आज मैं उन्हीं औषधीयों के बारे में बताने जा रहा हूं। इनका नियमित सेवन करने से बाल हमेशा काले रहते है, दांत कभी नही टूटते, शरीर की चमड़ी नही लटकती है, शरीर की सारी कोशिकाए हमेशा काम करती रहती है, शारीरिक शक्ति हमेशा बनी रहती है। इसके अलावा ये कुछ ऐसी बिमारियों को भी ठीक करती है जिनको आप शरमिंदगी के कारण किसी को बता नही सकते है।
गोरखमुंडी बूटी को फूल आने से पहले उखाड़ कर छाया में सुखा कर उसका चूर्ण बना ले।
गोरखमुंडी
भृंगराज को भी चूर्ण अवस्था में बदलें।
भृंगराज
भृंगराज और गोरखमुंडी का चूर्ण को समान मात्रा में मिलाएं। इसे बनाना बहुत मेहनत का कार्य है इसलिए आप चाहे तो दोनों चूर्ण को ज्यादा ज्यादा मात्रा में ले सकते हैं। दोनों को मिलाने के बाद इसे मिट्टी के कैसे साफ बर्तन में डाल दें। उसके बाद इसमें भृंगराज का ताजा रस डालें। रस इतनी मात्रा में होना चाहिए कि औषधि पूरी तरह उसमें डूब जाए। उसके पश्चात इसे सूखने के लिए रख दें। जब यह सूख जाए तो पुनः इस में भृंगराज का रस उतनी ही मात्रा में मिलाएं। ध्यान रहे किरस मिलाने के बाद इसे हर थोड़ी देर पर हिलाते रहे। यह प्रक्रिया पूरे 40 बार करनी होगी। औषधि बनाने में समय तो लगेगा पर यह अवश्य भी बहुत ही शक्तिशाली होगी। आखरी बार भृंगराज का रस मिलाने के बाद यानी 40वें बार रसके सूख जाने पर इसमें कुछ ना मिलाएं। आप की औषधि सेवन के लिए तैयार है।
सेवन विधि- रोज सुबह 10 ग्राम औषधि गाय के दूध के साथ खाएं। ध्यान रहे औषधि के सेवन के लिए गाय के दूध के अलावा कुछ अन्य पदार्थ ना लें। एक और ध्यान रखने योग्य बात है लगभग 6 माह तक ब्रम्हचर्य का पालन अवश्य करें। यदि आप इतना सब करने में समर्थ हैं तो 6 मा भाग आप इस औषधि के शक्तिशाली परिणामों को देखकर आश्चर्यचकित हो जाएंगे। आप खुद ही अनुभव करेंगे कि जितनी मेहनत आपने इसको बनाने में लगाया है उतना ही लाभदायक है यह औषधि।
यदि आप इस दवा को बनाने में असमर्थ है तो आप ऐसे लोगों की सहायता ले सकते हैं जो आयुर्वेदिक दवाएं तैयार करते हैं। आपको बाजार में बहुत सारे आयुर्वेदिक दवा तैयार करने वाले लोग मिल जाएंगे जो कुछ पैसे लेकर आपके लिए यह दवा तैयार कर देंगे। लेकिन यदि संभव हो तो दवा उसी व्यक्ति से तैयार करवाएं जिन से आप भली भांति परिचित हो, क्योंकि कुछ लोग पैसे कमाने के लिए इस प्रकार की नकली दवाएं बेचने का कार्य भी करते हैं। ऐसे लोगों से हमेशा सावधान रहें और उनसे कभी दवा ना बनवाएं। इस दवा का सेवन लगभग 6 माह से 1 वर्ष तक करें।









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