नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करेंगे चर्म रोग के विषय में। चर्म रोग का मुख्य कारण सुर्य है क्योंकि ओजोन की परत में छेद होने के कारण सुर्य की पराबैंगनी किरणें सीधे धरती तक पहुंचती है। जिसकी इंसानो पर बुरा प्रभाव चर्म रोग के रूप में होता है। कभी कभी ये रोग विषैला भोजन करने से भी हो जाता है।
चर्म रोग कई प्रकार के होते है। इसमे से कुछ शरीर के भीतर भी होते है। शरीर के बाहरी हिस्सों में होने वाले चर्म रोगों में सबसे खतरनाक सोरायसिस होता है। ये इतना जिद्दी रोग है कि अंग्रेजी दवा का प्रयोग करते ही छुपने लगता है और आप को लगने लगता है कि ये रोग ठीक हो रहा है। लेकिन जैसे ही आप दवा का प्रयोग बंद कर देते है ये रोग पुन: विक्राल रूप धारण कर लेता है।
ये बात सभी जानते है कि अंग्रेजी दवा तुरन्त असर करती है जिसकी वजह से तकलीफ तुरन्त कम हो जाती है लेकिन वो पूरी तरह से ठीक नही होती है। धीरे धीरे अंग्रेजी दवा का असर कम होने लगता है और बिमारी फिर सै अपना रूप धारण कर लेती है।
आज मै अाप को इस बिमारी के लिए आर्वेदिक इलाज बता रहा हुं। ये दवा आप अपने खर पर स्वय ही बना सकते है।
50 ग्राम नीम के पत्ते
50 ग्राम गिलोय की बेल
100 ग्राम त्रिफला
50 ग्राम चिरायता
50 ग्राम हल्दी
50 ग्राम मंजिष्टा
20 ग्राम कुटकी
सेवन विधी: सुबह शाम खाना खाने के एक घंटे बाद गर्म पानी से एक एक चम्मच इक दवा का प्रयोग करें।
कृप्या ध्यान दे ये सोरायसिस बहुत ही जिद्दी और खतरनाक बिमारी है इसलिए दवा का प्रयोग कम से कम 6 माह या एक वर्ष तक करें।







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