शरीर का जो अंग पूरी तरीके से कार्य करना बंद कर देता है उस अंग को लकवा या पैरालिसिस ग्रस्त अंग कहते हैं। लकवा लगने का सबसे बड़ा कारण शरीर के कुछ अंगों तक रक्त प्रवाह कब बंद हो जाना है। जब शरीर के उस हिस्से तक रक्त ना के बराबर पहुंचता है तो वह धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है। एक समय ऐसा आता है जब शरीर का वह भाग आप को छूने पर भी महसूस नहीं होता। इसी बीमारी को पैरालिसिस कहा जाता है।
आयुर्वेद में इस बीमारी के लिए कुछ औषधियों का वर्णन है। इन औषधियों के नियमित प्रयोग से लकवा जैसा रोग पूरी तरीके से समाप्त हो जाता है। जब लकवाग्रस्त अंग पर रक्त प्रवाह सुचारू रूप से होने लगता है तो वह अंग धीरे-धीरे स्वता ही ठीक हो जाता है। यह औषधियां रक्त को उस अंग तक पहुंचाने का कार्य करती है जो अंग लकवाग्रस्त है। इन औषधियों का सेवन किसी भी प्रकार से हानिकारक नहीं है।
कलौंजी एक चम्मच
लहसुन की कली- 8 नग
सोंठ- आधा चम्मच
त्रिफला- आधा चम्मच
सभी चीजों को एक साथ अच्छी तरह से मिला लें। इसके बाद दो गिलास पानी में इन सभी औषधियों को डालकर उन्हें तब तक उबालें जब तक पानी एक गिलास ना बचे। पानी एक गिलास हो जाने पर पानी को अच्छे से जान ले और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। कुछ ही दिनों में आपके लकवाग्रस्त अंग में फर्क आपको दिखने लगेगा।







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