आयुर्वेदिक औषधियां है जिनके नियमित सेवन से सोरायसिस को जड़ से खत्म किया जा सकता है।

4 ग्राम चिरायता को 4 ग्राम कुटकी के साथ मिलाकर किसी शीशे के बर्तन में या चीनी मिट्टी के बर्तन में डाल दें। उसके बाद उसमें 125 ग्राम पानी डालकर उसे ढक कर रख दें। सुबह उठकर इस पानी को छानकर खाली पेट पी लें। और फिर उसी बर्तन में 125 ग्राम पानी मिलाकर उसे ढककर अगले दिन के लिए रख दें। एक बार चिरायता और कुटकी मिलाने पर 4 दिन तक उसके पानी का सेवन करें। पांचवें दिन फिर उसमें 4 ग्राम चिरायता और 4 ग्राम कुटकी मिलाकर 125 ग्राम पानी के साथ भिगो दें। एक बार चिरायता और कुटकी मिलाने के बाद 4 दिन तक ही उसके पानी का सेवन करें पांचवे दिन नए चिरायता और कुटकी का प्रयोग करें।
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चिरायता और कुटकी के मिश्रण से बनने वाला यह पानी सोरायसिस या किसी भी प्रकार के चर्म रोग को जड़ से खत्म कर देता है। जिन लोगों को खून की अशुद्धि से संबंधित कोई समस्या है वह लोग भी इस पानी का सेवन कर सकते हैं। जापानी खून को साफ करने में भी बहुत लाभदायक है। इस पानी के सेवन से खून से सभी विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं और खून पुनः शुद्ध हो जाता है।

यदि यह पानी आप किसी बच्चे को पिला रहे हैं तो ध्यान रखें कि उसे दो चम्मच से ज्यादा ना पिलाएं। इस पानी के लगातार दो महीने तक सेवन के बाद फर्क आपको स्वता ही दिख जाएगा। आप देखेंगे कि आपका चर्म रोग या सोराइसिस काफी हद तक ठीक हो गया है। यह पानी शरीर को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाता इसीलिए आप चाहें तो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने के लिए इस पानी का सेवन लंबे समय तक कर सकते हैं।

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नपुंसकता और शीघ्र पतन का इलाज

हमारे बचपन में हम बहुत सारी गलतियां करते है। उनमें से कुछ गलतियां ऐसी होती है जिसकी सजा हमें जवानी में भुगतना पड़ता है लेकिन शर्म के कारण हम किसी को बता नही पाते है। जिसका असर हमारे वैवाहिक जीवन पर भी पड़ता है।

मंद कामेच्छा
नपुंसकता
शुक्राणु की कमी
शीघ्र स्खलन
शीघ्र पतन
वीर्य पतला होना
स्वपन दोष

उपर बताई गई किसी भी समस्या से आप परेशान है तो इन औषधीयों का सेवन करें। इन औषधीयों के चमत्कारी लाभों को देखा गया है। ये औषधीयां वो लोग भी प्रयोग कर सकते है जो एलोपैथी इलाज करवा के थक चुके है।
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200 ग्राम सुवाणभस्म
02 ग्राम रजचभस्म
20 ग्राम सालमपंजा
10 ग्राम बंगभस्म
05 ग्राम रससिंदुर
15 ग्राम मकरध्वज
20 ग्राम शुद्ध शिलाजीत
10 ग्राम पुष्पधन्वारस
10 ग्राम शंखभस्म
10 ग्राम प्रवाल पिष्टी
30 ग्राम अश्वगंधा
30 ग्राम इलायची
20 ग्राम शतावर जड़
10 ग्राम जायफल
20 ग्राम पिपली
10 ग्राम अक्कलकरा
20 ग्राम विदारीकंद
20 ग्राम गुरुची घनसत्व
20 ग्राम गोखरू
10 ग्राम लोंग

इन सभी औषधियों को किसी अच्छे दुकान से उच्च गुणवत्ता की ले। इन सब का पाउडर बनाने के बाद सब को एक साथ मिला दे। सभी औषधियों को अच्छी तरह मिला लेने के बाद इसको कांच की शीशी में भरकर रख दें। सुबह शाम 4 ग्राम औषधि में 4 ग्राम मिश्री का पाउडर मिलाकर 200 ग्राम गुनगुने दूध के साथ इसका सेवन करें। मात्र 2 माह तक इसका नियमित प्रयोग करने से आपको अपने शरीर में कुछ चमत्कारी फायदे भी नजर आएंगे। इन औषधियों का प्रयोग 9 माह से 1 वर्ष तक करने के बाद आपकी समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।


टायफाइड का घरेलू और आयुर्वेदिक इलाज

टायफाइड एक ऐसी बिमारी जो शरीर को अन्दर से पूरी तरह तोड़ देती है। इस बिमारी के होने पर सबसे पहले शारीरिक कमजोरी होती है। कमजोरी इतनी भयानक होती है कि शरीर को बिस्तर पर हिलाना भी कठिन हो जाता है। इसीलिए इस बिमारी का इलाज दर्द भरा होता है। हर रोज 15 दिनों तक सुबह शाम इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। आज हम आप सभी को इस बिमारी के लिए आयुर्वेदिक उपाय बताते है।

1. एक चिटकी दालचीनी के चूर्ण को शहद में मिलाकर उसका सेवन करें। इससे टायफाइड जैसे खतरनाक रोग से बचा जा सकता है।

2. इस रोग में होने वाली कमजोरी से बचने के लिए मूंग का पानी या चावल की रब (माड़) का सेवन करे। ये दोनों ही शक्ति प्रदान करने वाले आहार है।

3. इस रोग से पीडित रोगी को दूध पिलाने के बाद नारंगी खिलाए।
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4. साबूत मुन्नका को बिच से चीर कर उसमें थोड़ा सा काला नमक लगाने के बाद उसे तवे पर थोड़ा सेक कर खाने से इस बिमारी मैं बहुत लाभ होता है।

5. इस रोग में रोगी प्यास बहुत लगती है। आधा लीटर पानी में 5 लौंग मिलाकर उसे उबाल कर ठंडा कर ले। थोडी थोडी देर पर यही जल रोगी को पीने के लिए दे।

6. बुखार तेज होने पर लौकी के टुकड़े पौर के तलवे पर रगड़ने से बुखार उतर जाता है।

7. 3 ग्राम अजमोद को चूर्ण शहद में मिलाकर खाने से इस रोग में बहुत लाभ होता है।

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ऑयली स्किन का घरेलू इलाज

ऑयली स्किन ड्राई स्किन की अपेक्षा ज्यादा गंदी हो जाती है, क्योंकि ऑयली स्किन पर धूल और मिट्टी सबसे ज्यादा झपकती है। कई लोगों का चेहरा ऑइली स्किन की वजह से खराब हो जाती है क्योंकि ऑयली स्किन होने की वजह से उस पर धूल और मिट्टी चिपकती है जिसके कारण चेहरे पर दाग धब्बे और पिंपल्स हो जाते हैं। बहुत सारे लोग जन्म से ही पहले स्क्रीन के शिकार होते हैं लेकिन फिर भी इस समस्या का समाधान संभव है। आज हम आपको कुछ घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जो वाली स्क्रीन की समस्या को दूर कर सकते हैं।
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इस उपाय को करने से पहले आप किसी अच्छे फेस वाश से अपने चेहरे को अच्छी तरह धो लें। भूलने के बाद चेहरे को सूती के कपड़े से या किसी ऐसे कपड़े से पूछ हैं जिससे आपके चेहरे में और अगर ना लगे। यह सब करने के बाद आप नीचे वाले तरीके को अपनाएं।

आपको हल्दी दालचीनी और ग्रीन टी लेकर उसे गर्म पानी में डाल देना है। इसके बाद आप अपने सिर को अच्छी तरह तोलिए से बांध लीजिए और उस गर्म पानी के भाप को अपने चेहरे पर आने दे। जितनी ज्यादा देर संभव हो आप भाग लेते रहे। यदि भाग की जलन बर्दाश्त से बाहर हो जाए तो कुछ समय आराम कर सकते हैं। उसके बाद फिर से यही तरीका अपनाएं। जब पानी ठंडा हो जाए तो उसे हटा दें और अपने चेहरे को धीरे-धीरे तौलिए से साफ करें। यह उपाय कुछ ही दिनों में आपकी ऑयली स्किन के समस्या को दूर कर देगी।

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घुटनों के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधि

बढ़ती उम्र के साथ शरीर के कई अंग कमजोर पड़ने लगते हैं। कुछ रंग तो ऐसे भी होते हैं जो हमेशा के लिए काम करना बंद कर देते हैं। कुछ रंग ऐसे होते हैं जो आजीवन तकलीफ देते हैं। उन्हीं अंगों में से एक अंग है हमारा घुटना। बढ़ती उम्र के साथ हमारे घुटने बहुत तेजी से कमजोर होते जाते हैं। अकारण ही उसमें दर्द होता रहता है। ऐसा लगता है जैसे मानो वहां की हड्डियां बिल्कुल कमजोर हो गई हों। आज हम इसी समस्या के समाधान के लिए कुछ औषधियों के बारे में बताने जा रहे हैं। इसके लिए कृपया आप इस पूरे पोस्ट को ध्यान से पढ़ें।

1. मेथी के दाने से घुटने का उपचार- मेथी दाने को अच्छी तरह पीसकर उसका पाउडर बना लें उसके बाद हर रोज सुबह खाली पेट एक चम्मच मेथी दाना का पाउडर एक गिलास पानी के साथ खा ले। इसके साथ ही आप चाहे तो रात को 15 से 20 मेथी के दाने पानी में भिगो दें और सुबह उठकर उसे पानी सहित निकल ले। यह प्रक्रिया कम से कम तीन महीनों तक जारी रखें। इससे घुटनों की बीमारी का अंत होता है। इस उपचार को हर उम्र के स्त्री या पुरुष अपना सकते हैं।
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2. घुटने की समस्या के समाधान के लिए अदरक का उपयोग- चाय तो आप लोग रोज पीते होंगे। यदि उस चाय में अदरक की मात्रा को बड़ा कर पिए तो आपके घुटनो की समस्या भी ठीक हो जाएगी। यदि आप अदरक का रस निकालने में सक्षम है तो अदरक के रस में नींबू और शहद मिलाकर उसका सेवन करें। यदि कही से अदरख का तेल मिल जाए तो उसे लाकर अपने घुटनों पर मालिश करे, इससे घुटनों का दर्द व अन्य प्रकार की समस्या भी समाप्त हो जाती है।

इस पोस्ट को पढ़ने के बाद अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो कृपया हमें फॉलो करें और उन लोगों के साथ शेयर करें जो इस समस्या से जूझ रहे हैं और इसका उपचार चाहते हैं। आपका एक शेयर किसी मरीज को इस बीमारी से मुक्ति दिला सकता है।

हर बिमारी में काम आने वाली औषधी

आज मैं आप सभी को ऐसी चमत्कारी औषधी के बारे में बताने जा रहा हूं जो किसी भी प्रकार की बिमारी को ठीक कर सकता है। इस औषधी के लिए आप को बाजार में इधर उधर भटकने की जरूरत नही है। आप इसे अपने घर में खुद ही बना सकते है। इस औषधी को तैयार करने के लिए आप सभी को इन वस्तुओं की आवश्यकता होगी.....

गौमुञधनसत्व 20 ग्राम
गंधर्व हरितकी 350 ग्राम
अजवाइन 20 ग्राम
मुलेठी 50 ग्राम
सौठ 20 ग्राम

उपर बताई गई सभी वस्तुएं आप को किसी आयुर्वेदिक दुकान से मिल जाएगी। आप चाहे तो पतांजली स्टोर से भी ले सकते है। गौमुञधनसत्व (गौमुञ भस्म) आप को किसी भी गौशाला से आसानी से प्राप्त हो जाएगा। सभी को एक साथ अच्छे से मिक्स करके चूर्ण बना ले।

हर रोज रात को सोने से पहले एक चम्मच औषधी एक गिलास गुनगुने पानी के साथ ले। ध्यान रहे औषधी लेने के लिए पानी का ही प्रयोग करें, किसी अन्य पदार्थ का नही। औषधी लेने के बाद किसी खाने पीने की वस्तु का सेवन ना करे।
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ये औषधी किसी भी उम्र के व्यक्ति ले सकते है। इस औषधी का पूरा असर आप को लगभग तीन माह में दिखने लगेगा।

यह औषधी किन - किन बिमारियो ली जा सकती है.....

चमड़े की झुर्रिया दूर करने के लिए, पाचन तन्त्र ठीक करने के लिए, गैस, एसिडीटी, बालों का गिरना, खून की कमी, गठिया, हड्डियों को मजबूत करने के लिए, आंखो की रोशनी बढाने के लिए, कब्ज, खून की कमी, कफ, ह्रदय की कमजोरी, थकान, स्मरण शक्ति, सुडौल शरीर, बहरापन, किसी एलोपैथी दवा का रिएक्सन, दातों की मजबूती, नपुंसकता, डायबिटिज।

इन सभी बिमारियों के लिए ये औषधी रामबाण उपचार है। इसका नियमित प्रयोग आप सभी को इन सभी बिमारियों से सदा के लिए छुटकारा दिला देगा। आप सभी से विनती है कि बिमारी से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिए कम से कम 6 माह तक इस औषधी का सेवन करे। आप चाहे तो और अधिक दिनों तक भी इस औषधी का सेवन कर सकते है।

आप सभी से विनम्र निवेदन है इस पोस्ट को पढ़ने के बाद अपने मित्रों के साथ जरूर शेयर करें। हमारा उद्देश्य इस जानकारी को उन लोगों तक पहुंचाना है जो इस बीमारी से लड़ रहे हैं और जिनके पास उपचार के लिए कोई बेहतर उपाय नहीं है।

अस्थमा का घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार

अस्थमा जैसी खतरनाक बिमारी से छुटकारा पाने के लिए कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय।

1. अनार और अदरख का रस समान मात्रा ले। जितना आप ने अदरख रस लिया था उतना ही उसमे शहद मिला ले। इस मिश्रण को दिन में तीन चार बार सेवन करे। ये अस्थमा के लिए बहुत लाभदायक है।

2. एक गिलास पानी में आधा नींबू का रस और उसमें थोड़ा सा चीनी मिलाकर उसका सेवन करें।

3. आंवले में दमा से लड़ने वाले सभी तत्व पाए जाते हैं। आंवले को अच्छी तरह टूट लें उसके बाद उसमें थोड़ा सा शहद मिला लें। दमा वाले मरीज इस मिश्रण का सेवन करें।

4. खाना खाते समय सलाद के रूप में कच्चे प्याज का सेवन करे। कच्चा प्याज दमा से लड़ने में लाभदायक है।
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5. एक चम्मच अजवायन को आधा लीटर पानी में अच्छी तरह उबालें। उसके बाद इस उबले हुए पानी का भाप लें। आप चाहे तो इस पानी को पी भी सकते हैं। यह तरीका सांस की कई प्रकार की बीमारियों को दूर करती है।

6. जैतून का तेल और शहद को बराबर मात्रा में लेकर मिला लें। इस मिश्रण को एक गिलास गर्म दूध में डाल दे और इसमें दो-तीन लहसुन की कली भी मिला दे। सुबह नाश्ता करने से पहले इस दूध का सेवन करें।

7. रोज जितना संभव हो ताजे फलों का सेवन करें। यदि आप स्ट्रॉबेरी लेने में सक्षम है तो स्ट्रॉबेरी का सेवन जरूर करें। स्ट्रॉबेरी भी दमा जैसी खतरनाक बीमारी में बहुत कारगर है।

 आप सभी से विनम्र निवेदन है इस पोस्ट को पढ़ने के बाद अपने मित्रों के साथ जरूर शेयर करें। हमारा उद्देश्य इस जानकारी को उन लोगों तक पहुंचाना है जो इस बीमारी से लड़ रहे हैं और जिनके पास उपचार के लिए कोई बेहतर उपाय नहीं है।

लू लगने पर तुरन्त करे ये उपाय

गर्मियों का मौसम आ गया है। गर्मी आते हैं हमें लू सताने लगती है। आज हम लू से बचने के लिए कुछ घरेलू उपाय ऊपर बारे में बताने जा रहे हैं। लू लगने पर या उससे पहले भी आप इन उपायों को अपना सकते हैं। अगर लू लगने से पहले यह उपाय कर लेते हैं तो आपको लू लगने की समस्या से डरने की जरूरत नहीं है।

1. सूखे धनिया को रात में पानी में भिगो दें। सुबह उठकर धनिया को अच्छी तरह मसल कर उसमें थोड़ा सा चीनी मिलाकर उसका सेवन करें। ऐसा करने से लू लगने की से बचा जा सकता है।

2. गर्मियों में कच्चे आम के शरबत का सेवन लू लगने से बचने के लिए किया जाता है।लू से बचाव हा ये बहुत प्राचीन उपाय है।
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3. इमली के बीज को पानी में भिगो दें। अच्छी तरह भीग जाने के बाद उसे जान ले। जले हुए इस पानी में थोड़ा सा शक्कर मिलाकर रोज सुबह इसका सेवन करें। यदि दिन के समय घर से बाहर निकल रहे हैं तो इस पानी का सेवन जरूर करें।

4. दिन में घर से बाहर निकलने से पहले खाना अवश्य खाएं। इसके अलावा अपने साथ एक पानी की बोतल रखें। जब भी प्यास लगे थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। कड़ी धूप में बाहर जाना हो तो कृपया हल्के रंग के कपड़े पहने। हल्के रंग के कपड़े धूप में जल्दी गर्म नहीं होता। इसीलिए यह धूप से बचाने में भी बहुत सहायक होते हैं।

5. खाना खाते समय प्याज का सलाद जरूर खाएं। प्याज लू से बचाने में पूरी तरह से सक्षम होता है। जो लोग प्याज का सेवन नहीं करते ऊपर बताए गए अन्य उपाय में से कोई भी अपना सकते हैं।

6. गर्मियों में शरीर का तापमान बढ़ जाता है इसीलिए शरीर में पानी की कमी होने लगती है। ज्यादा से ज्यादा पानी पीने का प्रयास करें और कुछ ऐसे फलों का सेवन करें जो शरीर में पानी की कमी को पूरी करते हैं जैसे तरबूज, ककड़ी, खीरा आदि।

7. गर्मी और लू से बचने के लिए बेल या नींबू के शरबत का सेवन करें। नींबू का शरबत आप घर में भी बना सकते हैं। बेल का शरबत आपको आसानी से बाजार में मिल जाता है।

8. दिन में एक बार फलों के जूस का सेवन जरूर करें। जो लोग फलों का जूस लेने में सक्षम नहीं है वह पानी में ग्लूकोस मिलाकर पी सकते हैं। ग्लूकोज शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है।

आप सभी से विनम्र निवेदन है कि इस पोस्ट को पढ़ने के बाद कम से कम 3 लोगों को जरूर शेयर करें। शेयर करने से अधिक लोगों तक यह जानकारी पहुंच सकेगी और लोग इस गर्मी के मौसम में पानी की कमी और लू से बचाव में स्वयं सक्षम हो सकेंगे।


पायरिया के रोगी कृप्या ध्यान दें

आप सभी ने पायरिया बिमारी के बारे में तो सुना ही होगा। पायरिया दांतों की सबसे गंभीर  बीमारियों में से एक मानी जाती है। इस रोग का जन्म मुंह और दांतों की गन्दगी के कारण उत्पन्न होता है। यह रोग दांतों शुरू होकर मसूडो की जड़ तक फैल जाती है। इस रोग के हो जाने पर मुंह से भयानक बदबू आती है। इस रोग में मसूडो में जलन, सड़न, खून निकलना आदि होता है।

पायरिया की बीमारी से छुटकारा पाने के लिए कुछ आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खे।

1. नीम के थोड़े कच्चे पत्ते लाकर उसे धूप में अच्छी तरह सुखाएं। अच्छी तरह सूख जाने के बाद उसे किसी में मिट्टी के बर्तन में रख कर जला दें। जब पति जल जाएंगे तो वह काले हो जाएंगे। इसके बाद उन काले पत्तों को अच्छी तरह से पीसकर उनका पाउडर बना लें। जितना पाउडर है ठीक उतना ही उसमें सेंधा नमक अच्छी तरह से मिला दे और इसके बाद उसे एक कांच की शीशी में भरकर रख दें। आप की दवाई लगभग तैयार हो गई है। हर रोज दिन में दो से तीन बार इस आयुर्वेदिक मंजन से दांत को साफ करें और अच्छी तरह से कुल्ला करें। जब तक पायरिया रोग पूरी तरह से खत्म ना हो जाए तब तक खाने के बाद तुरंत मंजन करें।
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2. पायरिया रोग में लौंग का तेल बहुत फायदेमंद है। एक गिलास पानी में 6-7 बंद लौंग का तेल मिलाकर उस से कुल्ला व गरारे करें। इससे पायरिया रोग मैं मुंह से आने वाली बदबू जल्दी खत्म हो जाती है।

3. चुटकी भर सादा नमक उतनी ही मात्रा में हल्दी और उसमें कुछ बूंदे सरसों तेल की मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इस मिश्रण को दातों पर अच्छी तरह लिफ्ट की तरह लगा लें। लेप लगाने के बाद इसे कुछ समय के लिए छोड़ दें। यदि आपके मुंह से लार निकलती है तो उसे थूकते रहे पर कुल्ला नहीं करें। लगभग 20 से 25 मिनट बाद कुल्ला कर लें। यह तरीका एक ही दिन में पायरिया को खत्म कर देता है। यदि रोज यह उपाय करते रहेंगे तो जीवन में कभी पायलिया नहीं होगा।

4. जिन लोगों का एरिया है वह लोग एक पान का पत्ता लें और उसमें एक कपूर का टुकड़ा डाल कर उसे मुंह में रख ले। उसके बाद उसे धीरे धीरे चलाएं और उसका रस बाहर थूकते रहे। इससे पायलिया से जल्दी छुटकारा मिल जाता है।

5. कपूर और घी को मिलाकर दांतों पर लगाने से या नीम के दातुन से ब्रश करने से यह रोग खत्म होने लगता है।

6. अमरूद का सेवन करने वाले लोगों को पायरिया की बीमारी बहुत कम होती है। लेकिन अगर आप अमरुद खाते हैं तो उस पर थोड़ा सा काला नमक रगड़ कर खाएं। ऐसा करने से पायरिया की बीमारी आपको कभी नहीं होगी।

7. काली मिर्च का पाउडर और नमक के मिश्रण कालेब आप अपने दांतो पर लगा सकते हैं यह पायलिया नाशक होता है।

8. जले हुए आंवले में सरसों तेल मिलाकर मसूड़ों पर मसाज करने से पायरिया का नाश होता है।

9. हरड़, सेंधा नमक, दालचीनी जीरा और सुपारी समान मात्रा में लेकर उसे अच्छी तरह पीस लें। इस मिश्रण से नियमित दांत साफ करें पायरिया की समस्या से हमेशा बचे रहेंगे।

10. अनार के छिलके को अच्छी तरह उबालें। बोलने के बाद पानी को छान लें और इस पानी से दिन में दो से तीन बार कुल्ला करें। पायरिया से लड़ने में यह बहुत कारगर औषधि है। इसके अलावा गर्म पानी में एक चुटकी नमक मिलाकर भी कुल्ला कर सकते हैं।

11.  बादाम का छिलका और फिटकरी को भूनकर पीस लें रोज से दांत साफ करें। व्यापारियों को बहुत जल्द जड़ से मिटा देता है।
आप सभी से विनती है कि इस पोस्ट को पढ़ने के बाद कम से कम तीन लोगों के साथ जरूर शेयर करें। जितने ज्यादा लोगों तक यह पोस्ट पहुंचेगा इतने ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकते हैं। आपका एक पोस्ट पता नहीं किस को इस बीमारी से छुटकारा दिला दे।

इन दो तेलों के मिश्रण होता है चमत्कारी असर

हम जिन तेलों की बात कर रहे है वो तेल है, अलसी का तेल 100 ग्राम और कलौंजी का तेल 100 ग्राम। इन दोनों तेल को बाजार से लाकर इन्हे एक साथ अच्छे से मिला ले। ये दोनों तेल बाजार में या पतांजली स्टोर पर आसानी से मिल जाएगा। इस मिश्रण से होने वाले परिणाम.....

1. यदि आप किसी भी प्रकार की बालों की समस्या है तो इस तेल को अपने बालों में लगाएं। इसे लगाने से बालों का गिरना बंद हो जाता है। बाल मजबूत हो जाते हैं बाल काले रहते हैं। सफेद बाल भी धीरे-धीरे काले होने लगते हैं। इसके अलावा बालों में किसी अन्य प्रकार की बीमारी भी हो तो यह तेल उस बीमारी को ठीक कर देते हैं।

2. शुगर के मरीजों के लिए इन तीनों का मिश्रण बहुत लाभकारी है। शुगर के मरीज रोज सुबह खाली पेट एक चम्मच इसका सेवन करना। इससे ना सिर्फ शुगर कंट्रोल होता है बल्कि कोलेस्ट्रोल भी कम होता है।

3. जो लोग थायराइड की समस्या से जूझ रहे हैं वह लोग रोज रात को खाने के आधे घंटे बाद एक चम्मच तेल के मिश्रण का सेवन करें। यह थायराइड को कंट्रोल करने में बहुत लाभकारी औषधि है।

4. जोड़ों का दर्द, साइटिका, अमरावती और पैरालिसिस के मरीजों के लिए इन दो तेल का मिश्रण किसी वरदान से कम नहीं है। पूरी आपको या आपके किसी परिचित को इनमें से कोई भी रोग हो तो इन तेलों के मिश्रण से मालिश करें और रोज सुबह में एक चम्मच इसका सेवन भी करें।
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5. चर्म रोग से पीड़ित व्यक्ति भी इस तेल का उपयोग कर सकते हैं। जिस स्थान पर रोग है वहां इस तेल की मालिश करें। चर्म रोग चाहे किसी भी प्रकार की हो और कितनी भी पुरानी हो चुकी हो उसको यह जड़ से खत्म कर देता है।

6. यदि कोई व्यक्ति ऐसे किसी पुराने घाव की समस्या से जूझ रहा हो जो ठीक ना हो रहा हो और बार-बार उसमें से मवाद निकल रहा हो तो वो व्यक्ति अपने घाव पर इस तेल का मिश्रण लगाए।

7. ह्रदय रोग या हार्ट ब्लॉकेज की समस्या है तो रोज सुबह शाम आधा-आधा चम्मच तेल का सेवन करें।

8. दांत मे किसी भी प्रकार की समस्या हो जैसे- पायरिया, दांत का हिलना, मसूड़े कमजोर, दांतों मे झनझनाहट आदि। इस तेल के मिश्रण को दातों पर लगाएं दांतों की सभी प्रकार की समस्याएं खत्म हो जाएंगी।

9. यदि आपकी पैर की एड़ियां फट रही है और आप इससे परेशान हैं और छुटकारा पाना चाहते हैं तो इस तेल के मिश्रण को अपनी पैर की एड़ियों पर लगाएं। कुछ दिनों में फटी एड़ियां भरने लगेंगे।

10. गले की खराश या कफ की समस्या से छुटकारा पाने के लिए भी यह बहुत लाभदायक है। एक-एक चम्मच सुबह शाम सेवन करने से कफ और गले की खराश से राहत मिलता है। आप चाहें तो इसका नियमित सेवन भी कर सकते हैं।

11. यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार है तो हर रोज उसके नाक में एक एक बूंद तेल डालें। ऐसा करने से उसका मानसिक रोग दूर होने लगता है। साथी डिप्रेशन और तनाव की समस्या को भी खत्म कर देता है।

बहुत सारे लोग जानकारी के अभाव में अपना इलाज नहीं करवा पाते। आप सभी से विनम्र निवेदन है कि इस पोस्ट को पढ़ने के बाद कम से कम तीन लोगों के साथ इसे जरुर शेयर करें। आपका यह 3 शेयर पता नहीं किस पीड़ित को राहत पहुंचा दे।

बवासीर की बिमारी का रामबाण उपाय



बवासीर एक बहुत ही घातक रोग है। ये इतना खतरनाक होता है की इसका जितना इलाज कराओ ये उतना बढ़ने लगती है। चुकी इस बिमारी में लगातार खून बहता रहता है इसलिए कइ बार इसके परिणाम बहुत घातक हो जाते है। एलोपैथी इलाज से ये बिमारी दब जाती है लेकिन पूरी तरह से ठीक नही होती। कुछ समय बाद ये बिमारी फिर से हो जाती है। लेकिन आयुर्वेद के माध्यम से इस बीमारी का पूरी तरह से इलाज संभव है। आज हम आप सभी को इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए उनो औषधियों के बारे में बताते हैं।
Jabong POP CPV INRelianceTrends CPV (IN) नागकेसर - 10 ग्राम
अविपत्तिकर - 20 ग्राम
सौफ- 15 ग्राम
स्वा. विरे.- 20 ग्राम
इन्द्रजौ - 30 ग्राम
शोणितागर्ल 20 ग्राम

सभी किसी अच्छी दुकान से उच्च गुणवत्ता वाली ही खरीदे। इसके बाद सभी रो एक साथ अच्छे मिलाकर कांच की सीसी में भरकर रख दे। हर रोज सुबह शाम एक चम्मच दवा का सेवन करे। कुछ ही दिनों में दवा का असर दिखना शुरू हो जाएगा। बिमारी पूरी तरह से ठीक होने के एक माह बाद तक दवा का सेवन जारी रखे और उसके बाद बंद कर दे।

जानकारी के अभाव में बहुत सारे लोग इस समस्या से परेशान है। आप सभी से विनम्र निवेदन है कि पढ़ने के बाद इस जानकारी को तीन लोगों के साथ अवश्य शेयर करें।

एलर्जी से बचने के लिए कुछ घरेलू उपाय

1. चाय- जी आप ने सही पढ़ा चाय। चाय से भी एलर्जी का इलाज किया जा सकता है। अदरक, काली मिर्च, तुलसी के पत्ते, लौंग व मिश्री को मिलाकर चाय बनाए और पीए। इससे ना सिर्फ एलर्जी ठीक होती है बल्कि शरीर को एनर्जी भी मिलती है।

2. कैस्टर ऑयल- आप फल या सब्जी का जूस जरूर पीते होंगे, उसमें पांच बूंद कैस्टर ऑयल मिलाकर पीने से एलर्जी की समस्या का सदा के लिए अंत हो जाता है।

3. नीबू पानी- नीबू बहुत ही गुणकारी होता है। इसको बहुत सारी बिमारीयों में प्रयोग किया जाता है। हर रोज नीबू पानी पीने से एलर्जी कभी नही होती है। सदा निरोग रहने के लिए हर रोज सुबह खाली पोट नीबू पानी का सेवन करना चाहीए।Jabong POP CPV INRelianceTrends CPV (IN)
4. सब्जियों का रस- प्रति दिन गाजर का रस पीने से एलर्जी की समस्या का अंत हो जाता है। आप चाहे तो खीरा चुकंदर और गाजर का मिक्स जूस भी ले सकते है। ये एलर्जी को ठीक करने के साथ साथ शारीरिक ऊर्जा भी प्रदान करता है।

5. नारियल तेल- यदि आप को त्वचा संबंधी एलर्जी है तो आप नारियल तेल में नीबू का रस मिलाकर रात में पूरे शरीर में लगा ले और रात भर लगा रहने दे। सुबह उट कर उसे नीम वाले पानी से धो ले। इससे त्वचा संबंधी किसी भी प्रकार की एलर्जी का नाश होता है।

6. खसखस के बीज- खसखस के बीज को नीबू के रस और शहद में मिलाकर उस स्थान पर लगाए जिस स्थान पर एलर्जी हुई है। इन तीनों मिश्रणों के लेप से एलर्जी का खात्मा हो जाता है।

जिन लोगो को बार बार एलर्जी हो जाती है उन्हे धूल, धुआ और परफ्यूम (सेन्ट) से बच कर रहना चाहीए।
जानकारी के बहुत सारे लोग इस समस्या से जूझते रहते हैं और उन्हें समय पर उचित इलाज नहीं मिल पाता। आप सभी से विनम्र निवेदन है कि पढ़ने के बाद इसे कम से कम तीन लोगों के साथ जरूर शेयर करें। यदि यह तीन तीन लोगों के साथ शेयर करनाल हमेशा जारी रहेगा तो यह संदेश आसानी से सभी लोगों तक पहुंच जाएगा।


जवानी बरकरार रखने के लिए अपनाए ये औषधी

इस संसार के दो कड़वे सत्य ना व्यक्ति बूढ़ा होना चहता है और ना ही मरना चाहता है। परन्तु यह तो संसार का अटल सत्य है कि जो पैदा हुआ है उसे मरना भी है। और समय समय चक्र के साथ उसकी उम्र भी लगातार बढ़ती रहती है, लेकिन बढ़ती उम्र का मतलब बूढ़ा होना नही है। इस संसार में बहुत सारे ऐसे तत्व पाए जाते है जो बूढ़ा होने से बचा सकते है। अाप सभी ने बहुत सारे ऐसे व्यक्तियों के बारे में सुना होगा जिनकी उम्र 200 से 500 वर्ष हुआ करती थी। आज के इस रासायनिक और मिलावटी युग में ऐसा तो संभव नही है लेकिन बुढ़ापे से लड़ने के लिए प्रकृति ने आज भी उन औषधीयों को हमारे लिए बचा कर रखा है।

आज मैं उन्हीं औषधीयों के बारे में बताने जा रहा हूं। इनका नियमित सेवन करने से बाल हमेशा काले रहते है, दांत कभी नही टूटते, शरीर की चमड़ी नही लटकती है, शरीर की सारी कोशिकाए हमेशा काम करती रहती है, शारीरिक शक्ति हमेशा बनी रहती है। इसके अलावा ये कुछ ऐसी बिमारियों को भी ठीक करती है जिनको आप शरमिंदगी के कारण किसी को बता नही सकते है।
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गोरखमुंडी बूटी को फूल आने से पहले उखाड़ कर छाया में सुखा कर उसका चूर्ण बना ले।
                           गोरखमुंडी

भृंगराज को भी चूर्ण अवस्था में बदलें।
                       भृंगराज

भृंगराज और गोरखमुंडी का चूर्ण को समान मात्रा में मिलाएं। इसे बनाना बहुत मेहनत का कार्य है इसलिए आप चाहे तो दोनों चूर्ण को ज्यादा ज्यादा मात्रा में ले सकते हैं। दोनों को मिलाने के बाद इसे मिट्टी के कैसे साफ बर्तन में डाल दें। उसके बाद इसमें भृंगराज का ताजा रस डालें। रस इतनी मात्रा में होना चाहिए कि औषधि पूरी तरह उसमें डूब जाए। उसके पश्चात इसे सूखने के लिए रख दें। जब यह सूख जाए तो पुनः इस में भृंगराज का रस उतनी ही मात्रा में मिलाएं। ध्यान रहे किरस मिलाने के बाद इसे हर थोड़ी देर पर हिलाते रहे। यह प्रक्रिया पूरे 40 बार करनी होगी। औषधि बनाने में समय तो लगेगा पर यह अवश्य भी बहुत ही शक्तिशाली होगी। आखरी बार भृंगराज का रस मिलाने के बाद यानी 40वें बार रसके सूख जाने पर इसमें कुछ ना मिलाएं। आप की औषधि सेवन के लिए तैयार है।

सेवन विधि- रोज सुबह 10 ग्राम औषधि गाय के दूध के साथ खाएं। ध्यान रहे औषधि के सेवन के लिए गाय के दूध के अलावा कुछ अन्य पदार्थ ना लें। एक और ध्यान रखने योग्य बात है लगभग 6 माह तक ब्रम्हचर्य का पालन अवश्य करें। यदि आप इतना सब करने में समर्थ हैं तो 6 मा भाग आप इस औषधि के शक्तिशाली परिणामों को देखकर आश्चर्यचकित हो जाएंगे। आप खुद ही अनुभव करेंगे कि जितनी मेहनत आपने इसको बनाने में लगाया है उतना ही लाभदायक है यह औषधि।
यदि आप इस दवा को बनाने में असमर्थ है तो आप ऐसे लोगों की सहायता ले सकते हैं जो आयुर्वेदिक दवाएं तैयार करते हैं। आपको बाजार में बहुत सारे आयुर्वेदिक दवा तैयार करने वाले लोग मिल जाएंगे जो कुछ पैसे लेकर आपके लिए यह दवा तैयार कर देंगे। लेकिन यदि संभव हो तो दवा उसी व्यक्ति से तैयार करवाएं जिन से आप भली भांति परिचित हो, क्योंकि कुछ लोग पैसे कमाने के लिए इस प्रकार की नकली दवाएं बेचने का कार्य भी करते हैं। ऐसे लोगों से हमेशा सावधान रहें और उनसे कभी दवा ना बनवाएं। इस दवा का सेवन लगभग 6 माह से 1 वर्ष तक करें।

कोलेस्ट्रॉल कम करने का रामबाण उपाय


1. आधा लीटर पानी में दो चम्मच धनिया का बीज मिलाकर उसे अच्छे से उबालें। अच्छी तरह उबल जाने पर पानी को छान लें और उसे तीन बराबर भाग में बांट दे। उसके बाद उसे सुबह, दोपहर और शाम उस पानी को पीए। कुछ ही दिनों में कोलेसट्रॉल कम होने लगेगा और धीरे धीरे खत्म हो जाएगा।

2. हर रोज एक गिलास लौकी का रस पीने से खराब कोलेस्ट्रॉल बहुत तेजी से कम होने लगता है। आप लौकी का रस घर में भी बना सकते है। ध्यान रहे की लौकी ताजी हो और बिल्कुल भी कड़वी ना हो। फ्रिज में रखे लौकी का प्रयोग ना करें। हर रोज ताजी लौकी ही लाए।
Jabong POP CPV IN    RelianceTrends CPV (IN) 3. रोज सुबह एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़ कर पीए। इससे कोलेस्ट्रॉल नियंत्रीत होने लगता है और धीरे धीरे खत्म होने लगता है।

4. कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए शारीरिक मेहनत भी जरूरी है। हर रोज कम से कम एक किलोमीटर तक दौड़े या तेज गति से चलें।

हमारे द्वारा बताए गए उपाय को नियमित रूप से करने पर कुछ ही दिनों में आप का कोलेस्ट्रॉल खत्म होने लगेगा।

इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि सभी जरूरतमंदों तक ये जानकारी पहुंच सके।

मेथी दाने के चमत्कारी गुण


1. मेथी दाने में आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जो लोग खून की कमी की समस्या से परेशान है वो लोग रोज सुबह एच चम्मच भुने हुए मेथी दाने को चबाकर खाए। रोग चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो लाभ जरूर होगा।

2. कई बार लोगों को ज्यादा गर्मी लगती है। कुछ लोगों में सूंघने की शक्ति खत्म हो जाती है। दोनों प्रकार के रोगी दिन 4-5 मेथी दाने को कच्चा चबाकर खाए। यह क्रिया दिन में 2-3 बार करें। इसके साथ मेथी के चूर्ण को जोर जोर से सूंघे।

3. यदि किसी मलेरिया हुआ हो तो उस रोगी को दिन 3-4 बार मेथी दाने की चाय बनाकर दें। मलेरिया मे ये बहुत ज्यादा फायदेमंद है।
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4. जिन लोगों का कफ के कारण सीना, नाक, गला और सिर भारी लगने लगता है वो लोग दिन 3-4 बार मेथी दाने का काढा़ बनाकर पिए। यदि संभव हो तो इसके साथ साथ उपवास भी रख ले, इससे प्रभाव 10 गुणा बढ़ जाता है।

5. शुगर की बिमारी में मेथी दाना अमृत के समान है। रोज सुबह खाली पेट 1 से 2 चम्मच मेथी दाने का सेवन करें।

6. यदि आप सिर में रूसी की समस्या से परेशान हो तो मेथी दाने को उबाल कर उसके पानी से सिर धोए। दो से तीन दिन में ही परिणाम दिख जाएगा।

7. बालों को मजबूत और मुलायम बनाने के लिए मेथी दाने को कूट कर उसका पेस्ट बना ले, और उसे मेहंदी की तरह बालों में लगाए।

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